मुम्बई11जुलाई*यह भारतीय संविधान का अपमान है, राष्ट्रपति शासन लगाओ।*
(डेमोक्रेटिक रिपई के पैंथर डॉ मकानिकर की मांग)
*मुंबई दि (संवाददाता) मा. सर्वोच्च न्यायालंय में मामला रहने के दौरान अगर सरकार को मंजूरी मिल जाती है और उसे अपना अगला कार्यकाल पूरा करने की अनुमति मिल जाती है, तो यह घटना भारतीय संविधान का अपमान है। इसलिये राष्ट्रपति शासन लागू होना चाहिए। येह बात रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. पैंथर राजन माकणीकर ने कहा.*
विद्रोही पत्रकार और पॅन्थर ऑफ सम्यक योद्धा के संस्थास्पक महासचिव डॉ. राजन माकणीकर ने येह भी कहा की, जब तक मामला जायज है, ताकि भारतीय संविधान का अपमान न हो. और जब तक सुनवाई पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता
तब तक राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो. जिससे संविधान का अवमान ना हो जाये.
डॉ. माकणीकर पिछले 10 वर्षों से भारतीय संविधान जागरूकता और साक्षरता अभियान चला रहे हैं, अब तक उन्होंने एक लाख से अधिक संविधान उद्देशिका फ्रेम वितरित किए हैं। शादियों और सामाजिक समारोहों में हजारों संविधान पुस्तिकाएं बांटी गई हैं।देश की सभी राज्य सरकारों ने अपनी पाठशालावो भारतीय संविधान सक्ती से पढाया जाये. इस मांग का निवेदन पत्र एवं संविधसन पुस्तिका लगबघ 385 विधायक व संसदो को दिया है. और कहा है की सभी पाठशालावो मे माध्यमिक शिक्षा के लिये अनिवार्य हो.

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