बाराबंकी21जुलाई26*’83 सीटों का रिमोट हमारे पास’, रामनगर से अरविंद राजभर का बड़ा सियासी दावा
– राष्ट्रीय प्रधान महासचिव डॉ. अरविंद राजभर बोले— पूर्वांचल की सियासत का गणित सुभासपा की भूमिका से तय होता है
– रामनगर सीट पर ठोकी मजबूत दावेदारी, विपक्ष पर साधा निशाना और नेताओं की परीक्षा की उठाई मांग
– 83 सीटों के दावे से पूर्वांचल की राजनीति में नई हलचल
बाराबंकी। विधानसभा चुनाव-2027 भले अभी दूर हो, लेकिन पूर्वांचल की राजनीति का तापमान अभी से बढ़ने लगा है। इसकी झलक मंगलवार को रामनगर में देखने को मिली, जहां सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव एवं पार्टी अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर के बड़े पुत्र डॉ. अरविंद राजभर ने कई बड़े राजनीतिक दावे कर सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल की 83 विधानसभा सीटों पर सुभासपा का प्रभाव सत्ता का समीकरण बदलने की क्षमता रखता है। उनका दावा था कि 2017 में एनडीए के साथ रहने पर गठबंधन को प्रचंड बहुमत मिला, जबकि 2022 में सपा के साथ रहने से वही क्षेत्र समाजवादी पार्टी के पक्ष में गया। अब एक बार फिर सुभासपा एनडीए के साथ है और 2027 में भी गठबंधन की बड़ी जीत तय है।
( रामनगर को बनाया चुनावी अभियान का केंद्र )
डॉ. अरविंद राजभर ने साफ किया कि रामनगर विधानसभा सीट उनकी पार्टी के लिए केवल राजनीतिक महत्व नहीं रखती, बल्कि यह वर्षों से अधूरी रही राजनीतिक आकांक्षा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल समाज के बड़ी संख्या में लोग इस क्षेत्र में रहते हैं और लगातार मांग कर रहे हैं कि यहां से सुभासपा का प्रत्याशी चुनाव लड़े। उन्होंने याद दिलाया कि 2007, 2012, 2017 और 2022 में गठबंधन की मजबूरियों के चलते यह सीट पार्टी के हिस्से में नहीं आ सकी। इस बार पार्टी ने रणनीति बदलते हुए अधिकांश नए जिलों में चुनाव न लड़ने का फैसला किया है और पूरी ताकत रामनगर पर लगाने का निर्णय लिया है। उन्होंने यह भी बताया कि इस संबंध में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को पार्टी की मंशा से अवगत करा दिया गया है।
( विपक्ष पर तंज, विधायकों को लेकर दावों पर पलटवार )
समाजवादी पार्टी की ओर से सुभासपा के विधायकों को लेकर दिए जा रहे बयानों पर डॉ. राजभर ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि यदि वह भी यह दावा कर दें कि समाजवादी पार्टी के कई विधायक और सांसद उनके संपर्क में हैं, तो उसे लोग “छोटे मुंह बड़ी बात” कहेंगे। उन्होंने कहा कि केवल एक विधायक के आचरण को छोड़ दिया जाए तो बाकी सभी दावे बेबुनियाद हैं। साथ ही उन्होंने विपक्षी नेतृत्व पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कुछ नेता अपने सलाहकारों की बातों पर अधिक भरोसा कर रहे हैं, इसलिए उनके बयान वास्तविकता से दूर दिखाई देते हैं।
( नेताओं के लिए भी हो परीक्षा, युवाओं को दिया नया राजनीतिक संदेश )
युवाओं को राजनीति से जोड़ने के सवाल पर डॉ. राजभर ने एक अलग सोच सामने रखी। उन्होंने कहा कि जिस तरह एक प्रशासनिक अधिकारी बनने के लिए कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है, उसी तरह जनप्रतिनिधियों के लिए भी न्यूनतम योग्यता, परीक्षा और साक्षात्कार की व्यवस्था होनी चाहिए। उनका मानना है कि संविधान का अध्ययन प्राथमिक स्तर से अनिवार्य किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य का नागरिक अपने अधिकारों और कर्तव्यों से परिचित हो सके। उन्होंने कहा कि देश की 54 प्रतिशत युवा आबादी रोजगार, शिक्षा और सामाजिक समानता जैसे मुद्दों पर गंभीर राजनीति चाहती है और सुभासपा उसी दिशा में काम करना चाहती है।
( छात्र आंदोलन, ब्राह्मण समाज और 2027 पर स्पष्ट संदेश )
दिल्ली के छात्र आंदोलन पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जब तक आंदोलन छात्रों तक सीमित था, तब तक उनका समर्थन था, लेकिन जैसे ही विपक्षी दल उसमें सक्रिय हुए, आंदोलन का स्वरूप बदल गया और सरकार की कार्रवाई स्वाभाविक हो गई। वहीं ब्राह्मण समाज से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज हमेशा सम्मान का पात्र रहा है और आगे भी रहेगा। उन्होंने विपक्ष के कुछ नेताओं पर ब्राह्मण समाज के प्रति अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने का आरोप लगाते हुए इसकी आलोचना की।राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में डॉ. अरविंद राजभर का यह दौरा केवल संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि 2027 के चुनावी रण का शुरुआती संकेत था। रामनगर से उम्मीदवार की दावेदारी, 83 सीटों पर प्रभाव का दावा और युवाओं के लिए नई राजनीतिक सोच— इन तीनों संदेशों के जरिए सुभासपा ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की है कि वह आगामी चुनाव में केवल सहयोगी दल नहीं, बल्कि सत्ता के समीकरण को प्रभावित करने वाली ताकत के रूप में अपनी पहचान स्थापित करना चाहती है। अब देखना होगा कि यह दावा चुनावी मैदान में कितना असर छोड़ता है और रामनगर की सियासत किस दिशा में करवट लेती है।

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