April 20, 2026

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कानपुर नगर 20 अप्रैल 26*क्या तिरपाल के नीचे सिसकती इन मासूम जिंदगियों को 'अच्छे दिन' देखने का हक नहीं? --- रचना सिंह गौतम

कानपुर नगर 20 अप्रैल 26*क्या तिरपाल के नीचे सिसकती इन मासूम जिंदगियों को ‘अच्छे दिन’ देखने का हक नहीं? — रचना सिंह गौतम

कानपुर नगर 20 अप्रैल 26*क्या तिरपाल के नीचे सिसकती इन मासूम जिंदगियों को ‘अच्छे दिन’ देखने का हक नहीं? — रचना सिंह गौतम

कानपुर नगर *आज बिल्हौर विधानसभा की पूर्व विधायक प्रत्यासी रचना सिंह गौतम ने ब्लॉक शिवराजपुर के ग्राम मक्का पुरवा में एक ऐसी हकीकत देखी, जिसे देखकर रूह कांप जाए। इस भीषण धूप और बारिश के डर के बीच, एक बेसहारा माँ अनीता गिहार अपने मासूम बच्चों को लेकर पन्नी के नीचे रहने को मजबूर है।

पति राकेश गिहार के स्वर्गवास के बाद, इस परिवार के पास न तो सर छुपाने को छत बची है और न ही भविष्य की कोई उम्मीद। एक विधवा माँ की आँखों के आंसू और बच्चों का मुरझाया चेहरा उन तमाम वादों पर तमाचा है, जो बड़े-बड़े मंचों से किए जाते हैं।

सवाल बहुत चुभने वाले हैं, लेकिन पूछना ज़रूरी है:

● प्रधानमंत्री जी, 2022 तक ‘हर सिर पर छत’ का आपका वादा मक्का पुरवा की इस गली तक पहुँचते-पूँछते दम क्यों तोड़ गया?

● क्या अनीता गिहार और उनके बच्चों का इस देश के संसाधनों पर हक नहीं? क्या वे सिर्फ़ चुनाव के समय गिनती का एक ‘वोट’ हैं?

● भाजपा के स्थानीय विधायक और सांसद जी, आपकी आँखों पर सत्ता की कैसी पट्टी बंधी है कि आपको अपने ही क्षेत्र की एक बेसहारा विधवा का दर्द नहीं दिखता? क्या ‘महिला सम्मान’ के नारे सिर्फ़ विज्ञापनों के लिए हैं?

● विधायक जी, आपके पास तो बजट की कोई कमी नहीं है, फिर इस परिवार को सरकारी योजना का लाभ क्यों नहीं मिला? क्या इनका गुनाह सिर्फ़ इतना है कि ये किसी खास ‘वोट बैंक’ का हिस्सा नहीं हैं?

रचना सिंह गौतम ने कहा जब एक गरीब माँ अपने बच्चों के लिए आटा, दाल या बिस्किट खरीदती है, तो आपकी सरकार उस पर भी टैक्स वसूलती है। जब वो बेसहारा माँ सरकार को अपना खून-पसीना टैक्स के रूप में दे रही है, तो बदले में उसे तिरपाल के नीचे रहने के लिए क्यों छोड़ दिया गया?

पूर्व प्रत्यासी रचना सिंह गौतम अनीता गिहार जैसी हज़ारों महिलाएं आज आपकी सरकार की झूठी घोषणाओं की बलि चढ़ रही हैं। अगर आपमें थोड़ी भी संवेदनशीलता बची है, तो इस परिवार की मदद के लिए तत्काल कदम उठाइए। मक्का पुरवा का यह परिवार ‘मदद’ की भीख नहीं, बल्कि अपना वो ‘हक’ मांग रहा है जिसके नाम पर आपने सरकार बनाई है।

याद रखिये, बेसहारा की हाय और मासूमों की सिसकियां सत्ता के बड़े-बड़े किलों को हिलाने की ताकत रखती हैं।