March 20, 2026

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नई दिल्ली १८ मार्च २६ * यूपीआजतक न्यूज चैनल पर शाम की देश राज्यों से बड़ी खबरे..

बाड़मेर19 मार्च 26*वाणी उत्सव हुआ तीन दिवसीय,

बाड़मेर19 मार्च 26*वाणी उत्सव हुआ तीन दिवसीय, 26 मार्च को बाखासर रण में गूंजेगी वीणा पर वाणियां 29 व 30 मार्च को बाड़मेर में भव्य आयोजन. सैकङो वीणा गायको को मिलेगा सम्मान व मंच*

*बाड़मेर* – विलुप्तप्राय हो रही पारंपरिक भजन गायन शैली वीणा भजन परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु रूमा देवी फाउंडेशन एवं ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय ‘वाणी उत्सव 2026’ व दानजी भजनी पुरस्कार का आयोजन किया जा रहा है।
राजस्थान की लोक संस्कृति को विश्वव्यापी पहचान दिलाने हेतु प्रयासरत सामाजिक कार्यकर्ता वैश्विक वक्ता रूमा देवी ने बताया कि 26 मार्च 2026 को राम नवमी के उपलक्ष्य में बाखासर के सफेद रण में शाम 4:00 बजे से एक भव्य सांस्कृतिक संध्या से इस वर्ष के वाणी उत्सव का आगाज होने जा रहा है। इस कार्यक्रम में राजस्थान के साथ ही गुजरात व मध्य प्रदेश के लोक गायक वीणा पर भजन गायन की मनमोहक प्रस्तुतियाँ देंगे। कार्यक्रम में प्राकृतिक सफेद रण में सैकड़ों ग्रामीण श्रोता, प्रबुद्धजन एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रहेगी, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय एवं सांस्कृतिक रंग में रंग जाएगा।

वहीं ‘वाणी उत्सव 2026’ का मुख्य आयोजन 29 एवं 30 मार्च 2026 को शिव शक्ति धाम, जसदेव तालाब, बाड़मेर में आयोजित होगा। इस तीन दिवसीय उत्सव में राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, पंजाब सहित देशभर के प्रसिद्ध वाणी गायक भाग लेंगे और संत परंपरा की अमर वाणी को मंच पर प्रस्तुत करेंगे।

उत्सव के अंतर्गत 30 मार्च को ‘दानजी भजननी पुरस्कार’ प्रदान किए जाएंगे, जिसके तहत विभिन्न आयु वर्ग में उत्कृष्ट वाणी गायकों को सम्मानित किया जाएगा एवं लाखों के वाद्य यंत्र प्रदान किए जाएंगे, जिससे कलाकारों को प्रोत्साहन मिलेगा। रूमा देवी ने बताया कि वर्तमान समय में पाश्चात्य प्रभाव के कारण पारंपरिक लोक गायन परंपराएँ धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही हैं। ऐसे में ‘वाणी उत्सव’ का उद्देश्य इस अमूल्य सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना, नई पीढ़ी तक पहुँचाना तथा लोक कलाकारों को एक सशक्त मंच प्रदान करना है।

आयोजकों ने क्षेत्र के सभी कला प्रेमियों एवं आमजन से अपील की है कि वे 26 मार्च को शाम 4:00 बजे बाखासर के रण में तथा 29 व 30 मार्च को जसदेर तालाब आयोजित इस भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर आयोजन को सफल बनाएं और अपनी लोक परंपरा के संरक्षण में भागीदारी निभाएं।

 

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