[29/05, 09:10] Indra Kumar Singh Barabanki: 🆕️ उत्तराखंड ब्रेकिंग…
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन उत्तराखंड की राजधानी देहरादून पहुंचे हैं…..
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तेल बचत की अपील और प्रोटोकॉल का ध्यान रखते हुए काफिले में सिर्फ 35 गाड़ियां रखी गई हैं…
जी हां सिर्फ और सिर्फ 35 गाड़ियों के काफिले से देहरादून पहुंचे नितिन नबीन..
[29/05, 10:35] +91 93690 03069: *हाईकोर्ट*
– वैधानिक प्रक्रिया पूरी होने पर प्रशासन किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन नहीं रोक सकता
*मुस्लिम शिक्षक के हिंदू बनने का रास्ता साफ*
– समस्त परिणामी वैधानिक कार्यवाहियां चार सप्ताह के भीतर पूर्ण करने का दिया निर्देश
*प्रयागराज, विधि संवाददाता।*
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में कहा है कि
यदि अधिनियम की धारा 8 एवं 9 के अंतर्गत निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया का पालन कर लिया गया हो,
तो प्रशासनिक अधिकारी अनिश्चितकालीन जांच, संदेह या व्यक्तिगत संतुष्टि के आधार पर किसी व्यक्ति के धर्म परिवर्तन अथवा धार्मिक पहचान को बाधित नहीं कर सकते।
*न्यायमूर्ति अजीत कुमार एवं न्यायमूर्ति इन्द्रजीत शुक्ला* की खंडपीठ ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया, जो वर्ष 2022 से लंबित थी।
याचिका *डॉ. मोहम्मद एहसान उर्फ अनिल पंडित* की ओर से दाखिल की गई थी,
जो प्रयागराज स्थित *सीएमपी डिग्री कॉलेज में अंग्रेजी विषय के असिस्टेंट प्रोफेसर* हैं।
उन्होंने सनातन धर्म अपनाने की वैधानिक प्रक्रिया पूर्ण कर ली थी, बावजूद इसके प्रशासनिक स्तर पर उनके धर्म परिवर्तन को मान्यता नहीं दी जा रही थी।
याची की *पत्नी बलिया के राजकीय इंटर कॉलेज में अंग्रेजी विषय की प्रवक्ता* हैं।
प्रशासनिक अस्वीकार्यता के चलते दंपती को विवाह पंजीकरण, पहचान
पत्र, शासकीय अभिलेखों और अन्य वैधानिक अधिकारों से संबंधित गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था।
इससे उनकी वैवाहिक पहचान एवं भविष्य के पारिवारिक अधिकारों पर भी अनिश्चितता की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।
मामले में याची की ओर से अधिवक्ता *आशीष कुमार श्रीवास्तव* ने दलील दी कि प्रशासनिक अधिकार संविधान प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता से ऊपर नहीं हो सकते
तथा वैधानिक प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद प्रशासनिक अड़चनें विधिसम्मत नहीं मानी जा सकतीं।
कोर्ट ने अपने 05 मई 2026 के आदेश में कहा था कि अधिनियम की धारा 8(1) के अंतर्गत आवश्यक घोषणा पूर्व में ही प्रस्तुत की जा चुकी थी तथा प्रथम दृष्टया वैधानिक प्रक्रिया का अनुपालन किया गया था।
न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), प्रयागराज ने 14 मई 2026 को अंतिम आदेश पारित करते हुए याची के धर्म परिवर्तन आवेदन को स्वीकार कर लिया।
इसके बाद 27 मई 2026 को पारित अंतिम आदेश में कोर्ट ने अधिनियम की धारा 9 (6) के अंतर्गत समस्त परिणामी वैधानिक कार्यवाहियां चार सप्ताह के भीतर पूर्ण करने का निर्देश दिया।
[29/05, 10:35] +91 93690 03069: *विश्वविद्यालय*
– पीजी में छात्र-छात्राओं को मिले इंटरनल एग्जाम में 26 नंबर से अधिक,
– करीब 1500 छात्र ग्रेस मार्क मिलने के बाद किसी तरह हुए पास
*18 हजार छात्रों को इंटरनल एग्जाम में 24 नंबर मिले फिर भी फेल*
