कासगंज13अगस्त*कांग्रेस का झंडा आंदोलन – अपने आप में एक इतिहास है-तरुण शर्मा
उत्तर प्रदेश कॉंग्रेस कमेटी के सदस्य एवं पूर्व शहर अध्यक्ष तरुण शर्मा ने बताया कि कांग्रेस का बाराद्वारी मुरलीधर घंटाघर का झंडा आंदोलन अपने आप में एक इतिहास है, इस झंडे की नींव सन 1921 में बम्बई अधिवेशन में रखी गई थी जो कांग्रेस प्रतिनिधि तत्कालीन जिला एटा से उस अधिवेशन में गए सन 1949 में घंटा घर के निर्माण की बात हुई, श्री मुरलीधर अग्रवाल ( जलेसरी ) ने कांग्रेस की तरफ से घंटा घर बनने में ख़र्चे की ज़िम्मेदारी ली 15 अगस्त 1977 को जनता पार्टी सरकार ने झंडा फहराने से कांग्रेसियों को रोका इसके एवज में कांग्रेसी हाईकोर्ट गए 2 अक्टूबर 1977 को श्री नारायण दत्त तिवारी तत्कालीन नेता विपक्ष ने एलान किया कि हम झंडा घंटा घर पर ही फहराएंगे और तिवारी जी बरेली मार्ग से होते हुए कासगंज के लिए चल पड़े जिले के समस्त कांग्रेसी एफ सी आई के सामने बाग में इखट्टा होने लगे तिवारी जी को पुलिस ने कछला गंगा घाट पर गिरफ्तार कर लिया जिसको लेकर कांग्रेसियों में आक्रोश और उबाल उत्पन्न हो गया, उसके बाद कांग्रेस प्रतिनिधि मंडल ने सरकार से बात की तब स्तिथि को भांपते हुए सरकार ने प्रशासन को आदेश दिया कि कांग्रेसियों को झंडा फहराने दिया जाये तब उस आंदोलन के मद्देय नज़र तिवारी जी किन्ही कारणों से दुबारा कासगंज नही आ सके फिर जाकर उस समय के तत्तकालीन जिला अध्यक्ष एटा मलिक मुहम्मद मुशीर एहमद खां ने बाराद्वारी घंटाघर पर कांग्रेस का (चरखे वाला) झंडा फहराया पूर्व शहर अध्यक्ष ने बताया तब से लेकर आज तक हर 15 अगस्त और 26 जनवरी पर कांग्रेस के द्वारा यह चरखे वाला झंडा पूरे आदर और सम्मान के साथ फहराया जाता है।

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