जम्मू कश्मीर17अप्रैल25*मौजूदा व्यवस्था बदलना आज वक्त की सबसे बड़ी ज़रूरत है-योगेंद्र सिंह यादव।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भाजपा सरकार आज एक साम्प्रदायिक-फासीवादी सरकार बन चुकी है, जो देश के 99% लोगों की मेहनत की कमाई को चंद बड़े कॉरपोरेट घरानों को सौंपने में लगी है।
देश का मेहनतकश वर्ग-किसान, मज़दूर, कारीगर, मछुआरे, चरवाहे-आज भी संघर्षरत है, लेकिन संसाधनों पर कब्ज़ा पूँजीपतियों, दलालों और साहूकारों का है।
अब समय है व्यवस्था बदलने का, जब मेहनतकश जनता उठेगी, तब असली बदलाव आएगा।
हमारे संघर्ष की दिशा क्या हो?
1.मेहनत की लूट नहीं, मेहनत का हक चाहिए! धरती, पानी, जंगल, खदान-सभी संसाधन मेहनतकशों की ज़रूरतों के लिए हों, न कि मुनाफ़े के लिए।
2.गाँव की ताक़त से बदलाव आएगा!
शहरों की चमक नहीं, गाँवों की मेहनत देश की रीढ़ है।
जब गाँव खड़ा होगा, तब व्यवस्था हिलेगी।
3.संगठित जनता ही बदलाव लाएगी!
बिना संगठन, कोई क्रांति नहीं होती।
गाँव-गाँव, घर-घर संगठन बनाओ-किसानों का, मज़दूरों का, महिलाओं का, नौजवानों का।
4.जनता खुद अपनी ताक़त पहचाने!
राजा-मंत्री-नेता नहीं, आम जनता ही असली मालिक है,बदलाव ऊपर से नहीं, नीचे से आएगा।
5.जो लड़ता है, वही जीतता है!
संघर्ष के बिना कुछ नहीं मिलता।
हमें अपने हक़ चाहिए-ज़मीन, रोज़गार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान!
हमारी माँगें साफ़ हैं:
ज़मीन जोतने वाले को मिलनी चाहिए
सबको रोज़गार मिलना चाहिए/खेती की लूट बंद हो/महँगाई पर रोक लगे
शिक्षा और इलाज सबको मुफ़्त मिले/ और सबसे अहम-जनता का राज हो, पूँजीपतियों का नहीं!
अब वक्त है-एकजुट होने का,
आवाज़ उठाने का,व्यवस्था बदलने का।
“सच्चा लोकतंत्र वही है, जिसमें मेहनत करने वालों की चलती है!”
“संघर्ष हमारा हक़ है-और जीत हमारी ज़रूरत!”

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