October 20, 2026

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पूर्णिया बिहार 20 अक्टूबर2026 *सितारों की तरह जगमगाया इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल: पूर्णिया 

पूर्णिया बिहार 20 अक्टूबर2026 *सितारों की तरह जगमगाया इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल: पूर्णिया 

पूर्णिया बिहार 20 अक्टूबर2026 *सितारों की तरह जगमगाया इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल: पूर्णिया 

सर सैयद के 208वें यौम-ए-पैदाइश पर सजी खूबसूरत महफिल, तराना-ए-अलीगढ़ से गूंजा पूर्णिया*

*मोहम्मद इरफान कामिल ब्यूरो चीफ यूपी आजतक न्यूज़ चैनल पूर्णिया डिवीजन बिहार से, पूर्णिया*

*पूर्णिया।* जब शाम का मंजर ढला और अंधेरा गहराया, तो पूर्णिया लाइन बाजार स्थित इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल का प्रांगण किसी दुल्हन की तरह सजा हुआ था। पूरा स्कूल रंग-बिरंगी रोशनियों में सितारों की तरह जगमगा रहा था। मौका था अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के बानी, महान समाज सुधारक सर सैयद अहमद खान के 208वें यौम-ए-पैदाइश का, जिसे बड़े ही हर्षोल्लास और अकीदत के साथ मनाया गया। महफिल को बहुत ही खूबसूरत अंदाज में सजाया गया था, जिसे देखकर हर कोई वाह-वाह कर उठा।

मंच का खूबसूरत संचालन इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल पूर्णिया के प्रिंसिपल ने किया, जिनकी निजामत में पूरी महफिल में चार चांद लग गए। कार्यक्रम की शुरुआत अलीगढ़ के मशहूर तराना *”ये मेरा चमन है मेरा चमन…”* से हुई और फिर *”जन गण मन…”* राष्ट्रगान के साथ पूरा माहौल देशभक्ति और अलीग जज्बे से भर गया।

*दूर-दराज से आए अलीग बिरादरी ने सर सैयद के कारनामों को किया याद*

इस ख़ास मौके पर दूर-दराज से आए हुए अलीगढ़ यूनिवर्सिटी से तालीम हासिल करने वाले तालीमयाफ्ता लोगों और अलीग बिरादरी ने शिरकत की। उन्होंने सर सैयद अहमद खान की सवानेह हयात, उनके कारनामों और उनकी जीवनी पर विस्तार से रोशनी डाली।

वक्ताओं ने कहा कि सर सैयद सिर्फ एक शख्सियत नहीं, बल्कि एक तहरीक थे। उन्होंने उर्दू ज़बान की खिदमत के लिए तहज़ीब-उल-अख़लाक़ जारी किया और साइंटिफिक सोसाइटी बनाकर अंग्रेजी किताबों का उर्दू में तर्जुमा कराया। उन्होंने कहा था कि हिंदू और मुसलमान भारत की दो आंखें हैं, इसी सोच के साथ उन्होंने 1875 में अपनी यूनिवर्सिटी के दरवाजे हर धर्म, हर जात के लोगों के लिए खोल दिए, जो आज भी हिंदू-मुस्लिम एकता की सबसे बड़ी मिसाल है।

*महिलाओं की मौजूदगी और बच्चों का इनामी मुकाबला बना आकर्षण*

पूरे प्रांगण में सैकड़ों लोगों की भीड़ थी, लेकिन सबसे ज्यादा तादाद में महिलाओं की शिरकत ने इस महफिल को और भी पाकीजा बना दिया। बच्चों के लिए तकरीरी मुकाबला और इनामी प्रोग्राम रखा गया था, जिसमें बच्चों ने सर सैयद पर तकरीर पेश कर खूब तालियां बटोरीं।

शाम से देर रात तक चली ये खूबसूरत महफिल तराना-ए-अलीगढ़ और सर सैयद के मिशन को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ खत्म हुई, जिसकी चर्चा आज पूरे पूर्णिया में हो रही है।

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