November 4, 2026

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वाराणसी 4 नवम्बर 26*अखिल भारतीय संत समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, काशी विद्वत परिषद एवं श्री गंगा सभा की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न

वाराणसी 4 नवम्बर 26*अखिल भारतीय संत समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, काशी विद्वत परिषद एवं श्री गंगा सभा की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न

वाराणसी4 नवम्बर 26*अखिल भारतीय संत समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, काशी विद्वत परिषद एवं श्री गंगा सभा की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न

 

वाराणसी से नीलिमा राय की रिपोर्ट | यूपीआजतक

वाराणसी 4 नवम्बर 26*अखिल भारतीय संत समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, काशी विद्वत परिषद एवं श्री गंगा सभा की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न

वाराणसी, 02 नवंबर 2026। धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी यानी वाराणसी में सोमवार को अखिल भारतीय संत समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, काशी विद्वत परिषद एवं श्री गंगा सभा से जुड़े संतों, महात्माओं और धर्माचार्यों की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में सनातन धर्म की परंपराओं, भारतीय संस्कृति, धार्मिक विरासत और सामाजिक जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों को लेकर संत समाज की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साधु-संतों एवं धार्मिक क्षेत्र से जुड़े गणमान्य लोगों की उपस्थिति रही।

वाराणसी 4 नवम्बर 26*अखिल भारतीय संत समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, काशी विद्वत परिषद एवं श्री गंगा सभा की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न

वाराणसी में आयोजित इस बैठक में अखिल भारतीय संत समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, काशी विद्वत परिषद और श्री गंगा सभा से जुड़े प्रतिनिधियों की सहभागिता रही। इन धार्मिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं का भारतीय परंपराओं और सनातन संस्कृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
बैठक में संत समाज की एकजुटता और धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष ध्यान दिखाई दिया। काशी जैसी प्राचीन धार्मिक नगरी में इस प्रकार का आयोजन भारतीय आध्यात्मिक विरासत की महत्ता को भी सामने लाता है।

बैठक में संत समाज की एकजुटता और धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष ध्यान दिखाई दिया। काशी जैसी प्राचीन धार्मिक नगरी में इस प्रकार का आयोजन भारतीय आध्यात्मिक विरासत की महत्ता को भी सामने लाता है।

वाराणसी 4 नवम्बर 26*अखिल भारतीय संत समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, काशी विद्वत परिषद एवं श्री गंगा सभा की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न

2. संस्कृति संसद को लेकर विशेष चर्चा और आयोजन
कार्यक्रम में प्रदर्शित आयोजन संबंधी बैनर के अनुसार 3, 4 और 5 नवंबर 2026 को वाराणसी के रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं सम्मेलन केंद्र में संस्कृति संसद का आयोजन निर्धारित है।
इस आयोजन की थीम ‘चर्चा संस्कृति की, चिंतन राष्ट्र का’ रखी गई है। इसका उद्देश्य भारतीय संस्कृति, सभ्यता, धार्मिक परंपराओं और राष्ट्रीय चिंतन से जुड़े विषयों को एक व्यापक मंच प्रदान करना है।
संस्कृति संसद के अंतर्गत विभिन्न गतिविधियों का आयोजन प्रस्तावित है। इनमें संस्कृति संसद, युवा विमर्श, सांस्कृतिक उत्सव और कला दीर्घा जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।
वाराणसी 4 नवम्बर 26*अखिल भारतीय संत समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, काशी विद्वत परिषद एवं श्री गंगा सभा की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न

3. युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने की पहल
आयोजन में युवा विमर्श यानी Gen Z Conclave को भी विशेष स्थान दिया गया है। इसके माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ने की पहल की गई है।
आज के आधुनिक दौर में युवा पीढ़ी तकनीक और वैश्विक विचारों से तेजी से जुड़ रही है। ऐसे समय में अपनी सांस्कृतिक जड़ों, परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत को समझना भी आवश्यक है।
युवा विमर्श के माध्यम से युवाओं को अपनी संस्कृति के प्रति जागरूक करने और सकारात्मक विचारों को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है।

आज के आधुनिक दौर में युवा पीढ़ी तकनीक और वैश्विक विचारों से तेजी से जुड़ रही है। ऐसे समय में अपनी सांस्कृतिक जड़ों, परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत को समझना भी आवश्यक है।
युवा विमर्श के माध्यम से युवाओं को अपनी संस्कृति के प्रति जागरूक करने और सकारात्मक विचारों को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है।

वाराणसी 4 नवम्बर 26*अखिल भारतीय संत समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, काशी विद्वत परिषद एवं श्री गंगा सभा की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न

4. संत-महात्माओं के लिए भोजन व्यवस्था भी रही आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम के दौरान संत-महात्माओं के लिए सामूहिक भोजन की व्यवस्था भी देखने को मिली। आयोजन स्थल पर लंबी कतारों में बैठकर संतों ने भोजन ग्रहण किया। भगवा वस्त्रधारी साधु-संतों की एक साथ भोजन करते हुए तस्वीरें कार्यक्रम की व्यवस्था और धार्मिक वातावरण को दर्शाती हैं।
भारतीय सनातन परंपरा में संत सेवा, अतिथि सत्कार और अन्नदान को विशेष महत्व दिया जाता है। धार्मिक आयोजनों में संत-महात्माओं की सेवा को पुण्य कार्य माना जाता है। इस आयोजन में भी संतों के लिए की गई भोजन व्यवस्था ने सेवा और समर्पण की परंपरा को प्रदर्शित किया।