– 188 बीएससी कॉलेजों में पास हो सके 10.43 फीसदी,
– शिक्षाविद् बोले, इंटरनल एग्जाम में बेहतर नंबर देने का माइंडसेट हटाना होगा
*मुरादाबाद, वरिष्ठ संवाददाता।*
गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय के सेमेस्टर परिणामों का रिजल्ट किसी से छिपा नहीं है। इन परिणामों ने शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
सख्ती और कड़ी मॉनिटरिंग के कारण मंडलभर के कॉलेजों में बीएससी व बीए में बड़ी संख्या में छात्र फेल हो गए।
अगर बीएससी व बीए की बात करें तो छात्रों को इंटरनल एग्जाम में 24 नंबर तक दिए गए।
इसके अलावा पीजी कोर्सों में 26 और उससे ऊपर भी नंबर दिए गए, फिर भी हजारों छात्र पास नहीं हो सके।
बीएससी में 89 प्रतिशत और बीए में 76 प्रतिशत छात्र अनुत्तीर्ण हुए हैं। इसके अलावा पीजी का रिजल्ट भी खराब ही रहा।
188 बीएससी व 304 बीए के कॉलेजों सहित पीजी के कोर्सों में 18 हजार छात्रों को इंटरनल एग्जाम में 24 नंबर तक मिले हैं।
ग्रेजुएशन में थ्योरी में 75 व इंटनरल एग्जाम के 25 नंबर दिए जाते हैं।
इसी तरह पीजी में इंटनरल एग्जाम के लिए 30 नंबर होते हैं।
ग्रेजुएशन के स्तर पर छात्रों को 24 नंबर तक दिए गए, वहीं पीजी में छात्रों को 30 में से अधिकांश को 26 और उससे अधिक नंबर दिए गए हैं।
मंडलभर की बात करें तो बीएससी में बिजनौर के 76, मुरादाबाद के 41, अमरोहा व संभल के 26-26 व रामपुर के 16 कॉलेजों की परफारमेंस काफी खराब रही है।
*बीएससी में 12001 छात्र में 542 ही हुए पास*
परीक्षा परिणाम की बात करें तो बीएससी की स्थिति सबसे खराब रही।
मंडलभर में बीएससी में 12001 छात्रों में से मात्र 542 ही पास हो सके।
इसी तरह 13670 छात्राओं में से सिर्फ 2135 पास हो सकीं। इनमें भी बड़ी संख्या में छात्रों को ग्रेस मार्क दिया गया है।
*इंटरनल एग्जाम के नंबरों से विद्यार्थियों को मिली राहत*
मुरादाबाद : बीएससी व बीए में छात्रों को मिले नंबरों में थ्योरी का योगदान बहुत ही कम रहा है।
दूसरी ओर बच्चों को इंटरनल एग्जाम में दिल खोलकर नंबर दिए गए।
सवाल यह भी उठ रहे हैं कि थ्योरी में निराशाजनक प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने इंटरनल एग्जाम में बेहतर कैसे किया।
“इन्टर्नल एग्जाम में मूल्यांकन स्थानीय होता है। स्थानीय आधार पर पक्षपात होने की संभावना अधिक रहती है।
इंटर्नल एग्जामिनर उसी केंद्र का होता है और बाहर से आए एक्सपर्ट कई बार प्रभावित हो जाते हैं।
आपसी संबंधों के आधार पर भी लोग नंबर दे देते हैं।इसमें बदलाव की जरूरत है।”
– *प्रो. विशेष गुप्ता,*
पूर्व प्राचार्य एमएच कॉलेज
[29/05, 10:35] +91 93690 03069: *सीएमपी के मुस्लिम शिक्षक ने पत्नी के लिए बदला धर्म*
– डॉ. मो. एहसान 2018 में बने थे असि. प्रोफेसर
* अंग्रेजी के शिक्षक ने मुस्लिम धर्म छोड़ा अपनाया सनातन
*प्रयागराज, कार्यालय संवाददाता।*
सीएमपी डिग्री कॉलेज के अंग्रेजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद एहसान ने अपने निजी जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिया, जो शहर में चर्चा का विषय बना है।
उन्होंने मुस्लिम धर्म छोड़कर सनातन धर्म स्वीकार कर लिया और अपना नया नाम अनिल पंडित रख लिया।
बताया जा रहा है कि यह निर्णय उन्होंने अपनी पत्नी के साथ वैवाहिक जीवन एवं भविष्य के पारिवारिक अधिकारों को कानूनी रूप से सुरक्षित करने के उद्देश्य से लिया। क्योंकि पत्नी हिन्दू धर्म की है।
