May 27, 2026

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कानपुर७ अप्रैल २६ * ग़रीब पीड़ित किसानों की चीख बनकर उभरी सबसे बड़ी ब्रेकिंग, सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों ने भी आंखे की हुई हैं बंद, बने घूम रहे है गूंगे

कानपुर७ अप्रैल २६ * ग़रीब पीड़ित किसानों की चीख बनकर उभरी सबसे बड़ी ब्रेकिंग, सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों ने भी आंखे की हुई हैं बंद, बने घूम रहे है गूंगे

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कानपुर७ अप्रैल २६ * ग़रीब पीड़ित किसानों की चीख बनकर उभरी सबसे बड़ी ब्रेकिंग, सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों ने भी आंखे की हुई हैं बंद, बने घूम रहे है गूंगे

केडीए, भू आधिपत्य विभाग के भ्रष्टाचार पर अधिकारियों की तानाशाही चरम पर

कानपूर नगर *23 दिनों से तपती धूप में धरना… और अधिकारियों का वही पुराना खेल,कमेटी बनाकर किसानों की आवाज़ कर दी खामोश, थमा दिया कुछ दिनों में विचार करने का झुनझुना!

कानपुर के संभरपुर, हिन्दूपुर, गंगपुर, सिंहपुर में अपनी ही जमीन की उचित कीमत के लिए पिछले 23 दिनों से आंदोलनरत गरीब किसान अब पूरी तरह ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। किसानों ने आरोप लगाया कि न्यू सिटी योजना के नाम पर अधिकारियों ने उनकी क़ीमती ज़मीनें ज़बरन हथियाने की साज़िश रच रखी है, जबकि मुआवज़ा इतना कम तय किया जा रहा है कि किसान का परिवार दो वक्त की रोटी तक के लिए संघर्ष कर दे।

फरियाद सुनने पहुंचे संबंधित अधिकारियों ने भी एक बार फिर वही पुराना नाटक दोहराया। किसानों की पीड़ा को समझने के बजाय उन्होंने पूर्व की तरह कमेटी गठित करने की बात कहकर खानापूर्ति कर दी और उठकर चलते बने। इतना ही नहीं, किसानों का दर्द दूर करने के बजाय जवाब दिया कि “एक हफ्ते में करेंगे जल्द विचार *”

धरने पर बैठे किसानों का कहना है।
“किसान की जमीन छीनकर उसे कौड़ियों की कीमत देना कैसा न्याय? करोड़ों की जमीन कुछ लोगों को मनमानी दरों पर और गरीब किसान को रद्दी के भाव,क्या यही नई सिटी योजना है?”

किसान नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा
“देश का अन्नदाता अगर सड़क पर आ गया तो इसका जिम्मेदार कौन? किसानों की जमीन बिना अनुमति कोई नहीं ले सकता,कानून भी यही कहता है।”

किसानों ने साफ कहा कि अफसर दबाव और धोखे की नीति छोड़ें, क्योंकि अब यह लड़ाई सिर्फ जमीन की नहीं, सम्मान, भविष्य और अस्तित्व की बन गई है।

कानपुर की धरती आज सवाल पूछ रही है,

“क्या गरीब किसान सिर्फ कमेटियों की फाइलों में दबकर रह जाएगा, या उसकी आवाज़ कभी सरकार तक सच में पहुँचेगी?”

Taza Khabar