ग्वालियर09जुलाई23*‘‘महिला एवं बच्चों के विरूद्ध घटित अपराधों में अनुसंधान एवं कौशल उन्नयन’’ विषय पर कार्यशाला*
*महिला एवं बच्चों के विरूद्ध घटित अपराधों की विवेचना का स्तर उत्कृष्ट करने के लिये पुलिस अधिकारियों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन*
ग्वालियर। 09.07.2023। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट, महाराजपुरा ग्वालियर के ऑडिटोरियम में आज दिनांक 09.07.2023 को ग्वालियर जिले के पुलिस अधिकारियों के लिये ‘‘महिला एवं बच्चों के विरुद्ध घटित अपराधों में अनुसंधान एवं कौशल उन्नयन’’ विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का शुभारंभ *श्रीमती आरती शर्मा, विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट ग्वालियर एवं श्री राजेश सिंह चंदेल,भापुसे पुलिस अधीक्षक ग्वालियर* द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प एवं दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर श्री पंकज पाण्डेय,भापुसे,पुलिस अधीक्षक अजाक ग्वालियर रेज, अति. पुलिस अधीक्षक शहर(मध्य/यातायात) श्री ऋषिकेश मीणा,भापुसे, अति. पुलिस अधीक्षक शहर(पूर्व/अपराध) श्री राजेश दंडोतिया, श्री आलोक बैंजामिन, मनोवैज्ञानिक ग्वालियर, सहायक लोक अभियोजन अधिकारी ग्वालियर श्री अनिल मिश्रा एवं सीएसपी लश्कर श्री के.एम.षियाज़,भापुसे, डीएसपी महिला सुरक्षा हिना खान सहित समस्त राजपत्रित अधिकारी, थाना प्रभारीगण एवं विवेचना अधिकारी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के प्रारम्भ में अति. पुलिस अधीक्षक शहर(मध्य/यातायात) श्री ऋषिकेश मीणा,भापुसे एवं अति. पुलिस अधीक्षक शहर(पूर्व/अपराध) श्री राजेश दंडोतिया द्वारा उपस्थित मुख्य अतिथियों का पुष्पगुच्छ प्रदान कर स्वागत किया गया, तद्उपरान्त डीएसपी महिला सुरक्षा हिना खान द्वारा ‘‘महिला एवं बच्चों के विरूद्ध घटित अपराधों में अनुसंधान एवं कौशल उन्नयन’’ विषय पर आयोजित कार्यशाला की रूपरेखा से सभी अतिथियों एवं विवेचकों को अवगत कराया। सेमीनार में उपस्थित अतिथियों को पुलिस अधिकारियों द्वारा स्मृति चिन्ह भेट किए गये।
श्रीमती आरती शर्मा, विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट ग्वालियर ने सेमीनार में उपस्थित पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि न्यायालय, अभियोजन तथा पुलिस विभाग एक ही उद्देश्य से कार्य करते हैं। पुलिस अधिकारियों को पॉक्सो एक्ट संबंधी प्रकरणों की विवेचना काफी गंभीरता से करनी चाहिए क्योंकि कभी-कभी विवेचक द्वारा की गई एक छोटी सी चूक के कारण आरोपी न्यायालय से बरी हो जाता है। इसका प्रमुख कारण अनुसंधान के दौरान विवेचना का कमजोर होना होता है। इसलिए प्रत्येक पुलिस अधिकारी को अपराधों की विवेचना करते समय उसका स्तर उच्च रखना चाहिए क्योंकि विवेचक द्वारा किए गये अनुसंधान के आधार पर ही न्यायालय आगे की कार्यवाही करता है। पुलिस अधिकारियों को कानून में हो रहे नवीनतम संशोधनों की जानकारी रखना चाहिए। उन्होने कहा कि प्रत्येक पुलिस अधिकारी को अपने कर्तव्य का निर्वहन पूरी ईमानदारी से करना चाहिए क्योंकि आपके द्वारा किये गये बेहतर अनुसंधान के आधार पर ही आरोपी को न्यायालय से सजा दिलाई जा सकती है जिससे समाज में पुलिस की अच्छी छवि बनेगी।
