October 20, 2026

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महोबा 20 अक्टूबर 26*चरखारी के ग्राम गढ़ा में दर्दनाक हादसा: कच्चा मकान गिरने से 12 वर्षीय बबली की मौत,

महोबा 20 अक्टूबर 26*चरखारी के ग्राम गढ़ा में दर्दनाक हादसा: कच्चा मकान गिरने से 12 वर्षीय बबली की मौत,

महोबा 20 अक्टूबर 26*चरखारी के ग्राम गढ़ा में दर्दनाक हादसा: कच्चा मकान गिरने से 12 वर्षीय बबली की मौत,

प्रधानमंत्री आवास योजना पर उठे सवाल

परिवार ने कई बार किया आवास के लिए आवेदन, ग्राम प्रधान बोले—2020 से गांव में नए आवास नहीं आए; लाभार्थी सूची में शामिल है पीड़ित परिवार का नाम

चरखारी महोबा से सादिक इस्लाम की रिपोर्ट यूपीआजतक 

चरखारी (महोबा)। चरखारी तहसील के ग्राम गढ़ा में सोमवार सुबह करीब छह बजे एक दर्दनाक हादसा हो गया। कच्चा मकान अचानक ढह जाने से उसके मलबे में दबकर 12 वर्षीय बच्ची बबली की मौत हो गई। हादसे के समय परिवार के पांच सदस्य कमरे में सो रहे थे। मकान गिरने की आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू किया। ग्रामीणों ने परिवार के चार सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन बबली को नहीं बचाया जा सका। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

मृतक बबली, गंगाराम की पुत्री थी। हादसे के समय उसकी मां उषा देवी, बड़ी बहन श्वेता और छोटा भाई शिवम सहित परिवार के सदस्य कमरे में मौजूद थे। मासूम बेटी की मौत से माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है।

कई बार आवेदन के बावजूद नहीं मिला पक्का मकान

परिवार और मृतका की दादी के अनुसार, उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान पाने के लिए कई बार आवेदन किया था, लेकिन परिवार को अब तक आवास का लाभ नहीं मिल सका। परिवार जर्जर कच्चे मकान में रहने को मजबूर था।

परिजनों का कहना है कि वे लंबे समय से पक्के मकान की उम्मीद लगाए बैठे थे। इस हादसे ने गरीब परिवारों के लिए सुरक्षित आवास की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

ग्राम प्रधान के बयान से सामने आई आवास योजना की स्थिति

ग्राम प्रधान से बातचीत में जानकारी सामने आई कि गांव में वर्ष 2020 से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नए आवास नहीं आए हैं। प्रधान के अनुसार, इस अवधि में केवल दिव्यांग और आपदाग्रस्त परिवारों को ही आवास का लाभ मिल सका है।

प्रधान ने बताया कि पीड़ित परिवार का नाम लाभार्थियों की सूची में शामिल है। जैसे ही नए आवास आवंटित होकर आएंगे, परिवार को योजना का लाभ दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

प्रधान के इस बयान के बाद सवाल उठता है कि यदि पीड़ित परिवार का नाम लाभार्थियों की सूची में शामिल है, तो उसे अब तक पक्का मकान क्यों नहीं मिल सका? क्या आवासों की सीमित उपलब्धता के कारण पात्र परिवार वर्षों तक इंतजार करने को मजबूर हैं? इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने की जरूरत

ग्राम गढ़ा की इस घटना ने प्रधानमंत्री आवास योजना के जमीनी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर गरीब परिवार पक्की छत की उम्मीद में वर्षों तक इंतजार करते हैं, वहीं दूसरी ओर जर्जर मकानों में रहना उनके लिए जोखिम भरा बना रहता है।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट होना बाकी है कि परिवार की पात्रता कब निर्धारित हुई, उसका नाम लाभार्थी सूची में किस क्रम पर है और आवास आवंटित न होने के वास्तविक कारण क्या हैं। ऐसे में आवश्यक है कि संबंधित अधिकारी अभिलेखों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करें और जिम्मेदारी तय करें।

पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और आवास दिलाने की मांग

हादसे के बाद पीड़ित परिवार को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की मांग उठ रही है। प्रशासन को चाहिए कि परिवार को नियमानुसार आपदा राहत एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ उसकी आवास संबंधी स्थिति की प्राथमिकता के आधार पर जांच करे।

साथ ही, परिवार द्वारा पहले किए गए आवेदनों, लाभार्थी सूची में उसके नाम और आवास आवंटन की स्थिति की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि पात्र परिवार को जल्द से जल्द सुरक्षित आवास मिल सके।

एक मासूम की मौत ने गरीब परिवारों की आवास सुरक्षा से जुड़ी गंभीर समस्या को सामने ला दिया है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस दर्दनाक घटना के बाद पीड़ित परिवार को राहत दिलाने और आवास योजना की स्थिति स्पष्ट करने के लिए क्या कदम उठाता है।

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