October 9, 2026

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राँची 9 अक्टूबर 26*झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता रूपी सोरेन का निधन: 80 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस, राज्य में शोक की लहर

राँची 9 अक्टूबर 26*झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता रूपी सोरेन का निधन: 80 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस, राज्य में शोक की लहर

राँची 9 अक्टूबर 26*झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता रूपी सोरेन का निधन: 80 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस, राज्य में शोक की लहर

​रांची:से उर्मिला शर्मा की रिपोर्ट यूपीआजतक 

झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य के लिए एक अत्यंत दुखद खबर सामने आई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक व पूर्व मुख्यमंत्री ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन की धर्मपत्नी और वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता श्रीमती रूपी सोरेन का बुधवार, 7 अक्टूबर को निधन हो गया। वे 80 वर्ष की थीं। उन्होंने रांची के एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर फैलते ही झारखंड समेत पूरे देश के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। विभिन्न दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राज्य की जनता ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

​अस्पताल में ली अंतिम सांस

​पारिवारिक सूत्रों और अस्पताल प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार, श्रीमती रूपी सोरेन पिछले कुछ समय से उम्र संबंधी कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं। हाल ही में उन्हें सांस लेने में गंभीर तकलीफ की शिकायत के बाद रांची के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

​अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्सकों की एक विशेष टीम उनकी निगरानी कर रही थी। स्थिति गंभीर होने पर उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर भी रखा गया था। हालांकि, डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद 7 अक्टूबर की शाम उनका स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ा और उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन के समय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, उनके परिवार के सदस्य और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता अस्पताल में ही उपस्थित थे।

​झारखंड आंदोलन और परिवार की मजबूत रीढ़

​श्रीमती रूपी सोरेन केवल एक राजनेता की पत्नी या मुख्यमंत्री की मां ही नहीं थीं, बल्कि वे झारखंड आंदोलन के उस दौर की जीवंत साक्षी थीं जब राज्य अलग पहचान के लिए संघर्ष कर रहा था। जब शिबू सोरेन आदिवासियों, वंचितों और जल-जंगल-जमीन के अधिकारों के लिए जंगलों और गांवों में लंबा संघर्ष कर रहे थे, उस कठिन दौर में रूपी सोरेन ने पूरे परिवार को संभाला।

​उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में बच्चों की परवरिश की और गुरुजी के संघर्षों में हमेशा एक मौन लेकिन दृढ़ शक्ति बनकर उनके साथ खड़ी रहीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि झामुमो के शुरुआती संघर्षपूर्ण दिनों में शिबू सोरेन को घर-परिवार की चिंताओं से मुक्त रखने में रूपी सोरेन की भूमिका सर्वोपरि रही। उनका व्यक्तित्व अत्यंत सरल, सहज और ममतामयी था। वे हमेशा आम लोगों और कार्यकर्ताओं से बेहद आत्मीयता से मिलती थीं।

​राजनीतिक जगत में शोक की लहर

​रूपी सोरेन के निधन की सूचना मिलते ही राज्य मंत्रिमंडल के सदस्यों, विधायकों और विपक्षी दलों के नेताओं ने शोक संवेदनाएं व्यक्त करना शुरू कर दिया।

  • ​राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता और वरिष्ठ कांग्रेस नेता इरफान अंसारी ने सोशल मीडिया पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पूज्य माता जी का जाना अत्यंत हृदयविदारक और पीड़ादायक है। उनका जाना सोरेन परिवार ही नहीं, बल्कि समूचे झारखंड के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
  • ​राज्यपाल ने भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन से फोन पर बात कर अपनी गहरी संवेदना प्रकट की। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को यह असह्य दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।
  • ​विपक्षी नेताओं ने भी दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस दुख की घड़ी में सोरेन परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की है। भाजपा, कांग्रेस, राजद और वाम दलों के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें एक सरल, संघर्षशील और ममतामयी व्यक्तित्व के रूप में याद किया।

​सरकारी कार्यक्रमों में बदलाव और श्रद्धांजलि

​माता के निधन के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने सभी पूर्व निर्धारित सरकारी कार्यक्रम और बैठकें तत्काल प्रभाव से रद्द कर दीं। उनके आवास पर शोक व्यक्त करने वालों का तांता लगा हुआ है। राज्य भर से झामुमो कार्यकर्ताओं और समर्थकों का रांची पहुंचना शुरू हो गया है। पार्टी पदाधिकारियों ने इसे झारखंड मुक्ति मोर्चा परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है।

​अस्पताल से औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए उनके आवास पर लाया गया, जहां बड़ी संख्या में मंत्रियों, विधायकों, वरिष्ठ अधिकारियों और आम जनता ने पहुंचकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सोरेन परिवार के पैतृक गांव नेमरा (रामगढ़) में भी मातम का माहौल है, जहां के ग्रामीण अपनी ‘चाची जी’ के संघर्ष और सादगी भरे जीवन को याद कर भावुक हो रहे हैं। रूपी सोरेन अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं, जिसमें उनके पति शिबू सोरेन, पुत्र हेमंत सोरेन और बसंत सोरेन सहित अन्य पारिवारिक सदस्य शामिल हैं।