झांसी 09 नवंबर। गुरसरांय क्षेत्र के ग्राम परसुवा में संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ।
शोभायात्रा में महिलाएं सिर पर कलश रखकर का चल रही थी। बैंड बाजे तथा घोड़ों के साथ भक्तगण नृत्य करते हुए गांव में आकर्षण का केंद्र रहे। आचार्य रामकृष्ण मिश्र द्वारा वैदिक मंत्रों के द्वारा पूजन अर्चन कराया गया। भागवत कथा का शुभारंभ करते हुए आचार्य पीयूष मनु महाराज ने पुराण के महत्व का वर्णन करते हुए कहा कि जब कई जन्मों के पुण्यों का उदय होता है तभी सत्संग प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि यह देव दुर्लभ कथा है जिसके लिए देवता भी लालायित रहते है। जब देवताओं को सत्संग सुनने की इच्छा होती है उन्हें भी सत्संग सुनने के लिए मनुष्य रूप में पृथ्वी पर अवतार लेना पड़ता है। सत्संग की महिमा सुनाते हुए उन्होंने कहा यह सार्वजनिक प्याऊ है। भागवत वेद रूपी वृक्ष का पका हुआ फल जो शिष्य परंपरा के द्वारा धीरे धीरे पृथ्वी पर आया। कथा व्यास ने कहा कि कलयुग में सत्संग ही सबसे बड़ा मुक्ति का साधन है। ऑर्गन पर ओमकार मिश्रा, नाल पर अरविंद मिश्रा, पैड पर पिंटू मिश्रा ने संगत की। भागवत कथा की आरती परीक्षित श्रद्धा अर्पित द्विवेदी एवं निशा सत्य प्रकाश द्विवेदी ने उतारी। शोभायात्रा में अखिलेश पिपरैया, भागवताचार्य अरविन्द शास्त्री ,सुंदरभान मिश्रा, प्रधान जगत पाल, सुनील चौहान, डॉ आत्माराम द्विवेदी, लक्ष्मी नारायण दुबे, घनश्यामदास मिश्रा, विनय त्रिपाठी, सितार वादक पं सरजू शरण पाठक, कमला पत उपाध्याय, सोम मिश्रा ,भरत शर्मा, उषा शर्मा ,अंगूरी त्रिपाठी, गुलाब कुंवर, शैलेंद्र द्विवेदी, सनत द्विवेदी, अखिलेश मिश्रा आदि उपस्थित रहे।

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