July 14, 2026

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सुल्तानपुर14जुलाई26*डीएम इंद्रजीत सिंह के निर्देश पर शारदा सहायक नहर के कुलाबों का होगा कायाकल्प

सुल्तानपुर14जुलाई26*डीएम इंद्रजीत सिंह के निर्देश पर शारदा सहायक नहर के कुलाबों का होगा कायाकल्प

सुल्तानपुर14जुलाई26*डीएम इंद्रजीत सिंह के निर्देश पर शारदा सहायक नहर के कुलाबों का होगा कायाकल्प, 100 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि होगी सिंचित*

सुल्तानपुर। जनपद के किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह के निर्देश पर शारदा सहायक खंड-16 की बायीं नहर पर ग्राम सुकरेशिया से वेदहा जाने वाले मार्ग के किनारे स्थित सभी कुलाबों का कायाकल्प कराया जाएगा। इस कार्य के पूरा होने के बाद लगभग 100 हेक्टेयर अतिरिक्त कृषि भूमि सिंचाई के दायरे में आ जाएगी, जिससे क्षेत्र के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।

लंबे समय से क्षेत्र के किसान नहर का पानी खेतों तक पर्याप्त मात्रा में न पहुंचने की समस्या से जूझ रहे थे। कुलाबों के जीर्णोद्धार के बाद नहर का पानी आसानी से खेतों तक पहुंचेगा, जिससे सिंचाई व्यवस्था मजबूत होगी, खेती की लागत कम होगी और कृषि उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है।

जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कार्य पूरी गुणवत्ता, पारदर्शिता और निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसानों से जुड़े विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा सभी निर्माण कार्य शासन के मानकों के अनुरूप कराए जाएं।

इस योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी शारदा सहायक खंड-16 के अधिशासी अभियंता शरद कुमार तथा सहायक अभियंता मंगल यादव को सौंपी गई है। दोनों अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि कुलाबों के कायाकल्प का कार्य तेजी से पूरा कर किसानों को समय पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

स्थानीय किसानों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि इससे वर्षों पुरानी सिंचाई समस्या का समाधान होगा और उन्हें निजी संसाधनों पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। समय पर पानी मिलने से फसलों की पैदावार में भी वृद्धि होगी।

जिलाधिकारी ने किसान भाइयों से जल संरक्षण की अपील करते हुए कहा कि सिंचाई पूरी होने के बाद नहर का पानी ओवरफ्लो होने से पहले ही बंद कर दें। उन्होंने कहा कि “जल है तो कल है” की भावना के साथ प्रत्येक किसान पानी का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करे, ताकि अधिक से अधिक किसानों को सिंचाई का लाभ मिल सके और जल संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित हो।