हरिद्वार 23 अक्टूबर 26*भारतीय किसान यूनियन (नैन) ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन:
SIR रद्द करने, 13.41 करोड़ वोटरों के मताधिकार बहाली और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की उठाई मांग; आंदोलन की दी चेतावनी
विस्तृत समाचार रिपोर्ट
हरिद्वार / नई दिल्ली (यूपी आज तक रिपोर्टर: कालूराम जयपुरिया):
देश में लोकतंत्र की मजबूती, नागरिकों के बुनियादी मताधिकार और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शन के अधिकारों के संरक्षण को लेकर भारतीय किसान यूनियन (नैन) ने एक बड़ा कदम उठाया है। संगठन की ओर से भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संबोधित एक विस्तृत और कड़ा ज्ञापन प्रेषित किया गया है। इस ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने केंद्र सरकार और संबंधित संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को तुरंत प्रभाव से रद्द करने, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने तथा उनके खिलाफ सख्त कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई करने की मांग की है। इसके साथ ही, मतदाता सूची से कथित तौर पर बाहर किए गए करोड़ों नागरिकों के मताधिकार को तुरंत बहाल करने की पुरजोर पैरवी की गई है।
सुरेश कुमार राजपूत और कालूराम जयपुरिया के नेतृत्व में उठी मांग
भारतीय किसान यूनियन (नैन) के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कुमार राजपूत तथा संगठन के बंगाल एवं दिल्ली प्रभारी कालूराम जयपुरिया के नेतृत्व में यह ज्ञापन तैयार कर राष्ट्रपति महोदया के संज्ञान में भेजा गया। किसान नेताओं का कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक गणराज्य की आत्मा उसके नागरिकों का वोट देने का अधिकार होती है। जब तक हर पात्र नागरिक का नाम निष्पक्ष रूप से मतदाता सूची में दर्ज नहीं होगा, तब तक निष्पक्ष लोकतंत्र की कल्पना बेमानी है। संगठन ने औपचारिक तौर पर दावा किया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण अभियानों की आड़ में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं, जिससे आम नागरिकों का मत देने का अधिकार प्रभावित हुआ है। ज्ञापन में विशेष रूप से 13.41 करोड़ नागरिकों के मताधिकार को बिना किसी विलंब के दोबारा बहाल करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई है।
चुनाव प्रक्रिया में व्यापक सुधार और मुख्य न्यायाधीश की भूमिका की मांग
ज्ञापन में चुनाव प्रणाली को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए बड़े पैमाने पर संरचनात्मक चुनाव सुधारों की आवश्यकता रेखांकित की गई है। संगठन ने मांग की है कि वर्तमान चुनाव व्यवस्था के स्थान पर आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली लागू करने पर विचार किया जाए, जिससे हर वर्ग और विचार की जनता का उचित प्रतिनिधित्व संसद और विधानसभाओं में हो सके। इसके अतिरिक्त, चुनावों में दिनों-दिन बढ़ते जा रहे धनबल और बाहुबल के प्रभाव पर प्रभावी अंकुश लगाने की मांग की गई है।
राजनीतिक दलों को मिलने वाले गुप्त और असीमित वित्तपोषण पर रोक लगाने के लिए एक पारदर्शी व स्पष्ट कानूनी रूपरेखा तैयार करने की बात कही गई है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) की नियुक्ति प्रक्रिया का जिक्र करते हुए संगठन ने स्पष्ट कहा कि निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए चयन समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की उपस्थिति अनिवार्य की जानी चाहिए। संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता और निष्पक्षता बनाए रखना स्वस्थ लोकतंत्र की पहली शर्त है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लोकतांत्रिक अधिकार की रक्षा पर जोर
भारतीय किसान यूनियन (नैन) ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में किसानों और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा 23 अक्टूबर को किए गए विरोध-प्रदर्शनों का खुला समर्थन किया है। किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखना नागरिकों का संवैधानिक और मौलिक अधिकार है। ज्ञापन में मांग की गई है कि निर्धारित धरना स्थलों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से रोकने वाले सभी दमनकारी और प्रतिबंधात्मक आदेशों को तत्काल वापस लिया जाए।
संगठन ने चिंता व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि विभिन्न स्थानों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे किसानों, नौजवानों और छात्र प्रतिनिधियों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया गया तथा पुलिस बल का अनुचित इस्तेमाल हुआ। यूनियन ने मांग की है कि ऐसे सभी मामलों की निष्पक्ष व उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों पर कानूनी कार्रवाई हो और आंदोलनकारियों की शारीरिक सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जाए।
सरकार को खुली चेतावनी: मांगें न मानीं तो तेज होगा जन-आंदोलन
यूनियन ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह किसानों और आम नागरिकों की इन संवैधानिक व लोकतांत्रिक मांगों को नजरअंदाज न करे। कुछ राज्यों में राजनीतिक कार्यकर्ताओं और जनहित के लिए संघर्षरत सामाजिक संगठनों के सदस्यों के खिलाफ की जा रही दंडात्मक पुलिस कार्रवाई पर भी गंभीर चिंता जताई गई है। यूनियन ने नागरिकों की व्यक्तिगत निजता और मौलिक अधिकारों की गारंटी मांगी है।
भारतीय किसान यूनियन (नैन) ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार, मताधिकार की बहाली और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के संरक्षण से जुड़े मुद्दों का समय रहते उचित समाधान नहीं निकाला गया, तो किसान संगठन मूकदर्शक बनकर नहीं बैठेंगे। नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए देशव्यापी स्तर पर एक बड़े और व्यापक आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी।
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