बांदा10मई26*मासूम को अगवा कर फिरौती मांगने वाले मामा सहित तीन अभियुक्त गिरफ्तार
यूपीआजतक बांदा से ब्यूरो सुनैना निषाद की रिपोर्ट
बांदा से**रिश्ते ने सगे मामा ने अपने ही 10 वर्षीय भांजे को अगवा कर मौत की धमकी के साथ 10 लाख रुपये की फिरौती मांग डाली। लेकिन अपराध की इस खौफनाक पटकथा के बीच बबेरू पुलिस की संयुक्त टीम ने जिस साहस, तकनीकी सूझबूझ और हाईटेक रणनीति का परिचय दिया, उसने न सिर्फ मासूम की जान बचाई बल्कि 30 घंटे के भीतर पूरे गिरोह को दबोचकर यह साबित कर दिया कि अपराध कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून की पकड़ से बच नहीं सकता।
बांदा जिले के बबेरू कस्बे में गुरुवार को उस समय हड़कंप मच गया था जब औगांसी रोड निवासी अनिल विश्वकर्मा का 10 वर्षीय पुत्र हर्षित विश्वकर्मा स्कूल से घर लौटते समय रहस्यमय तरीके से लापता हो गया। राष्ट्रीय बाल शिक्षा निकेतन विद्यालय में कक्षा 4 का छात्र हर्षित रोज की तरह स्कूल गया था, लेकिन दोपहर तक घर न पहुंचने पर परिजनों के होश उड़ गए। पिता अनिल विश्वकर्मा तत्काल विद्यालय पहुंचे। वहां से पता चला कि छुट्टी के बाद हर्षित स्कूल से निकल चुका था। इसके बाद जब उसके दोस्त कृष्णा से पूछताछ हुई तो पूरे मामले ने सनसनीखेज मोड़ ले लिया। कृष्णा ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पास बाइक सवार एक व्यक्ति ने हर्षित को बुलाया और कहा, “यहां क्या घूम रहे हो, आओ अभी घर चलते हैं।” हर्षित उस व्यक्ति को पहचानता था, इसलिए वह उसके साथ बाइक पर बैठकर चला गया। इसके बाद उसका कोई सुराग नहीं मिला। सूचना मिलते ही बबेरू कोतवाली पुलिस एक्शन मोड में आ गई। कोतवाली प्रभारी राजेन्द्र सिंह रजावत के नेतृत्व में चार टीमें गठित की गईं। कस्बे के प्रमुख रास्तों पर निगरानी बढ़ा दी गई। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और डिजिटल ट्रांजेक्शन के आधार पर जांच शुरू हुई। जांच में धीरे-धीरे यह साफ होने लगा कि अपहरणकर्ता कोई बेहद करीबी व्यक्ति है। फिर जो सच सामने आया उसने हर किसी को सन्न कर दिया। मासूम का अपहरण किसी और ने नहीं बल्कि उसके ही सगे मामा रामजी ने किया था।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी रामजी बेहद शातिर तरीके से ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफार्म और व्हाट्सएप-टेलीग्राम के जरिए फिरौती मांग रहा था ताकि उसकी लोकेशन ट्रेस न हो सके। उसने अपनी बहन को बेटे की हत्या की धमकी देते हुए 10 लाख रुपये की फिरौती मांगी। लेकिन पुलिस ने यहां भी अपनी सूझबूझ दिखाई। बच्चे की सकुशल बरामदी को प्राथमिकता देते हुए पुलिस की रणनीति के तहत कुछ रुपये स्कैनर के माध्यम से ऑनलाइन भेजे गए और बाकी रकम जल्द भेजने की बात कही गई। इसी दौरान पुलिस आरोपी की हर डिजिटल गतिविधि पर नजर बनाए रही। