January 14, 2026

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लखनऊ26अप्रैल*कार्य की सिद्धि के लिए उपकरणों की आवश्यकता नहीं होती सिर्फ पराक्रम होना चाहिए-योगेंद्र प्रताप सिंह

लखनऊ26अप्रैल*कार्य की सिद्धि के लिए उपकरणों की आवश्यकता नहीं होती सिर्फ पराक्रम होना चाहिए-योगेंद्र प्रताप सिंह

लखनऊ26अप्रैल*कार्य की सिद्धि के लिए उपकरणों की आवश्यकता नहीं होती सिर्फ पराक्रम होना चाहिए-योगेंद्र प्रताप सिंह

*प्रथम अरोरा प्रशिक्षण केंद्र के शुभारंभ पर डॉ बी आर अंबेडकर समाजोत्थान महासभा के संस्थापक योगेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कार्य की सिद्धि के लिए उपकरणों की आवश्यकता नहीं होती सिर्फ पराक्रम होना चाहिए*

*ब्यूरो रिपोर्ट लखनऊ*
खबर उत्तर प्रदेश के लखनऊ जनपद के कठवारा क्षेत्र से हैं जहां पर प्रथम अरोरा प्रशिक्षण केंद्र के शुभारंभ पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित अद्वितीय प्रतिभा के धनी व्यक्ति कार्य के प्रति लगन सिंह शिक्षा की धारा को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करने वाले गरीबों के हमदर्द बेसहारा ओके सहारा कर्तव्य के प्रति निष्ठावान सौम्य स्वभाव के दीपक प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के संस्थापक परम आदरणीय डॉक्टर माधव चौहान और मातृशक्ति की प्रेरणा स्रोत परम सम्मानीय परम पूज्य महिलाओं को पूर्ण सहयोग दिलाने वाली उनके हर कदम से कदम मिलाकर चलने वाली स्त्री पुरुष की समानता को बरकरार रखने वाली डॉक्टर रुकमणी बनर्जी जी एवं स्टेट हेड डिस्टिक हेड जोनल हेड डिवीजन हैड तहसील हेड ब्लॉक हेड सेंटर हेड शिक्षक गण तथा गणमान्य अतिथि अधिक संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित हुए इसी के साथ कार्य के सजग प्रहरी संस्था के अंग परम सम्माननीय सुशील पांडे जी और सुमित कुमार जी तथा डॉ बी आर अंबेडकर समाज उत्थान महासभा के संस्थापक योगेंद्र प्रताप सिंह आदि लोग उपस्थित हुए इसी के साथ डॉक्टर भीमराव अंबेडकर समाज उत्थान महासभा के संस्थापक योगेंद्र प्रताप सिंह ने कहा की शिक्षा वह शेरनी का दूध है जो पिएगा वह दहाड़े गा उन्होंने कहा कार्य की सिद्धि के लिए उपकरणों की आवश्यकता नहीं पड़ती पराक्रम होना चाहिए शिक्षा ऐसी हो जो रोजगार परख हो शिक्षा का उद्देश धन कमाना नहीं है बल्कि मानव का निर्माण करना है उन्होंने कहा की प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन एक भारत में ऐसी गैर सरकारी संस्था है जो भारत में ही नहीं बल्कि विश्व में एक नए विश्वास के साथ आगे बढ़ रही है और शिक्षा की धारा निरंतर प्रयासरत होते हुए सफलता के दुर्ग तक पहुंच रही है मानव और मानवता की मसाल कायम कर रही है चाहे स्त्री पुरुष की समानता हो या अन्य मुद्दे स्त्री और पुरुष उड़ते हुए पक्षी के दो पंखों के समान है और सिक्के के दो पहलुओं के समान है यदि उड़ते हुए पंछी के एक पर अगर काट दिया जाए तो वह उड़ नहीं सकता ठीक उसी प्रकार सिक्के के यदि एक पहलू को मिटा दिया जाए तो सिक्का चल नहीं सकता इसीलिए स्त्री पुरुष की समानता सामान्य कार्य जमीनी धरातल पर उतरना बहुत ही आवश्यक है अंत में उन्होंने कहा कि मैं *प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के संस्थापक को दो पंक्तियां समर्पित की कहां कि जब तक है चांद सितारे जब तक है धरती अंबर भारत रेडी रहेगा इसका अमर रहेंगे डॉक्टर माधव चौहान सर* जय हिंद जय भारत