कानपुर28जून2023*अन्तर्राष्ट्रीय एम.एस.एम.ई. दिवस पर एक गोष्ठी का आयोजन सायंकाल04:00 बजे से किया गया।
मर्चेन्ट्सचैम्बर ऑफ़ उत्तर प्रदेश की ट्रेड एण्ड इन्डस्ट्री कमेटी, एसोचैम, लखनऊ एवं SIMA लखनऊद्वारा संयुक्त रूप से अन्तर्राष्ट्रीय एम.एस.एम.ई. दिवस पर एक गोष्ठी का आयोजन सायंकाल04:00 बजे से किया गया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में मर्चेंट्स चैम्बर के अध्यक्ष श्रीअतुल कानोडिया, मुख्य अतिथि श्री आलोक रंजन जी, विशिष्ट अतिथि श्री सुधांशु मनी जी,ऐसोचैम के वाइस प्रेसीडेन्ट- श्री बलराम नरूला, श्री सुधीर श्रीवास्तव, श्री शैलेन्द्रश्रीवास्तव, श्री ए. के. वर्मा एवं श्री सुशील शर्मा द्वारा ने दीप प्रज्जवलित कर कियागया।गोष्ठीके आयोजन से पूर्व मर्चेन्ट्स चैम्बर के अध्यक्ष- श्री अतुल कानोडिया ने उपस्तिथ सभीसदस्यों तथा आगंतुकों का स्वागत किया एवं सभी को मर्चेंट्स चैम्बर और कानपुर के इतिहाससे अवगत कराया तथा बताया कि इस गोष्ठी से हम सब को बहुत कुछ नई जानकारियाँ मिलेंगी,जो कारोबार को और आगे बढ़ाने में सहायक होगी। सरकारी योजनाओं के बारे में लोगों के पास जानकारी ही नहीं – आलोक रंजन
– सुधांशु मनी ने वंदे भारत एक्सप्रेस बनाने का अनुभव उद्यमियों के साथ शेयर किया
कानपुर : अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस के अवसर पर मर्चेट चेंबर ऑफ उत्तर प्रदेश , स्माल इंडस्ट्रीज मैन्यूफेक्चर एसोसिएशन (सीमा ) और सिडबी के सहयोग एक दिवसीय परिचर्चा का आयोजन किया गया। चर्चा का विषय एमएसएमई इज ऑफ डूइंग बिजनेस रखा गया। इसमें पूरे प्रदेश से आए उद्यमियों ने अपनी बात रखी और बताया कि सरल तरीके से कैसे व्यापार किया जाता है।
सिविल लाइन स्थित मर्चेट चेंबर ऑफ उत्तर प्रदेश के कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल उप्र सरकार के पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन ने कहा कि सरकार की तरफ से बहुत सारी योजनाएं चलाई जा रही है। लेकिन उन योजनाओं के बारे में लोगों के पास जानकारी ही नहीं है। यह सब बातें उनको रिटायर होने के बाद पता चली। उन्होंने कहा कि इसके लिए विशेष अभियान चलाया जाना चाहिए। इसमें योजनाओं के बारे में जानकारी और इसका लाभ दिलाने की पहल हो। इसके लिए शासन के साथ – साथ एमएसएमई संगठनों की जिम्मेदारी भी बनती है कि वह इसका प्रचार- प्रसार करे।
उन्होंने कहा कि माइक्रो इंडस्ट्री को लेकर अलग से सेल बननी चाहिए। जिससे कि इस पर ज्यादा से ज्यादा फोकस हो सके। हालांकि अलग विभाग होने की बात से उन्होंने असहमति जताई। कहा कि इससे आपस में सामंजस बैठाने में परेशानी आती है। उन्होंने कहा कि इज ऑफ डूंइग के लिए माइंड सेट को बदलने की जरूरत है। सरकारी अधिकारी और एमएसएमई दोनों को एक दूसरे पर ट्रस्ट करना होगा। इसमें जो गलत होंगे उसके खिलाफ कार्रवाई करने की जरूरत है।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के तौर पर शामिल वंदे भारत एक्सप्रेस बनाने वाले सुधांशु मनी ने ट्रेन के निर्माण के सफर को लेकर अपना अनुभव शेयर किया। उन्होंने बताया कि सबसे पहले वर्क स्थल पर बेहतर लोगों की टीम के लिए काम किया गया। बताया कि चैयरमैन से दो गाड़ी की अनुमति के लिए उन्होंने उनके पैर तक पकड़ने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि इतनी सफल ट्रेन का प्रोजेक्ट बिना इंडियन इंडस्ट्री के लोगों के सहयोग के बिना संभव नहीं था। इस दौरान उन्होंने हिंदी और उर्दू के कई शेर भी कार्यक्रम में सुनाए।
