March 11, 2026

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नई दिल्ली 13दिसम्बर 25*मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान (MASA)*के आह्वान पर*14 दिसंबर 2025*को*अखिल भारतीय मजदूर अधिकार दिवस*का हिस्सा बनें!

नई दिल्ली 13दिसम्बर 25*मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान (MASA)*के आह्वान पर*14 दिसंबर 2025*को*अखिल भारतीय मजदूर अधिकार दिवस*का हिस्सा बनें!

नई दिल्ली 13दिसम्बर 25*मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान (MASA)*के आह्वान पर*14 दिसंबर 2025*को*अखिल भारतीय मजदूर अधिकार दिवस*का हिस्सा बनें!

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*चार मजदूर-विरोधी श्रम कोड के विरुद्ध!*

*मेहनतकश जनता पर देशी-विदेशी पूँजी और फ़ासीवादी ताक़तों के हमलों के विरुद्ध!*

📍 *दिल्ली-एनसीआर* (नई दिल्ली — जंतर-मंतर, अपराह्न 2 बजे)
📍 *पश्चिम बंगाल* (कोलकाता — धर्मतला लेनिन प्रतिमा, अपराह्न 1 बजे)
📍 *बिहार* (पटना — बुद्ध स्मृति पार्क, प्रातः 11 बजे)
📍 *हरियाणा* (कुरुक्षेत्र — देवी लाल पार्क, पीपली, दोपहर 12 बजे)
📍 *उत्तराखंड* (हरिद्वार — चिन्मय डिग्री कॉलेज, अपराह्न 12:30 बजे; | रुद्रपुर — गांधी पार्क, प्रातः 11 बजे)
📍 *उत्तर प्रदेश* (लखनऊ — हज़रतगंज, दोपहर 12 बजे; | बरेली — सेठ दामोदर स्वरूप पार्क, प्रातः 10 बजे)
📍 *पंजाब* (लुधियाना — न्यू आज़ाद नगर, प्रातः 11 बजे)
📍 *ओडिशा* (भुवनेश्वर — विधानसभा के पास मास्टर कैंटीन, प्रातः 11 बजे)
📍 *तमिलनाडु* (चेन्नई — अवाडी, केंद्रीय बस स्टैंड के पास, प्रातः 10 बजे; | कांचीपुरम — केंद्रीय बस स्टैंड के पास, प्रातः 10 बजे)
📍 *कर्नाटक* (दावणगेरे — जयदेव सर्कल; | गुलबर्ग — कामप्ली, कोप्पल)
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प्रिय साथी,
जैसे कि ज्ञात है, पिछले 21 नवंबर को देशभर के मज़दूर संगठनों और ट्रेड यूनियनों के तमाम विरोधों, चेतावनियों और अपीलों को नज़रअंदाज़ करते हुए मोदी सरकार ने पूंजीपतियों के हित में बनाई गई मज़दूर-विरोधी 4 श्रम संहिताओं को दबंगई के साथ लागू कर दिया है। इन चार श्रम संहिताओं के केंद्र में स्थायी रोजगार की समाप्ति, ‘हायर एंड फायर’ नीतू को लागू करना, संगठनबद्ध श्रम का उन्मूलन, कार्यघंटों में वृद्धि, श्रमिक संरक्षणों का उन्मूलन, श्रम न्यायालयों और श्रम विभागों को कमजोर/विघटित करना, ट्रेड यूनियन आंदोलन का अपराधीकरण, श्रमिकों की सुरक्षा में कटौती तथा उनकी असुरक्षा में वृद्धि शामिल है। ये श्रम संहिताएँ भारतीय मज़दूर वर्ग द्वारा लगभग एक सदी तक लड़े गए ट्रेड यूनियन संघर्षों से हासिल किए गए अधिकारों को एक ही झटके में छीन लेने की ताकत रखती हैं। यह मजदूरों को अधिकारविहीन नग्न गुलामी की तरफ धकेलने का सुनियोजित प्रयास है, जिसमें आगामी पीढ़ियों के सपनों और उम्मीदों का गला घोंट दिया जाएगा। यह केवल नीतिगत प्रस्ताव नहीं– यह मजदूर वर्ग पर संगठित, खतरनाक और जालिमाना हमला है, एक वर्गीय युद्ध है जिसे मजदूरों के प्रतिरोध और एकजुट संघर्ष से ही रोका जा सकता है।

साथ में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी ड्राफ्ट राष्ट्रीय श्रम एवं रोजगार नीति (ड्राफ्ट श्रम शक्ति नीति, 2025) एक और मज़दूर विरोधी कदम है। नीति का यह ड्राफ्ट आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण व संवैधानिक दृष्टिकोण के खिलाफ हैं और दलित व महिला विरोधी एवं जातिवादी गुलामी और परिवारवादी निरंकुश राजतंत्र के प्रावधानों वाले हिन्दू धर्म ग्रंथों —मनुस्मृति, याज्ञवल्क्य स्मृति, नारद स्मृति, शुक्र नीति तथा कौटिल्य का अर्थशास्त्र— का महिमा मंडन करता है और कारपोरेट पूंजीपतियों के हित में श्रम को धार्मिक और नैतिक दायित्व बताकर मजदूरों के शोषण और दमन को वैध ठहराता है।

आज, भारत का मज़दूर वर्ग और अन्य मेहनतकश जनता इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुज़र रही है। एक ओर, कॉर्पोरेट पूंजीपतियों का मुनाफ़ा आसमान छू रहा है, वहीं दूसरी ओर, मज़दूरों को नौकरी से निकाला जा रहा है, उनकी मज़दूरी कम की जा रही है, काम के घंटे बढ़ाए जा रहे हैं और उनके सम्मान पर व्यवस्थित रूप से हमला किया जा रहा है। सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों, बैंक और बीमा का निरंतर निजीकरण कर रही है और जनता से ज़रूरी सामाजिक सेवाएं छीन ली हैं।