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी पलाश बंसल और एएसपी शिवराज लगातार पूरे ऑपरेशन की मॉनिटरिंग कर रहे थे। वहीं सीओ बबेरू कृष्णकांत त्रिपाठी सुबह से ही हर्षित के घर पहुंचकर मां के फोन पर आने वाले संदेशों और कॉल्स को खुद मॉनिटर कर रहे थे। घर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया था। उधर आरोपी रामजी बच्चे को लेकर मुरवल के रास्ते बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे से हरियाणा की ओर निकल गया। पुलिस को जानकारी मिली कि वह दोपहर करीब ढाई बजे टोल से गुजरा था। लेकिन आरोपी इतना शातिर था कि जिस गाड़ी से वह जा रहा था, उसमें किसी दूसरी गाड़ी का फास्टैग लगा रखा था ताकि पुलिस भ्रमित हो जाए। इसके बावजूद पुलिस ने हार नहीं मानी। एक्सप्रेस-वे की टाइमिंग के आधार पर 24 संदिग्ध गाड़ियों को चिन्हित किया गया। इसके बाद एक-एक गाड़ी की मूवमेंट खंगाली गई। आगरा तक पहुंचते-पहुंचते पुलिस ने कई गाड़ियों और नंबरों को शॉर्टलिस्ट कर लिया। इसी बीच फिरौती के बदले भेजे गए वीडियो ने पुलिस को सबसे बड़ा सुराग दे दिया। परिजनों ने आरोपी से बच्चे का वीडियो मांगा था ताकि यकीन हो सके कि हर्षित सुरक्षित है। आरोपी ने जो वीडियो भेजा उसमें कमरे की दीवार पर खास तरह की पेंटिंग और सफेद चादर वाला बेड दिखाई दिया। पुलिस ने उसी वीडियो के आधार पर यह पुष्ट कर लिया कि बच्चा किसी होटल में ठहराया गया है। लोकेशन और वीडियो क्लू के आधार पर पुलिस टीम हरियाणा के रोहतक पहुंची। वहां जिस नंबर की गाड़ी की सूचना थी, वह होटल के बाहर खड़ी मिली। पुलिस ने होटल मैनेजर को बच्चे की फोटो दिखाई। मैनेजर ने तुरंत पहचान करते हुए बताया कि तीन लोग बच्चे के साथ होटल में रुके हैं और उनमें से एक व्यक्ति अभी सिगरेट पीने बाहर गया है।
बस फिर क्या था। पुलिस ने जाल बिछा दिया। जैसे ही आरोपी सिगरेट पीकर लौटा, मैनेजर के इशारे पर पुलिस ने उसे दबोच लिया। इसके बाद उसी से होटल का कमरा खुलवाया गया। दरवाजा खुलते ही पुलिस टीम ने अंदर मौजूद बाकी आरोपियों को भी दबोच लिया और मासूम हर्षित को सकुशल बरामद कर लिया। शाम करीब 6:15 बजे जब पुलिस टीम ने वीडियो कॉल के जरिए हर्षित की बात उसकी मां से कराई तो घर में मौजूद हर आंख नम हो उठी। रोते हुए मां ने कहा, “कैसा बिटवा तू?” इस पर मासूम हर्षित मुस्कराकर बोला, “मां मैं ठीक हूं, मुझे पापा मिल गए हैं”। यह सुनते ही वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आईं। बताया जाता है कि आरोपी रामजी पहले भी विवादित गतिविधियों में शामिल रहा है। उसने अपनी इसी बहन की ससुराल में रहते हुए। लाखों रुपये के ई-ट्रांजेक्शन परिचितों के खातों में किए थे। मामला सामने आने के बाद परिवार ने उससे संबंध खत्म कर दिए थे।
इस पूरे ऑपरेशन में बबेरू कोतवाली प्रभारी राजेन्द्र सिंह रजावत और उनकी टीम की प्रथम भूमिका बेहद अहम रही। पुलिस की तकनीकी दक्षता, त्वरित कार्रवाई और सूझबूझ ने न सिर्फ एक मासूम की जिंदगी बचाई बल्कि यह भी साबित कर दिया कि आधुनिक अपराधों से निपटने के लिए अब पुलिस भी पूरी तरह हाईटेक हो चुकी है।
इसी मामले को लेकर अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज के द्वारा तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर प्रेस कांफ्रेंस करके किया गया खुलासा

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