मीरजापुर28अगस्त24*थाना प्रभारी शैलेश राय के खिलाफ एफआईआर का आदेश, भ्रष्टाचार और अवैध कब्जे के आरोप*
मिर्जापुर से कमलाकांत पाण्डेय की रिपोर्ट यूपीआजतक
**मीरजापुर (2024)**: थाना जिगना के प्रभारी शैलेश राय पर भ्रष्टाचार, अवैध कब्जे और दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगते ही न्यायालय ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश जारी कर दिया है। इस आदेश ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है और एक बार फिर साबित कर दिया है कि प्रशासनिक भ्रष्टाचार और ताकतवरों का दुरुपयोग कितनी दूर तक जा सकता है।
**थाना प्रभारी की ‘कानून के पालन’ की मिसाल:**
शैलेश राय, जो कानून के रक्षक बनने का दावा करते हैं, खुद कई गंभीर आरोपों में घिर चुके हैं। आरोप है कि राय ने अपने पद का दुरुपयोग कर एक विवादित जमीन को अवैध तरीके से कब्जा कराया और पीड़ित सभा शंकर दुबे के घर में घुसकर तोड़फोड़ की। दुबे ने न्यायालय में जो प्रार्थना पत्र दायर किया, उसमें स्पष्ट आरोप लगाया गया है कि राय और उनके सहयोगियों ने महिलाओं के साथ भी अमानवीय व्यवहार किया और उन्हें गालियाँ दीं।
**उच्चाधिकारियों की ‘सक्षम निगरानी’ की पोल:**
दुबे ने इस मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों और मुख्यमंत्री पोर्टल पर की थी, लेकिन पुलिस विभाग की ‘सक्षम निगरानी’ ने इस शिकायत को दरकिनार कर दिया। इसने साबित कर दिया कि उच्चाधिकारियों की निष्क्रियता और भ्रष्टाचार से पीड़ितों को न्याय मिलने की उम्मीदें कितनी क्षीण हैं। जैसे कहते हैं, “उधार की जिंदगानी है, मंत्री की दीवानी है।”
**शैलेश राय के ‘कानूनी चमत्कार’:**
शैलेश राय का दावा है कि वे कानून के पालनकर्ता हैं, लेकिन उनके खिलाफ लगने वाले आरोप उनकी ‘कानूनी चमत्कारीकृत’ छवि को ध्वस्त कर रहे हैं। राय पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी गाड़ी का दुरुपयोग कर पीड़ित के घर में घुसकर तोड़फोड़ की और उन्हें धमकियाँ दीं। यह स्थिति “आ बैल मुझे मार” वाली कहावत को सही साबित करती है, जहां एक पुलिस अधिकारी खुद ही कानून की धज्जियाँ उड़ाता है।
**भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति की कड़ी:**
सूत्रों के अनुसार, शैलेश राय के ऊपर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप भी हैं। यदि उनकी संपत्तियों की गहराई से जांच की जाए, तो इनके ऊपर कई गंभीर अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। यह मामले की गंभीरता को दिखाते हुए एक स्पष्ट संकेत है कि “हमाम में सब नंगे हैं।”
**न्याय की उम्मीद और सरकारी लापरवाही:**
अदालत ने थाना जिगना के प्रभारी शैलेश राय और अन्य आरोपितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है, और थानाध्यक्ष को 3 दिन के भीतर एफआईआर की प्रति पेश करने का निर्देश दिया है। यह आदेश “सौ सुनार की, एक लुहार की” की कहावत को सार्थक करते हुए दिखाता है कि आखिरकार न्याय का पहिया चलता है, हालांकि बहुत देर से ही सही। इस पूरी घटना ने एक बार फिर से साबित कर दिया है कि प्रशासनिक भ्रष्टाचार और ताकतवरों की गुंडागर्दी किस हद तक पहुंच सकती है। शैलेश राय जैसे अधिकारियों की करनी को देखकर यही कहना पड़ता है कि “मामला थाना प्रभारी से शुरू हुआ और पीड़ित के घर तक पहुँच गया।” अब देखना होगा कि न्यायालय की ओर से इस मामले में कितनी गंभीरता से कार्रवाई होती है और पीड़ित को कितनी राहत मिलती है।

More Stories
कानपुर नगर23मई26*घर लौट रहे युवक पर हमला, 20 हजार छीने : युवक के चेहरे पर गंभीर चोट
कानपुर नगर23मई26*घर में सोते रहे लोग,दरवाजे व छत के रास्ते घुसे चोर, नगदी-जेवर समेटकर फरार हुए
जौनपुर23मई26*जंघई रेलवे स्टेशन पर मानवता और सतर्कता की मिसाल देखने को मिली