पुलिस अधीक्षक ग्वालियर श्री राजेश सिंह चंदेल,भापुसे द्वारा कार्यशाला में उपस्थित पुलिस अधिकारियों से कहा कि आपके द्वारा की गई उच्च कोटि की विवेचना से ही माननीय न्यायालय से आरोपी को सजा दिलाई जा सकती है और जिसका समाज में अच्छा प्रभाव पड़ता है। विवेचक द्वारा विवेचना के दौरान की गई छोटी-छोटी त्रुटियां की जाती है जबकि पॉक्सो एक्ट के प्रकरणों में गलतियों की कोई गुंजाइश होनी ही नही चाहिये तथा विवेचक की कार्यप्रणाली सदैव संदिग्धता से परे होनी चाहिए। उन्होने कहा कि वर्तमान समय में पुलिस को तकनीकी रूप से दक्ष होने के साथ ही नवीन कानूनी प्रावधानों की भी जानकारी होना आवश्यक है। वर्तमान समय में पुलिस को स्मार्टली अपना काम करना चाहिए क्योंकि समाज को पुलिस से काफी अपेक्षाएं हैं।
कार्यशाला में एसपी अजाक ग्वालियर रेंज श्री पंकज पाण्डेय द्वारा डिजिटल साक्ष्य एवं अपराधों के अनुसंधान में की जाने वाली कार्यवाहियों तथा उसमें बरती जाने वाली सावधानियों से उपस्थित पुलिस अधिकारियों को अवगत कराया गया। तद्उपरांत उनके द्वारा पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से महिला एवं पॉक्सो एक्ट व उसके प्रावधानों के संबंध में जानकारी प्रदाय की गई। इस दौरान उन्होंने महिला एवं पॉक्सो एक्ट संबंधी अपराधों की विवेचना के दौरान उपयोग किये जाने वाले प्राफार्मा के संबंध में उपस्थित पुलिस अधिकारियों को जानकारी दी गई और कहा कि संपूर्ण विवेचना क्रमबद्ध तरीके से की जानी चाहिए तभी आपके द्वारा की गई विवेचना में आरोपी को सजा मिल सकती है। उनके द्वारा कार्यशाला में उपस्थित पुलिस अधिकारियों के सवालों का जबाब देकर विवेचना संबंधी उनकी जिज्ञासाओं को शांत किया।
इसी क्रम में श्री आलोक बैंजामिन, मनोवैज्ञानिक बाल संप्रेक्षण गृह ग्वालियर द्वारा कार्यशाला में उपस्थित पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आपको बाल अपचारियों के मामले में संवेदनशील होने की आवश्यकता है तथा पुलिस का बाल अपचारी के प्रति शिक्षात्मक व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम दण्डात्मक नहीं किंतु सुधारात्मक है। इसलिए बाल अपचारी के साथ विनम्र व सुधारात्मक व्यवहार करने की आवश्यकता है।
कार्यशाला में श्री अनिल मिश्रा, एडीपीओ, ग्वालियर द्वारा पॉक्सोे एक्ट के प्रकरणों में विवेचना के दौरान विवेचकों द्वारा आमतौर पर की जाने वाली त्रुटियों के संबंध में जानकारी दी और कहा कि आपके द्वारा की गई छोटी सी त्रुटि अभियोजन के समय आरोपी को लाभ पहुंचाती है। इसलिये विवेचक को पॉक्सो एक्ट के प्रकरण में जारी प्रक्रिया के अनुसार की पंचनामा, प्रोफार्मा, जप्ती आदि तैयार करना चाहिए, साथ ही केस डायरी लेख करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें की लेखन त्रुटी न हो क्योकि इसका लाभ भी आरोपी पक्ष को मिलता है और एफआईआर में समुचित धाराएं एवं संपूर्ण विवरण स्पष्ट आना चाहिए। न्यायालय में अभियोजन के दौरान साक्ष्य देते समय केस डायरी के सभी तथ्यों को ध्यान मे रखकर अपने कथन दें, इस हेतु आवश्यकता होने पर अभियोजन शाखा से मदद भी प्राप्त कर सकते है।
सेमीनार के अंत में थाना प्रभारी बिजौली साधना सिंह द्वारा विगत दिनों नाबालिग का अपहरण कर मासूम बालक की दुष्कर्म कर हत्या करने वाले रिश्तेदार को गिरफ्तार कर बालक के शव को आलोरी के जंगल से बरामद करने के संबंध में केस स्टडी से विवेचकों को अवगत कराया गया।

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