सहारनपुर7जुलाई26*सेवा परमो धर्म सेवा से बढ़कर कुछ नहीं मानवता की मिसाल: सहारनपुर में एंटी रोमियो स्क्वॉड पर तैनात पुलिसकर्मी जितेंद्र चौहान ने रक्तदान कर बचाई मुस्लिम लड़की की जान*
सहारनपुर। इंसानियत का कोई धर्म, जाति या मजहब नहीं होता। इस बात को एक बार फिर सहारनपुर के सदर बाजार थाने में एंटी रोमियो स्क्वॉड पर तैनात पुलिसकर्मी जितेंद्र चौहान ने अपने सराहनीय कार्य से साबित कर दिखाया। उन्होंने समय पर रक्तदान कर एक मुस्लिम लड़की की जान बचाई और मानवता, भाईचारे तथा सामाजिक सौहार्द की अनूठी मिसाल पेश की।
जानकारी के अनुसार, एक मुस्लिम लड़की की अचानक तबीयत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। उपचार के दौरान डॉक्टरों ने तत्काल रक्त की आवश्यकता बताई। परिजन और पत्रकार अंकित सिंह द्वारा काफी प्रयास के बावजूद समय पर रक्त की व्यवस्था नहीं कर सके। इसी बीच पत्रकार अंकित द्वारा मीडिया ग्रुप में सूचना डाली गई जिसकी सूचना जितेंद्र चौहान को मिलने पर सदर बाजार थाने में एंटी रोमियो स्क्वॉड पर तैनात पुलिसकर्मी जितेंद्र चौहान ड्यूटी पर होने के बावजूद भी बिना कुछ सोचे समझे बिना किसी धर्म, जाति या मजहब का भेद किए अस्पताल पहुंचे और रक्तदान कर युवती की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जितेंद्र चौहान के इस मानवीय कदम की अस्पताल में मौजूद लोगों, चिकित्सकों और लड़कियों के परिजनों ने खुलकर सराहना की। परिजनों ने भावुक होकर कहा कि उस कठिन समय में उनके लिए सबसे बड़ा धर्म इंसानियत थी और पुलिसकर्मी ने उसी का परिचय दिया। समय पर रक्त मिलने से लड़की का उपचार संभव हो सका।
यह घटना समाज को एक सकारात्मक संदेश देती है कि जब किसी की जिंदगी बचाने की बात हो, तब धर्म, जाति और मजहब की दीवारें कोई मायने नहीं रखतीं। ऐसे कार्य सामाजिक एकता, भाईचारे और आपसी विश्वास को मजबूत करते हैं।
स्थानीय लोगों ने भी जितेंद्र चौहान की प्रशंसा करते हुए कहा कि पुलिस केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने का ही नहीं, बल्कि मानव सेवा का भी महत्वपूर्ण दायित्व निभाती है। उनके इस कार्य ने पुलिस के संवेदनशील और जनसेवा के स्वरूप को और अधिक मजबूत किया है।
रक्तदान को महादान कहा जाता है क्योंकि इससे किसी जरूरतमंद को नया जीवन मिलता है। जितेंद्र चौहान ने अपने इस प्रेरणादायक कार्य से यह संदेश दिया है कि “इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है।” उनका यह कदम समाज के लिए प्रेरणा है और यह बताता है कि मानवता से बढ़कर कोई पहचान नहीं होती।

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