कॉलेज से जुड़े लोगों के अनुसार, डॉ. एहसान न केवल अंग्रेजी विषय के विद्वान हैं,बल्कि उन्हें संस्कृत भाषा का भी अच्छा ज्ञान है।
उनके करीबी बताते हैं कि सनातन परंपराओं के प्रति उनकी रुचि लंबे समय से रही है।
वर्ष 2018 में सीएमपी डिग्री कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नियुक्त हुए। डॉ. एहसान अपने शैक्षणिक कार्यों के लिए कॉलेज में पहचान रखते हैं।
उनकी पत्नी बलिया के एक राजकीय इंटर कॉलेज में अंग्रेजी विषय की प्रवक्ता हैं।
[29/05, 10:35] +91 93690 03069: *पूर्णिया विवि*
*परीक्षा परिणाम में गड़बड़ी की उच्चस्तरीय जांच हो*
– छात्रों के मानसिक व शैक्षणिक शोषण की ओर कराया ध्यान आकृष्ट
– राज्यपाल को आवेदन देकर परीक्षा विभाग की खामियां की उजागर
*पूर्णिया, बिहार।*
पूर्णिया विश्वविद्यालय में परीक्षा परिणाम में हुई गड़बड़ियों की उच्चस्तरीय जांच की मांग को लेकर राज्यपाल को आवेदन भेजा गया है।
विश्वविद्यालय बनाओं संघर्ष समिति ने आवेदन भेज छात्रों के मानसिक व शैक्षणिक शोषण की ओर राज्यपाल सह कुलाधिपति का ध्यान आकृष्ट कराया है।
साथ ही इस मामले में विशेष सतर्कता इकाई से जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई कराने की मांग मुखर की है।
विश्वविद्यालय बनाओं संघर्ष समिति के संस्थापक *डॉ. आलोक राज* ने पूर्णिया विश्वविद्यालय में डिग्री एवं प्रमाण पत्र सत्यापन को लेकर हुए अनियमितता को लेकर कुलाधिपति सह राज्यपाल को आवेदन भेजकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण छात्रों के प्रमाण पत्र जब विभिन्न विभागों द्वारा सत्यापन हेतु विश्वविद्यालय भेजे जा रहे हैं,
तब विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कई प्रमाण पत्रों को यह कहकर संदिग्ध अथवा अवैध बताया जा रहा है कि टीआर में अंक परिवर्तन वाले स्थान पर टेबुलेटर के हस्ताक्षर नहीं हैं।
डॉ. आलोक राज ने कहा है कि जिन छात्रों को विश्वविद्यालय द्वारा अंकपत्र एवं प्रमाण पत्र निर्गत किए गए हैं, उन पर विश्वविद्यालय के सक्षम पदाधिकारियों के हस्ताक्षर मौजूद हैं।
इन्हीं प्रमाण पत्रों के आधार पर अनेक छात्र नौकरी कर रहे हैं तथा उच्च शिक्षा भी प्राप्त कर चुके हैं।
ऐसे में वर्षों बाद छात्रों के परीक्षा परिणाम को अवैध बताना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
डॉ. आलोक राज ने आरोप लगाया कि यदि टीआर में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है, तो इसकी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन एवं परीक्षा विभाग की बनती है।
छात्रों द्वारा स्वयं टीआर में अंक परिवर्तन किया जाना संभव नहीं है।
साथ ही, जिन मामलों में अंक संशोधन हुए, उनसे संबंधित संशोधन पत्र भी विश्वविद्यालय द्वारा महाविद्यालयों को जारी किए गए थे।
आवेदन में यह भी कहा गया है कि केवल टेबुलेटर के हस्ताक्षर नहीं होने के आधार पर छात्रों की डिग्री को फर्जी या अवैध घोषित करना न तो न्यायोचित है और न ही विधिसम्मत।
इससे छात्रों का मानसिक शोषण हो रहा।
[29/05, 10:35] +91 93690 03069: *पड़ताल*
– सरकारी विभागों में नौकरी लगने के बाद प्रमाण पत्रों के वेरिफिकेशन के दौरान विवि प्रशासन ने फर्जी बताया
*विवि अपने ही अंकपत्र को बता रहा फर्जी*
– बिना टेबलेटर के हस्ताक्षर के रिटोटलिंग में बढ़ा दिये गये परीक्षार्थियों के अंक
– अंकपत्रों का मूल प्रमाण पत्र देने में विवि का परीक्षा विभाग कर रहा आनाकानी
*पूर्णिया, बिहार*