एमएसएमई के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने एमएसएमई के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। एसोचैम यूपी के लिए बलराम नरूला ने कहा कि चर्चा बहुत होती है लेकिन ठोस कदम नहीं उठता है। व्यवहारिक समस्याओं की तरफ सरकार का ध्यान बढे इस पर काम होना चाहिए। वहीं हरदीप सिंह राका ने कहा कि माइक्रो इंडस्ट्री के बिना कोई बड़ी इंडस्ट्री नहीं चल सकती है। उन्होंने कहा कि कानपुर को अगर समर्थन मिले तो एक बार फिर यह शहर मैनचेस्टर बन सकता है।
सचिन सिंह ने सिडबी के माध्यम से लोन की जानकारी शेयर की
सिडबी के एजीएम सचिन सिंह ने इस दौरान पीपीटी प्रजेंटेंशन के माध्यम से कई तरह की योजनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय तीन मुख्य योजनाओं से लाखों लोग इसका लाभ मिल रहा है। इसमें एक्सप्रेस वन प्वाइंट जीरो और एक्सप्रेस टू प्वाइंट जीरो एराइज और स्थापना के बारे में बताया। सिडबी की पूरी कार्यशैली डिजीटल हो गई है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय किसी को भी लोन के लिए कार्यालय आने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि उद्योग शुरू करने के लिए सबसे कम ब्याज दर पर सिडबी ही लोन दे रहा है। सरकार की सभी योजनओं का लाभ सिडबी के माध्यम से लिया जा रहा है। बताया कि 10 लाख से लेकर 20 करोड़ रुपए तक की आर्थिक मदद सिडबी करता है। मौजूदा पूरे देश में 10 रिजीनल और 82 ब्रांच है। सिडबी इसके लिए महज 0.5 से एक प्रतिशत तक प्रॉसेसिंग चार्ज लिया जाता है।
इनको मिला सम्मान इस दौरान अपने – अपने सेक्टर में बेहतर काम करने वाले उद्यमियों को सम्मानि किया गया। इसमें मनु भाटिया, राम जी गुप्ता, हरबीर सिंह राकड़ा, सीमा लाहोटी, पूजा गुप्ता, अदिति सारस्वत, शिल्पी कनोडिया और सोनल अग्रवाल ।
प्रमुख सुझाव जो कार्यक्रम के दौरान दिए गए
-कानपुर में MSME का समर्पित स्टॉक एक्सचेंज खुलना चाहिए। ऐसा होता है तो कानपुर एक बार फिर से व्यापार और वित्त का केंद्र बनेगा।
– उत्तर प्रदेश में कुल MSME के लगभग 96 फीसदी प्रोपराइटर फॉर्म में हैं स्टॉक एक्सचेंज खुलने से वह भी कॉर्पोरेट फॉर्म में आने की कोशिश करेंगे। जिससे उनके अनमैप होने की समस्या है वह ख़त्म होगी और इससे सरकार का राजस्व बढ़ेगा।
– पार्टनरशिप एमएसएमई फर्म को 15 फीसदी की आयकर की रियायत की दर की सुविधा दी जाए।
-माइक्रो उद्योग के लिए अलग से प्रकोष्ठ बनाने की जरूरत है। साल 2020 में तत्कालीन एमएसएमई केंद्रीय मंत्री प्रताप सारंगी ने इसको लेकर सहमति भी दी है।
– एमएसएमई का बहुत पैसा बकाया रहता है तमाम नियम के बावजूद इसके लिए एक सेपरेट भुगतान वसूली ट्रिब्यूनल की स्थापना करनी चाहिए। जिससे कि समय से भुगतान हो सके।
– उद्योग शुरू करने के लिए उद्यमी को सस्ते रेट पर जमीन उपलब्ध कराया जाए। जिससे कि वह उद्योग स्थापित कर जीएसटी और अन्य टैक्स ज्यादा जमा करे और सरकार को इससे मुनाफा होगा।
– औद्योगिक लीजहोल्ड प्लॉट को फ्रीहोल्ड में बदलना चाहिए। इससे मॉर्गेज कर ऋण का विकल्प व्यापारियों को मिलेगा।
इन लोगों ने कार्यक्रम के दौरान अपनी बात रखी
इस अवसर पर श्री आलोक रंजनद्वारा लिखित पुस्तक का विमोचन भी किया गया। उक्त गोष्ठी में SIDBI के राजीव कक्कड़,शिल्पी कानोडिया, राघव कानोडिया, शरद शाह, मनीष कटारिया, आशीष चौहान, विजय पान्डे,बी. के. लाहोटी, कपिल भाटिया, कमल रहेजा, रूफी वॉकी राजेश ग्रोवर, सीमा लाहोटी, पूजागुप्ता, अदिति सारस्वत, मंजरी निगम, सुनील अग्निहोत्री, दिलीप अग्रवाल, आर. के. अग्रवाल,प्रेम मनोहर गुप्ता के अलावा बड़़ी संख्या में चैम्बर के सदस्य, व्यवसायी एवं गणमान्यनागरिक उपस्थित रहे। धन्यवाद प्रस्ताव- श्री योगेश दुबे ने दिया।

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