मज़दूर वर्ग की एकजुट शक्ति को कमज़ोर करने के लिए, शासक वर्ग जानबूझकर सांप्रदायिकता, जातिवाद और अंधराष्ट्रवाद का ज़हर फैला रहा है। ये विभाजनकारी ताकतें पूंजीपति वर्ग के वैचारिक हथियार हैं जो मजदूर वर्ग की एकता को तोड़ते हैं और मज़दूरों के गुस्से को उनके असली दुश्मनों – शोषकों और उत्पीड़कों – से दूर करते हैं।

साथियों, इतिहास गवाह है कि जब भी मज़दूर वर्ग सचेत और संगठित होकर संघर्ष के लिए उठ खड़ा हुआ है, उत्पीड़कों के सिंहासन कांप उठे हैं। मज़दूरों की एकता, संगठन और वर्ग-चेतना पूंजी और प्रतिक्रियावाद पर विजय की सबसे बड़ी गारंटी है। इसलिए शोषण की व्यवस्था को हमेशा के लिए समाप्त करने के लिए मज़दूर वर्ग को वर्ग-संघर्ष, समाजवाद और अंतर्राष्ट्रीयतावाद के झंडे तले आगे बढ़ना होगा।

इसीलिए, MASA (मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान) भारत के सभी मज़दूरों और मेहनतकश जनता से 14 दिसंबर 2025 को अखिल भारतीय मज़दूर अधिकार दिवस के रूप में मनाने का आह्वान कर रहा है, नए श्रम संहिताओं को रद्द कराने, मज़दूरों के कठिन संघर्षों से अर्जित अधिकारों की रक्षा करने तथा फ़ासीवादी हमलों और पूँजीवादी शोषण-दमन के ख़िलाफ़ पूरे भारत में एक जुझारू, निरंतर और निर्णायक संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए।
साथी, इस संघर्ष में हमारे साथ जुड़िए। हम आपसे तथा आपकी यूनियन/संगठन से आह्वान करते हैं कि जहाँ भी संभव हो, 14 दिसंबर को होने वाले प्रदर्शनों और रैलियों में शामिल होकर सामूहिक संघर्ष को मज़बूत करें।

धन्यवाद सहित,
केंद्रीय समन्वय टीम
*मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान (MASA)*
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*मासा की प्रमुख तात्कालिक मांगें :-*
1. मज़दूरों के अधिकार बहाल करो – मज़दूर-विरोधी श्रम संहिताओं को तत्काल निरस्त करो!
2. मज़दूरों के संघर्षों और हड़तालों पर राज्य का दमन बंद करो!
3. ट्रेड यूनियनों को संगठित करने और बनाने की आज़ादी की गारंटी दो!
4. ठेका और अस्थायी मज़दूरी समाप्त करें – सभी नौकरियों को स्थायी करो!
5. न्यूनतम मासिक वेतन ₹30,000 घोषित करो और उसे लागू करो – वेतन को मुद्रास्फीति से जोड़ा जाए!
6. ग्रामीण रोज़गार गारंटी कानून को मज़बूत और विस्तारित करो – ₹1,000 प्रति दिन पर साल में 300 दिन काम की गारंटी करो!
7. 8 घंटे का कार्यदिवस लागू करें – अति-शोषण के पूंजीवादी दबाव का विरोध!
8. गिग और प्लेटफ़ॉर्म मज़दूरों को मज़दूर के रूप में मान्यता दो – डिजिटल युग की गुलामी को समाप्त करो! आंगनवाड़ी,आशा, मिड-डे-मील जैसे स्कीम वर्कर, घरेलू कामगार, आईटी-आईटीइएस मज़दूरों का दर्जा, सभी को श्रम कानूनों की सुरक्षा और ट्रेड यूनियन का पूर्ण अधिकार दो!
9. प्रवासी मज़दूरों की सुरक्षा और सशक्तिकरण – एक मज़दूर वर्ग, एक संघर्ष!
10. सामाजिक सुरक्षा और सम्मानपूर्वक जीने के अधिकार की गारंटी!
11. निजीकरण पर तत्काल रोक लगाओ – कॉर्पोरेट लूट से जनता की संपत्ति की रक्षा करो!
12. विभाजन और नफ़रत की राजनीति बंद करो – फ़ासीवाद के ख़िलाफ़ मज़दूर वर्ग को एकजुट करो!
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*MASA से संबद्ध संगठन, यूनियनें एवं महासंघ :-*
1. ऑल इंडिया वर्कर्स काउंसिल
2. बिहार निर्माण व असंगठित श्रमिक यूनियन
3. सेंटर फ़ॉर स्ट्रगलिंग ट्रेड यूनियन्स (CSTU)
4. ग्रामीण मज़दूर यूनियन, बिहार
5. इंडियन फ़ेडरेशन ऑफ ट्रेड यूनियन्स – सर्वहारा (IFTUS)
6. इंकलाबी मज़दूर केंद्र (IMK)
7. इंकलाबी मज़दूर केंद्र, पंजाब
8. जन संघर्ष मंच हरियाणा
9. कर्नाटक श्रमिक शक्ति
10. लाल झंडा मज़दूर यूनियन (समन्वय समिति)
11. मज़दूर संघर्ष संगठन
12. न्यू डेमोक्रेटिक लेबर फ़्रंट – स्टेट कोऑर्डिनेशन कमेटी (NDLF SCC, तमिलनाडु)
13. सोशलिस्ट वर्कर्स सेंटर (तमिलनाडु)
14. ट्रेड यूनियन सेंटर ऑफ इंडिया (TUCI)

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