September 16, 2026

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महोबा 16 सितंबर 26*कचरा संयंत्र पर लाखों रुपये खर्च, फिर भी चरखारी में सड़क किनारे और बस्ती के बीच कचरे के ढेर

महोबा 16 सितंबर 26*कचरा संयंत्र पर लाखों रुपये खर्च, फिर भी चरखारी में सड़क किनारे और बस्ती के बीच कचरे के ढेर

महोबा 16 सितंबर 26*कचरा संयंत्र पर लाखों रुपये खर्च, फिर भी चरखारी में सड़क किनारे और बस्ती के बीच कचरे के ढेर

 

महोबा/चरखारी। नगर पालिका परिषद चरखारी द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और कचरा निस्तारण की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद नगर में कूड़े की समस्या खत्म होती नजर नहीं आ रही है। चरखारी नगर के कई हिस्सों में सड़क किनारे, बस्तियों के आसपास और तालाबों के किनारे खुले में कचरा डाले जाने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि जब कचरा प्रबंधन के लिए नगर पालिका की ओर से कचरा संयंत्र तैयार किया गया है, तो इसके बावजूद खुले में कचरा फेंका जाना समझ से परे है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, नगर में जगह-जगह कचरे के ढेर दिखाई दे रहे हैं। सड़क किनारे जमा कूड़े के कारण राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, बस्ती के बीच या आबादी के नजदीक कचरा जमा होने से दुर्गंध और गंदगी की समस्या बनी हुई है। लंबे समय तक कचरा पड़ा रहने से आसपास का वातावरण भी प्रभावित हो रहा है।
तालाबों के किनारे कचरा फेंके जाने से बढ़ी चिंता
चरखारी में तालाबों के आसपास खुले में कचरा डाले जाने को लेकर लोगों की चिंता और बढ़ गई है। तालाबों को नगर की महत्वपूर्ण जल संरचनाओं के रूप में देखा जाता है, लेकिन इनके आसपास कूड़े के ढेर जमा होने से उनकी साफ-सफाई और सुंदरता प्रभावित हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि तालाबों के किनारे प्लास्टिक, घरेलू कचरा और अन्य अपशिष्ट जमा होने से जल स्रोतों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
कचरे से निकलने वाली दुर्गंध के कारण आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी हो रही है। इसके अलावा गंदगी के कारण मच्छर और अन्य कीट-पतंगों के पनपने की आशंका भी बनी रहती है। लोगों का कहना है कि नगर पालिका को ऐसे स्थानों की नियमित निगरानी करनी चाहिए और तालाबों के आसपास कचरा डालने पर रोक लगाने के लिए प्रभावी व्यवस्था करनी चाहिए।
लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी सवाल
नगर पालिका परिषद की ओर से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और कचरा संयंत्र पर लाखों रुपये खर्च किए जाने की बात सामने आने के बाद अब स्थानीय लोग इसके संचालन और उपयोग को लेकर सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि कचरा संयंत्र का उद्देश्य नगर से निकलने वाले कचरे का व्यवस्थित निस्तारण करना है, तो फिर सड़क किनारे और बस्तियों के आसपास खुले में कचरा क्यों डाला जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि नगर पालिका परिषद कचरा संयंत्र का प्रभावी और नियमित संचालन सुनिश्चित करे। इसके साथ ही घरों और दुकानों से निकलने वाले कचरे को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार एकत्र कर उसे उचित स्थान तक पहुंचाया जाए।
स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों पर भी सवाल
देशभर में स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। लोगों को खुले में कचरा न डालने, स्वच्छ वातावरण बनाए रखने और कचरे के उचित निस्तारण के लिए जागरूक किया जा रहा है। ऐसे में चरखारी में सार्वजनिक स्थानों, सड़क किनारे और तालाबों के आसपास कचरे के ढेर दिखाई देना स्वच्छता व्यवस्था के सामने चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के तहत गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग एकत्र करना और उसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उसका निस्तारण करना जरूरी माना जाता है। यदि कचरे का पृथक्करण और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण नहीं किया जाता है, तो इससे पर्यावरण और सार्वजनिक स्वच्छता से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था मजबूत करने की मांग
स्थानीय लोगों ने नगर पालिका परिषद से घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था को प्रभावी बनाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि प्रत्येक घर और दुकान से नियमित रूप से कचरा एकत्र किया जाए और उसके निस्तारण की उचित व्यवस्था हो, तो सड़क किनारे कूड़ा फेंकने की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
इसके साथ ही लोगों को यह भी जागरूक किए जाने की जरूरत है कि वे कचरा सार्वजनिक स्थानों, नालियों, तालाबों और सड़क किनारे न डालें। नगर पालिका को संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ नियमित सफाई व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी चाहिए।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरकारी धन से तैयार किए गए कचरा प्रबंधन संसाधनों का पूरा उपयोग तभी सार्थक होगा, जब उनका नियमित और प्रभावी संचालन हो। चरखारी में लोगों को अब उम्मीद है कि नगर पालिका परिषद खुले में कचरा डाले जाने की समस्या पर गंभीरता से कार्रवाई करेगी और कचरा संयंत्र को प्रभावी ढंग से संचालित कराएगी।
फिलहाल सड़क किनारे, बस्ती और तालाबों के आसपास जमा कचरे ने नगर की सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि खुले में कचरा डालने पर तत्काल रोक लगाई जाए, नियमित कूड़ा उठान कराया जाए और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था को धरातल पर प्रभावी बनाया जाए।
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“लाखों खर्च, फिर भी कचरे के ढेर!”
“चरखारी की सफाई व्यवस्था पर सवाल”

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