बिना टेबलेटर के हस्ताक्षर के रिटोटलिंग में परीक्षार्थियों के अंक बढ़ाये जाने के कारण पूर्णिया विश्वविद्यालय अपने ही परीक्षा विभाग के द्वारा जारी किये गये अंकपत्र को फर्जी व संदिग्ध बता रहा है।
सरकारी विभागों में नौकरी लगने के बाद प्रमाण पत्रों के वेरिफिकेशन में सैंकडों ऐसे छात्र-छात्राओं के अंकपत्र को पूर्णिया विश्वविद्यालय द्वारा फर्जी व संदिग्ध करार दिया जा चुका है।
ऐसे में पूर्णिया विश्वविद्यालय में टीआर में फेल और अंकपत्र में उत्तीर्ण रहने वाले छात्र-छात्राएं परेशान हैं।
वहीं फर्जी व संदिग्ध करार दिये गये अंकपत्रों का मूल प्रमाण पत्र देने से विश्वविद्यालय का परीक्षा विभाग यह कहकर छात्र-छात्राओं को देने से मना कर चुका है कि
पूर्व परीक्षा नियंत्रक के खिलाफ चल रही जांच का रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन को मिलने के बाद ही इस मामले में कोई निर्णय लिया जायेगा।
नतीजन ऐसे छात्र-छात्राएं जहां निराश व हताश हैं, वहीं इस मामले में जांच कर रही कमेटी के द्वारा लंबे समय बाद भी अब तक जांच रिपोर्ट नहीं सौंपे जाने से कई सवाल उठ रहे है।
हालांकि गड़बड़ी की शिकायत मिलने के बाद शुरू हुई जांच के दरम्यान प्रथम दृष्टा में गड़बड़ी की शिकायत सत्य पाये जाने पर पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलपति *प्रो विवेकानंद सिंह* ने पूर्व परीक्षा नियंत्रक *डॉ. एके पांडेय* को निलंबित कर दिया है।
पर अब तक जांच रिपोर्ट कमेटी के द्वारा नहीं सौंपे जाने से पूर्णिया विश्वविद्यालय भी किंकर्तव्यविमूढ़ बना हुआ है।
पूर्णिया विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक *प्रो अमरकांत सिंह* ने बताया कि टीआर में करीब छह हजार से अधिक छात्र छात्राएं फेल हैं, जबकि अंकपत्र में उन्हें उत्तीर्ण कर दिया गया है।
टीआर में अंकों की हुई बढ़ोत्तरी में किसी भी टेबलेटर का हस्ताक्षर नहीं है, जिसके कारण ऐसे भी अंकपत्रों को विश्वविद्यालय के द्वारा संदिग्ध और फर्जी करार दिया जा रहा है।
इस मामले में पूर्णिया विश्वविद्यालय
के द्वारा गठित कमेटी जांच कर रही है।
जांच के दरम्यान पूर्व परीक्षा नियंत्रक डॉ. एके पांडेय निलंबित किये गये हैं। अभी तक जांच रिपोर्ट कमेटी के द्वारा नहीं सौंपी गई है।
जांच रिपोर्ट मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन कार्रवाई करेगी।
फिलहाल टीआर में फेल और अंकपत्र में उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं को मूलप्रमाण पत्र भी नहीं दिया जा रहा है।
टीआर में फेल व अंकपत्र में उत्तीर्ण होने का मामले को लेकर पूर्णिया विश्वविद्यालय के अधीनस्थ कई कॉलेजों के छात्र-छात्राएं परेशान है।
वहीं *मारवाड़ी कॉलेज किशनगंज* के कला संकाय के पार्ट थ्री 2022 के सारणीयन पंजी में बड़े पैमाने पर परीक्षा परिणाम में संशोधन किया गया है।
कई डिग्री महाविद्यालयों में परीक्षा परिणाम संशोधित के नाम पर गड़बड़ियां हुई हैं लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन उदासीन बना हुआ हैं।
जबकि रिटोटलिंग और बिना रिटोटलिंग के नाम पर हुए परीक्षा परिणाम सुधार में गड़बड़ियां की गई है।
पूर्णिया विश्वविद्यालय के अंतर्गत मारवाड़ी कॉलेज किशनगंज में पार्ट श्री 2022 के अंग्रेजी ऑनर्स के सारणीयन पंजी में एक छात्र को फिफ्थ पेपर में तीन अंक प्राप्त था लेकिन उन्हें 33 अंक दिया गया।
वहीं दूसरे छात्र को फिफ्थ पेपर में टीआर में 53 अंक प्राप्त था और 53 अंक बदले 65 अंक दे दिया गया।