5. कला, संस्कृति और भारतीय विरासत को मिलेगा मंचकार्यक्रम के दौरान संत-महात्माओं के लिए सामूहिक भोजन की व्यवस्था भी देखने को मिली। आयोजन स्थल पर लंबी कतारों में बैठकर संतों ने भोजन ग्रहण किया। भगवा वस्त्रधारी साधु-संतों की एक साथ भोजन करते हुए तस्वीरें कार्यक्रम की व्यवस्था और धार्मिक वातावरण को दर्शाती हैं।
भारतीय सनातन परंपरा में संत सेवा, अतिथि सत्कार और अन्नदान को विशेष महत्व दिया जाता है। धार्मिक आयोजनों में संत-महात्माओं की सेवा को पुण्य कार्य माना जाता है। इस आयोजन में भी संतों के लिए की गई भोजन व्यवस्था ने सेवा और समर्पण की परंपरा को प्रदर्शित किया।

5. कला, संस्कृति और भारतीय विरासत को मिलेगा मंच
संस्कृति संसद के साथ कला दीर्घा और चित्रकला एवं छायाचित्र प्रदर्शनी का भी आयोजन प्रस्तावित है। इसके माध्यम से कलाकारों, चित्रकारों और फोटोग्राफरों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।
भारतीय संस्कृति केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कला, साहित्य, संगीत, स्थापत्य, दर्शन और लोक परंपराओं का भी महत्वपूर्ण स्थान है।
काशी सदियों से ज्ञान, धर्म, दर्शन और कला की नगरी रही है। ऐसे में यहां संस्कृति संसद का आयोजन विशेष महत्व रखता है।

संस्कृति संसद के साथ कला दीर्घा और चित्रकला एवं छायाचित्र प्रदर्शनी का भी आयोजन प्रस्तावित है। इसके माध्यम से कलाकारों, चित्रकारों और फोटोग्राफरों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।
भारतीय संस्कृति केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कला, साहित्य, संगीत, स्थापत्य, दर्शन और लोक परंपराओं का भी महत्वपूर्ण स्थान है।
काशी सदियों से ज्ञान, धर्म, दर्शन और कला की नगरी रही है। ऐसे में यहां संस्कृति संसद का आयोजन विशेष महत्व रखता है।

6. काशी की धार्मिक पहचान को मिलेगी नई ऊर्जा
वाराणसी को विश्व की प्राचीनतम जीवंत धार्मिक नगरी के रूप में जाना जाता है। यहां गंगा के घाट, मंदिर, मठ, अखाड़े और विद्वानों की परंपरा भारतीय संस्कृति की पहचान हैं।
अखिल भारतीय संत समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, काशी विद्वत परिषद और श्री गंगा सभा जैसे संगठनों की सहभागिता इस आयोजन को धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती है।
संत समाज की उपस्थिति से यह संदेश भी सामने आता है कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं के संरक्षण के लिए विभिन्न धार्मिक संस्थाओं के बीच संवाद और समन्वय आवश्यक है।

 

अखिल भारतीय संत समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, काशी विद्वत परिषद और श्री गंगा सभा जैसे संगठनों की सहभागिता इस आयोजन को धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती है।
संत समाज की उपस्थिति से यह संदेश भी सामने आता है कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं के संरक्षण के लिए विभिन्न धार्मिक संस्थाओं के बीच संवाद और समन्वय आवश्यक है।
7. तीन दिवसीय आयोजन पर रहेंगी सभी की निगाहें
3 से 5 नवंबर 2026 तक आयोजित होने वाली संस्कृति संसद में संतों, विद्वानों, युवाओं और कला जगत से जुड़े लोगों की सहभागिता प्रस्तावित है। कार्यक्रम के बैनर के अनुसार विभिन्न सत्रों और गतिविधियों के लिए अलग-अलग समय निर्धारित किया गया है।
इस आयोजन के माध्यम से धार्मिक चिंतन, सांस्कृतिक संवाद, युवा भागीदारी और कला प्रदर्शन को एक साझा मंच उपलब्ध कराने की तैयारी है।

 

3 से 5 नवंबर 2026 तक आयोजित होने वाली संस्कृति संसद में संतों, विद्वानों, युवाओं और कला जगत से जुड़े लोगों की सहभागिता प्रस्तावित है। कार्यक्रम के बैनर के अनुसार विभिन्न सत्रों और गतिविधियों के लिए अलग-अलग समय निर्धारित किया गया है।
इस आयोजन के माध्यम से धार्मिक चिंतन, सांस्कृतिक संवाद, युवा भागीदारी और कला प्रदर्शन को एक साझा मंच उपलब्ध कराने की तैयारी है।

निष्कर्ष
कुल मिलाकर 2 नवंबर को वाराणसी में आयोजित संत समाज की यह बैठक धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रही। अखिल भारतीय संत समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, काशी विद्वत परिषद और श्री गंगा सभा से जुड़े लोगों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष पहचान दी।

काशी की पावन धरती पर आयोजित यह समागम भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण की दिशा में संवाद और सहभागिता का महत्वपूर्ण अवसर बना।
अब सभी की निगाहें 3 से 5 नवंबर तक आयोजित होने वाली संस्कृति संसद पर टिकी हैं, जहां संस्कृति, युवा विमर्श, कला और राष्ट्रीय चिंतन से जुड़े विभिन्न विषयों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे

वाराणसी से नीलिमा राय की विशेष रिपोर्ट।
यूपीआजतक – खबर वही, जो हो सही।

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