August 15, 2026

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सुल्तानपुर15अगस्त26*पीड़ित की आवाज उठाना गुनाह है तो यह गुनाह जारी रहेगा- एडवोकेट शैलेंद्र प्रताप यादव सोनू*

सुल्तानपुर15अगस्त26*पीड़ित की आवाज उठाना गुनाह है तो यह गुनाह जारी रहेगा- एडवोकेट शैलेंद्र प्रताप यादव सोनू*

सुल्तानपुर15अगस्त26*पीड़ित की आवाज उठाना गुनाह है तो यह गुनाह जारी रहेगा- एडवोकेट शैलेंद्र प्रताप यादव सोनू*

सुल्तानपुर*रानीगंज में ट्रक चालक से कथित वसूली विवाद के बाद सड़क जाम, मौके पर पहुंचे सपा नेता सैलेंद्र यादव सोनू पर पुलिस की कार्रवाई; बोले—“न गुंडा हूं, न अपराधी, पीड़ितों की आवाज बनना मेरा कर्तव्य”*

सुलतानपुर। रानीगंज गोराबारिक कस्बे में ट्रक चालक और परिवहन विभाग के कथित विवाद ने अब सियासी रंग ले लिया है। शुक्रवार सुबह झारखंड से सेब लादकर आ रहा ट्रक रानीगंज कस्बे में पहुंचा तो चालक और परिवहन विभाग के अधिकारी के बीच कथित अवैध वसूली को लेकर कहासुनी होने की बात सामने आई। विवाद बढ़ा तो चालक ने ट्रक सड़क के बीच खड़ा कर विरोध जताना शुरू कर दिया। देखते ही देखते दोनों तरफ वाहनों की कतार लग गई और जाम की स्थिति पैदा हो गई।
मामला यहीं नहीं रुका। दूसरे ट्रक चालक भी कथित पीड़ित चालक के समर्थन में उतर आए। स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई। इसी दौरान समाजवादी पार्टी यूवजन सभा के प्रदेश सचिव शैलेंद्र यादव सोनू भी मौके पर पहुंचे। उनका कहना है कि उन्होंने किसी को कानून हाथ में लेने के लिए नहीं उकसाया, बल्कि कथित रूप से परेशान ट्रक चालक की बात प्रशासन तक पहुंचाने और उसे न्याय दिलाने की कोशिश की।

*“पीड़ित की आवाज बनना ही मेरा अपराध है तो यह अपराध करता रहूंगा”*

पुलिस की कार्रवाई पर शैलेंद्र यादव सोनू ने सरकार और पुलिस व्यवस्था पर तीखा हमला बोला। उनका कहना है कि किसी पीड़ित की मदद करना अपराध नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि वे जाति और धर्म देखकर पीड़ित की मदद नहीं करते। जो व्यक्ति उनके सामने अपनी समस्या लेकर आएगा, उसकी आवाज शासन-प्रशासन तक पहुंचाना उनका सामाजिक और राजनीतिक दायित्व है।
सपा नेता के मुताबिक, “मैं न गुंडा हूं और न अपराधी। मैं पीड़ितों की आवाज बनकर उनकी बात शासन और प्रशासन तक पहुंचाता हूं। यही मेरा कर्तव्य है और अगर यही मेरा अपराध है तो यह अपराध मैं निरंतर करता रहूंगा।”

*पुलिस की कहानी बनाम सपा नेता का दावा—सच क्या है?*

इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यही है कि रानीगंज में वास्तव में हुआ क्या था?

क्या ट्रक चालक से कथित अवैध वसूली की कोशिश हुई थी?

क्या विवाद बढ़ने के बाद सड़क जाम करने की स्थिति बनी?

क्या मौके पर पहुंचे सपा नेता ने भीड़ को उकसाया या फिर केवल चालक की समस्या उठाई?

और अगर उन्होंने भीड़ को उकसाया, तो पुलिस के पास इसके क्या ठोस साक्ष्य हैं?

इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा। लेकिन फिलहाल इस कार्रवाई ने एक बड़ा राजनीतिक सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—क्या किसी कथित पीड़ित के पक्ष में खड़ा होना अब पुलिस की नजर में कानून-व्यवस्था के लिए खतरा माना जाएगा?
सड़क पर जाम क्यों लगा—जिम्मेदारी किसकी?
इस प्रकरण का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू सड़क जाम का है। यदि ट्रक चालक ने विरोध में सड़क पर वाहन खड़ा किया और इससे यातायात बाधित हुआ, तो प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि विवाद की मूल वजह क्या थी और स्थिति वहां तक पहुंची कैसे।
कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन साथ ही परिवहन विभाग की कथित वसूली संबंधी शिकायतों की निष्पक्ष जांच भी जरूरी है। केवल सड़क पर हंगामा होने की तस्वीर देखकर पूरी कहानी तय कर देना भी सवालों के घेरे में आ सकता है।

*सियासत गरम, जांच पर निगाह*

शैलेंद्र यादव सोनू ने भाजपा सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा कि पीड़ितों की आवाज उठाने वालों पर मुकदमे लिखे जा रहे हैं और समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर ऐसे कथित अत्याचारों को समाप्त किया जाएगा।
हालांकि राजनीतिक आरोप अपनी जगह हैं, लेकिन पत्रकारिता का मूल सवाल इससे आगे है—क्या ट्रक चालक की शिकायत की निष्पक्ष जांच होगी? क्या कथित अवैध वसूली के आरोपों की भी जांच होगी? और क्या सपा नेता पर लगाए गए आरोपों को भी साक्ष्यों के आधार पर परखा जाएगा?
रानीगंज का यह विवाद अब केवल एक ट्रक चालक और पुलिस के बीच का मामला नहीं रह गया है। यह मामला परिवहन विभाग की कथित वसूली, पुलिस कार्रवाई, जनप्रतिनिधि/राजनीतिक कार्यकर्ता की भूमिका और आम आदमी की आवाज उठाने के अधिकार—चारों सवालों को एक साथ सामने ला रहा है।
अब निगाहें प्रशासन पर हैं कि वह इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दूध का दूध और पानी का पानी करता है या फिर मामला आरोप-प्रत्यारोप और मुकदमेबाजी के बीच दबकर रह जाता है।

*नोट: अवैध वसूली और भीड़ को उकसाने जैसे आरोप संबंधित पक्षों के दावे हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही मानी जानी चाहिए।*

Taza Khabar