तीसरे छात्र को फिफ्थ पेपर में 17 अंक प्राप्त था, लेकिन 17 अंक के बदले 37 अंक दिया गया।
चौथे छात्र को फिफ्थ पेपर में 05 अंक प्राप्त था। 05 अंक के बदले 45 अंक दिया है।
पांचवें छात्र को 05 अंक के बदले 45 अंक दिया गया। छठे छात्र को भी टीआर में 17 अंक प्राप्त था, जबकि 17 अंक के बदले 45 अंक दिया गया।
वहीं सातवें छात्र को भी फिफ्थ पेपर में 25 अंक के बदले 58 अंक दिया गया।
वहीं छठे पेपर अंग्रेजी ऑनर्स के विषय में एक छात्र को टीआर में 25 अंकप्राप्त था, जबकि 25 अंक के बदले 45 अंक दिया गया।
दूसरे छात्र को 24 अंक के बदले 34 अंक दिया गया। तीसरे छात्र को 45 अंक के बदले 51 अंक दिया गया। चौथे छात्र को 28 अंक के बदले 38 अंक दिया गया।
पांचवें छात्र को 20 अंक के बदले 49 अंक दिया गया। छठे छात्र को 45 अंक के बदले 60 अंक दिया गया। सातवें छात्र को 28 अंक के बदले 55 अंक दिया गया।
अंग्रेजी ऑनर्स पॉनर्स के सातवें पेपर में एक छात्र को 8 अंक के बदले 38 अंक दिया गया।
दूसरे छात्र को 11 अंक के बदले 34 अंक दिया गया। तीसरे छात्र को 09 अंक के बदले 39 अंक दिया गया।
चौथे छात्र को तीन अंक के बदले 53 अंक दिया गया। पांचवें छात्र को 8 अंक के बदले 48 अंक दिया गया।
छठे छात्र को 32 अंक के बदले 55 अंक दिया गया। सातवें छात्र को 6 अंक के बदले 61 अंक दिया गया और कई विषयों में गड़बड़ियां की गयी है।
*कुलपति से जांच करवाने की मांग*
छात्र नेता *सौरभ कुमार* ने बुधवार को पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलपति को आवेदन देकर मामले की जांच करवाने की मांग की है।
उन्होंने आवेदन में उल्लेख किया है कि वर्ष 2021 के जनवरी से लेकर 30 मार्च 2025 तक परीक्षा विभाग में हुए कार्यों की समीक्षा करवाने को लेकर जांच समिति बनवाकर जांच करवायी जाये
क्योंकि निलंबित *डॉ अजय कुमार पांडे* के कार्यकाल का मई महीना 2026 में डिग्री फर्जी बांटने का भंडाफोड़ खुद ही विश्वविद्यालय के द्वारा किया गया है।
वर्ष 2021 के जनवरी से लेकर 30 मार्च 2025 तक में परीक्षा विभाग में
रिटोटलिंग के लिए कितने आवेदन
और डिमांड ड्राफ्ट विभिन्न महाविद्यालय से कितने आये, इसकी जांच होनी चाहिए।
रिटोटलिंग में कितने छात्र छात्राओं के परीक्षा परिणाम में सुधार हुआ है, उसकी जांच पड़ताल करवायी जाये।
वर्ष 2021 के जनवरी से लेकर 30 मार्च 2025 तक परीक्षा परिणाम में संशोधित किए गये परीक्षा परिणाम सभी महाविद्यालय से मंगवाया जाये
और पूर्णिया विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग में सारणीयन पंजी से मिलान करवाया जाये।
यूजी, पीजी व वोकेशनल का रिटोटलिंग के नाम पर परीक्षा परिणाम में संशोधित हुआ था।
[29/05, 10:35] +91 93690 03069: https://www.facebook.com/share/p/18J8tsX6gg/
यूजीसी के दिशा-निर्देश राज्य विश्वविद्यालयों पर बाध्यकारी हैं
देश के सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई फैसलों में स्पष्ट किया है कि यूजीसी के दिशा-निर्देश राज्य विश्वविद्यालयों पर बाध्यकारी हैं।
अतःकोई राज्य विश्वविद्यालय यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही शोध अध्यादेश बना सकता है या उसमें संशोधन कर सकता है।
यूजीसी के दिशा-निर्देशों में शोध-निर्देशक या सह शोध निर्देशक बनाए जाने के लिए स्पष्ट प्रावधान हैं।
यदि उन प्रावधानों के विरुद्ध किसी विश्वविद्यालय के शोध अध्यादेश में प्रावधान या संशोधन किया जाता है
या विश्वविद्यालय की कोई समिति ऐसा कोई सुझाव देती है,तो वह यूजीसी के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।
