लखनऊ 11सितंबर 26*उ0प्र0 स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस में आयोजित क्राइम सीन मैनेजमेंट के छठे प्रशिक्षण बैच का समापन समारोह*
• UPSIFS में क्राइम सीन मैनेजमेंट के छठे प्रशिक्षण बैच का समापन।
• 06 सप्ताह के प्रशिक्षण में आरक्षी से निरीक्षक स्तर के 600 से अधिक पुलिस कार्मिकों को अपराध स्थल के वैज्ञानिक प्रबंधन, फॉरेंसिक तकनीकों तथा विवेचना में वैज्ञानिक साक्ष्यों के प्रभावी उपयोग से संबंधित प्रशिक्षण दिया गया ।
• पुलिस महानिदेशक उ0प्र0 ने वैज्ञानिक एवं साक्ष्य आधारित विवेचना को प्रभावी पुलिसिंग की महत्वपूर्ण कड़ी बताया।
• पुलिस महानिदेशक द्वारा प्रशिक्षणार्थियों से Knowledge, Skill एवं Attitude को फील्ड में प्रभावी ढंग से लागू कर वैज्ञानिक एवं साक्ष्य आधारित विवेचना को और मजबूत करने का आह्वान किया गया।
• प्रदेश में प्रतिमाह लगभग 5,000 क्राइम सीन्स को वैज्ञानिक तरीके से प्रोटेक्ट कर साक्ष्य एफएसएल भेजे जा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश पुलिस के विभिन्न जनपद /कमिश्नरेट में नियुक्त पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को क्राइम सीन मैनेजमेंट के क्षेत्र में दक्ष एवं प्रशिक्षित किए जाने के उद्देश्य से उ0प्र0 स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस में दिनांक 03.08.2026 से 11.09.2026 तक 06 सप्ताह की अवधि का छठा प्रशिक्षण बैच संचालित किया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान आरक्षी से निरीक्षक स्तर के लगभग 600 से अधिक प्रतिभागियों को अपराध स्थल के वैज्ञानिक प्रबंधन, साक्ष्यों के संरक्षण एवं संकलन, घटनास्थल के निरीक्षण, फॉरेंसिक तकनीकों तथा विवेचना में वैज्ञानिक साक्ष्यों के प्रभावी उपयोग से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञो द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह में *श्री राजीव कृष्ण, पुलिस महानिदेशक, उ0प्र0* द्वारा अपने संबोधन में प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाले सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई देते हुये कहा कि वैज्ञानिक एवं साक्ष्य आधारित विवेचना उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली में गुणात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
पुलिस महानिदेशक ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश पुलिस के प्रशिक्षण एवं प्रशिक्षण अवसंरचना में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिसका सकारात्मक प्रभाव फील्ड पुलिसिंग में दिखाई दे रहा है। *माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी की दूरदृष्टि एवं मार्गदर्शन में उ0प्र0 स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस की स्थापना इसी दिशा में एक मील का पत्थर* है। राष्ट्रीय स्तर की क्षमताओं से युक्त इस संस्थान की स्थापना से उत्तर प्रदेश पुलिस की फॉरेंसिक क्षमता में अभिवृद्धि के साथ-साथ हमारे विवेचकों एवं पुलिसकर्मियों की वैज्ञानिक विवेचना संबंधी क्षमता निर्माण को भी एक सुदृढ़ आधार प्राप्त हुआ है। UPSIFS द्वारा फॉरेंसिक, लॉ एवं साइबर के समन्वय से उच्च स्तरीय प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाना एक विशिष्ट एवं सराहनीय पहल है।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों एवं पूर्व प्रशिक्षण बैचों के प्रयासों से प्रदेश में प्रतिमाह लगभग 5,000 क्राइम सीन्स को वैज्ञानिक तरीके से प्रोटेक्ट कर साक्ष्यों का संकलन, लेबलिंग, पैकेजिंग एवं एफएसएल तक प्रेषण किया जा रहा है। उन्होंने इसे वैज्ञानिक विवेचना की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं ठोस कदम बताया।
पुलिस महानिदेशक ने कहा कि फिजिकल एवं साइंटिफिक एविडेंस अपराधी और अपराध के बीच संबंध स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे गवाहों पर निर्भरता कम होने के साथ-साथ गलत विवेचना की संभावना घटती है और नागरिकों का पुलिस एवं न्याय व्यवस्था पर विश्वास मजबूत होता है। उन्होंने संस्थान के ध्येय वाक्य “Truth, Evidence, Justice” को साकार करने में साक्ष्य की केंद्रीय भूमिका पर बल दिया।
उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि नई न्याय संहिताओं में वैज्ञानिक विवेचना एवं साक्ष्य संकलन को विशेष महत्व दिया गया है। इसलिए प्रशिक्षण प्राप्त पुलिसकर्मियों की भूमिका इनके प्रभावी क्रियान्वयन में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पुलिस महानिदेशक ने प्रशिक्षणार्थियों से कहा कि Knowledge, Skill और Attitude तीनों आवश्यक हैं, लेकिन Attitude सबसे महत्वपूर्ण है। प्रत्येक क्राइम सीन पर केवल औपचारिकता पूरी करने के बजाय ऐसे वैज्ञानिक एवं भौतिक साक्ष्य एकत्र किए जाने चाहिए, जो अपराधी तक पहुँचने तथा न्यायालय में अपराध सिद्ध करने में प्रभावी हों। सीन ऑफ क्राइम की वीडियोग्राफी एवं फोटोग्राफी, साक्ष्यों की सुरक्षित बरामदगी, लेबलिंग, पैकेजिंग तथा चेन ऑफ कस्टडी का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि फील्ड यूनिट को आने वाले समय में उत्तर प्रदेश पुलिस की सम्मानित एवं अपरिहार्य इकाइयों के रूप में स्थापित करने का अवसर प्रशिक्षणार्थियों के पास है। इसके लिए निरंतर सीखने की प्रवृत्ति, समर्पण, प्रोफेशनलिज्म और परिणाम देने की भावना आवश्यक है।
पुलिस महानिदेशक ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशिक्षणार्थी अपने-अपने जनपदों में प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान एवं कौशल को मिशन मोड में लागू करेंगे तथा आने वाले 2-3 वर्षों में फील्ड यूनिट की विशिष्ट पहचान स्थापित करेंगे। इससे विवेचना अधिक वैज्ञानिक, निष्पक्ष एवं विश्वसनीय होगी और नागरिकों का पुलिस पर विश्वास और मजबूत होगा।
पुलिस महानिदेशक, उ0प्र0 ने UPSIFS के फाउंडर डायरेक्टर *डॉ. जी0के0 गोस्वामी* एवं संस्थान के समस्त फैकल्टी का प्रशिक्षण की गुणवत्ता तथा प्रशिक्षणार्थियों को आधुनिक ज्ञान, कौशल एवं तकनीकों से सुसज्जित करने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने सभी प्रशिक्षणार्थियों को उज्ज्वल भविष्य एवं सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएँ दीं एवं प्रशिक्षण में प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले पुलिसकर्मियों को सर्टिफिकेट प्रदान कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर संस्थापक निदेशक डॉ. जी0के0 गोस्वामी ने अपने सम्बोधन में कहा कि इस कोर्स को कौशल विकास के रूप में विकसित किया गया है, जिसमें केस स्टडी एवं कृत्रिम न्यायालय के अभिनव प्रयोग से प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित पुलिसकर्मी विवेचना के आधार हैं और उनकी भूमिका दोषियों को सजा दिलाने के साथ-साथ निर्दोषों को दोषमुक्त कराने में भी महत्वपूर्ण है।

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