औरैया 19 नवम्बर *तीनों कृषि कानून वापस लेने पर लोगों ने दी प्रतिक्रियाएं*
*औरैया।* प्रधानमंत्री द्वारा तीनों कृषि कानून वापस लेने पर विपक्षीगणों ने भाजपा सरकार पर आरोप-प्रत्यारोप किए हैं , वहीं सत्ता पक्ष के लोगों ने प्रधानमंत्री के इस कार्य को सराहनीय बताया है। जबकि जनता के लोगों ने इसे चुनावी हथकंडा करार दिया है। वही किसानों के आंदोलन को दफन करने का भी षड्यंत्र करार दिया है। कुछ नेताओं ने कृषि कानून वापस लेना सरकार की पराजय व किसानों की जीत बताया है।
गुरु नानक जयंती प्रकाश पर्व पर देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 नए कृषि कानूनों को रद्द करने का ऐलान किया है। उन्होंने आंदोलनरत सभी किसानों को अपने घर वापस लौटने की भी अपील की है। प्रधानमंत्री की इस घोषणा पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता औरैया विधानसभा के प्रबल दावेदार सर्वेश बाबू गौतम ने कहा कि किसानों की जीत हुई है। वहीं सरकार का घमंड टूटा है। जब तक तीन कृषि कानून संसद से रद्द नहीं हो जाते तब तक किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। आगे उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर केंद्र सरकार किसानों को लॉलीपॉप दे रही है , लेकिन इसका कोई असर पड़ने वाला नहीं है। 2022 में प्रदेश से भाजपा का सूपड़ा साफ हो जाएगा। इसी तरह से बसपा के वरिष्ठ नेता पूर्व कोऑर्डिनेटर धनीराम गौतम का कहना है कि संपूर्ण भारत में केंद्र सरकार की थू-थू हो रही है , तथा आगामी विधानसभा चुनावों में अपनी जमीन खिसकते देख माननीय प्रधानमंत्री ने किसानों के साथ षड्यंत्रकारी चाल चली है। इसी प्रकार समाजसेवी किसान नेता विनोद कुमार त्रिशरण का कहना है कि 5 स्टेटो में वर्ष 2022 में विधानसभा चुनाव होने हैं। जिसमें भाजपा की करारी शिकस्त को भांपते हुए केंद्र सरकार जो कुछ भी कर दे अथवा कहे वह कम ही है। माह दिसंबर में किसान दिल्ली के लिए कूच करने वाले हैं। इसी बात से डरकर माननीय प्रधानमंत्री किसानों के आंदोलन को काउंटर करना चाहते हैं ,उन्हें ऐसा प्रतीत हो रहा है। भारतीय जनता पार्टी के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के जिला उपाध्यक्ष अमरपाल धनगर का कहना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बढ़ रहे किसान आंदोलन को लेकर माननीय प्रधानमंत्री ने किसानों के हित में फैसला लेते हुए तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने का ऐलान कर सराहनीय कार्य किया है। इसी तरह से ही कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ वयोवृद्ध नेता गिरीश बाबू चतुर्वेदी का कहना है कि देश के प्रधानमंत्री ने 1 वर्ष तक जिस तरह से किसानों का उत्पीड़न किया है , वह किसी से छिपा नहीं है। यह कृषि कानून वापस नहीं लेते तो भाजपा नेताओं का विरोध जबरदस्त तरीके से होने लगता। महंगाई , बेरोजगारी व भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे उत्तर प्रदेश में हावी है। इन काले कानूनों को केंद्र सरकार भले ही वापस ले ले , लेकिन इसके बावजूद प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव 2022 में भारी शिकस्त उठानी पड़ेगी। समाजवादी पार्टी के जिला मीडिया प्रभारी अमित यादव का कहना है कि 25 नवंबर 2020 को केंद्र की सरकार 3 नये कृषि कानून से लाई थी। जिसके बाद 25 नवंबर 2020 से ही किसानों ने 3 नये कृषि कानूनों का विरोध करते हुए विरोध प्रदर्शन आंदोलन शुरू कर दिया था। पंजाब व हरियाणा के हजारों किसानों ने दिल्ली चलो अभियान शुरू किया था। 17 सितंबर 2020 को संसद में भारी हंगामे के बीच तीन विवादास्पद कानून को लागू कर दिया गया था। किसान उपज व्यापार एवं वाणिज्य अधिनियम 2020 आवश्यक वस्तु संशोधन अधिनियम 2020 किसान मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अधिनियम 2020 लागू होने के बाद किसानों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। 12 जनवरी 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने तीन विवादास्पद कृषि कानूनों के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी। अक्टूबर माह में लखीमपुर खीरी मेंआंदोलन कर रहे किसानों पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे ने 4 किसानों को अपनी गाड़ी से कुचल कर मार दिया। इस घटना में एक पत्रकार की भी मौत हुई थी। श्री यादव का कहना है कि केंद्र सरकार किसानों के प्रति सौतेला व्यवहार कर रही है।
उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी का बिल्कुल सूपड़ा साफ हो जाएगा। वहीं यादव सेना के जिलाध्यक्ष अनुज यादव ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसान आंदोलन में अनगिनत किसानों की मौतें हो गई। जिसका रिकॉर्ड भी केंद्र सरकार के पास नहीं है। इससे बड़ा बिडंवना क्या हो सकता है? अब सरकार को किसानों की सुध आई है , तो इसके पीछे कारण साफ है कि केंद्र सरकार को देश में भाजपा का सूपड़ा साफ होता नजर आने लगा है। इस लिए उसने कृषि कानून समाप्त करने कुचक्र रचकर किसानों को एक बार फिर जुमलेबाजी की ओर ले जाना चाहती है। प्रदेश में समाजवादी पार्टी की लहर है, और जनता अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री देखना चाहती है। केंद्र व प्रदेश सरकार का कोई भी हथकंडा सफल नहीं होगा।

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