– *प्रो.कमलेश गुप्त*
हिन्दी विभाग
दी. द. उ . गोरखपुर विश्वविद्यालय,गोरखपुर
[29/05, 10:35] +91 93690 03069: *डीडीयू*
*सेल्फ फाइनेंस शिक्षकों के लिए खुला शोध निर्देशन का रास्ता*
– रिसर्च को बढ़ावा देने की तैयारी को लेकर गोरखपुर विश्वविद्यालय की पहल
– शोध अध्यादेश में बदलाव कर दी जाएगी नई जिम्मेदारी
– सत्र 2026-27 से नए सेल्फ फाइनेंस कोर्स शुरू करने की भी तैयारी
– एनआईआरएफ व इंटरनेशनल रैंकिंग सुधारने की कवायद
*गोरखपुर, कार्यालय संवाददाता।*
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में सेल्फ फाइनेंस कोर्स के संविदा शिक्षक अब शोध निर्देशक बन सकेंगे।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस संबंध में एक समिति गठित की थी, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर यह फैसला लिया गया है।
अब आने वाले समय में संविदा शिक्षक शोध में अहम भूमिका निभाएंगे।
विवि का मानना है कि इस निर्णय से शोध का दायरा बढ़ेगा और डीडीयू की रैंकिंग में सुधार होगा।
डीडीयू में पिछले कुछ वर्षों में सेल्फ फाइनेंस कोर्स की संख्या तेजी से बढ़ी है।
साथ ही नए सेल्फ फाइनेंस कोर्स की तैयारी भी की जा रही है, जो नए सत्र 2026-27 से शुरू होगा।
कोर्स की बात करें तो इंजीनियरिंग, फार्मेसी, विधि समेत कई विषयों में बड़ी संख्या में संविदा शिक्षक काम कर रहे हैं।
इस वर्ष के अंत तक इन शिक्षकों की संख्या 100 के पार होगी। अभी तक संविदा शिक्षकों की भूमिका शोध में सह-पर्यवेक्षक तक ही सीमित थी।
अब विश्वविद्यालय शोध अध्यादेश में संशोधन कर संविदा शिक्षकों को शोध निर्देशन की जिम्मेदारी सौंप दी है।
इसकी अनुमति भी मिल चुकी है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इससे शोध कार्यों में तेजी आएगी।
साथ ही एनआईआरएफ व अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में तेजी से सुधार होगा।
क्योंकि, संविदा शिक्षकों के शोध निर्देशन बनने से शोध के दायरें सेल्फ फाइनेंस कोर्सों में भी बढ़ सकेंगे।
“नए फैसले से सेल्फ फाइनेंस कोर्स के शिक्षक निर्देशन बन सकेंगे। साथ ही छात्र भी पीएचडी कर शोध गतिविधियों को बढ़ा सकेंगे।
इससे डीडीयू में शोध का रास्ता खुलेगा। डीडीयू में काफी संख्या में संविदा पर शिक्षक पढ़ा रहे हैं।”
– *प्रो. पूनम टंडन,*
कुलपति, डीडीयू
[29/05, 10:49] +91 93690 03069: कई बार जिला पंचायत सदस्य सहित विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर अपनी जिम्मेदारी निभा चुके पारसनाथ यादव जी का नाम गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा से संभावित विधायक प्रत्याशियों की सूची में शामिल होने पर क्षेत्र में खुशी की लहर है।
पारसनाथ यादव जी का कहना है कि उन्होंने हमेशा राजनीति को सेवा का माध्यम माना है। अपने पूरे जीवन में उन्होंने निस्वार्थ और नि:शुल्क भाव से समाज सेवा करते हुए क्षेत्र के विकास के लिए लगातार कार्य किया है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और गरीबों की मदद जैसे मुद्दों पर उन्होंने अपनी क्षमता के अनुसार हर संभव प्रयास किया।
उनका मानना है कि जनता का विश्वास और आशीर्वाद ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। क्षेत्र की जनता के सुख-दुख में सदैव साथ खड़े रहने वाले पारसनाथ यादव जी आज भी विकास और जनसेवा को अपनी प्राथमिकता बताते हैं।

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