मथुरा 20 अक्टूबर 26*न्यया नहीं मिला तो भाजपा छोड़ेंगी पिंकी द्विवेदी
मथुरा से कु0 सोनम की रिपोर्ट यूपीआजतक
मथुरा *जमीन विवाद में भाजपा छोड़ने की चेतावनी
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मथुरा*तीर्थनगरी मथुरा के थाना जैंत क्षेत्र में जमीन पर कथित अवैध कब्जे का मामला अब प्रशासनिक चौखट से निकलकर सियासी गलियारों में गरमाने लगा है। छटीकरा मार्ग स्थित मां वैष्णो धाम के समीप करीब 450 वर्गगज बेशकीमती भूमि पर हुए कथित कब्जे को लेकर भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी वरिष्ठ नेत्री एवं पूर्व ब्लॉक प्रमुख पिंकी द्विवेदी ने अपनी ही सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने सीधे तौर पर प्रशासन और पार्टी नेतृत्व को चेतावनी देते हुए दो टूक कहा है कि यदि उन्हें इस गंभीर प्रकरण में त्वरित और निष्पक्ष न्याय नहीं मिला, तो वह भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे देंगी। भाजपा नेत्री के इस कड़े रुख और बगावती तेवर के बाद स्थानीय राजनीतिक हलकों और प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।
वर्ष 2012 में कराया था बैनामा, भू-माफियाओं पर साठगांठ का आरोप
पीड़ित भाजपा नेत्री पिंकी द्विवेदी का कहना है कि उन्होंने वर्ष 2012 में छटीकरा स्थित वैष्णो धाम के निकट विधिवत नियमानुसार 450 वर्गगज जमीन का बैनामा कराया था। उनके अनुसार, उक्त भूमि से संबंधित सभी राजस्व दस्तावेज, खतौनी और रजिस्ट्री के कागजात उनके पास पूरी तरह वैध और मौजूद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ समय से कुछ दबंग और भू-माफिया किस्म के लोग उनकी इस संपत्ति पर गिद्ध दृष्टि गड़ाए हुए थे। मौका पाकर इन लोगों ने जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया और निर्माण कार्य शुरू करने का प्रयास किया। जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो उन्हें डराने-धमकाने और प्रशासनिक मिलीभगत का हवाला देकर चुप कराने की कोशिश की गई।
पिंकी द्विवेदी ने बेहद आहत मन से कहा कि वह लंबे समय से पार्टी की एक निष्ठावान और सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में सेवा करती आ रही हैं। जब खुद सत्ताधारी दल की पूर्व जनप्रतिनिधि और महिला पदाधिकारी की निजी संपत्ति सुरक्षित नहीं है और उन्हें न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है, तो ऐसी स्थिति में आम जनता की सुरक्षा और सुनवाई का क्या हाल होगा, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर सत्ता में रहते हुए भी कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों की जायज शिकायतों की अनदेखी होगी, तो उनका दल में बने रहने का कोई नैतिक औचित्य नहीं रह जाता।
प्रशासनिक स्तर पर तीन सदस्यीय संयुक्त जांच समिति गठित
मामले के राजनीतिक तूल पकड़ने और उच्चाधिकारियों तक शिकायत पहुंचने के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हुआ है। जिलाधिकारी के निर्देश पर प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए एक उच्चस्तरीय त्रिस्तरीय संयुक्त जांच समिति का गठन किया गया है। इस जांच दल में उपजिलाधिकारी (एसडीएम) सदर, क्षेत्राधिकारी नगर (सीओ सिटी) तथा तहसीलदार सदर को शामिल किया गया है।
प्रशासन द्वारा गठित इस संयुक्त टीम को निर्देश दिए गए हैं कि वे मौके पर जाकर स्थलीय मुआयना करें, विवादित भूमि के सभी पुराने व नए राजस्व अभिलेखों की सूक्ष्मता से पड़ताल करें और दोनों पक्षों के साक्ष्यों को ध्यानपूर्वक दर्ज करें। प्रशासन ने टीम को निर्देशित किया है कि सीमांकन और अभिलेखीय सत्यापन के आधार पर वस्तुस्थिति की विस्तृत जांच रिपोर्ट अविलंब उच्चाधिकारियों को सौंपी जाए, ताकि वास्तविक तथ्यों के आधार पर अग्रिम विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
दोषियों पर कठोर कार्रवाई और कब्जामुक्त कराने की मांग
भाजपा नेत्री पिंकी द्विवेदी ने स्पष्ट किया है कि उन्हें प्रशासन की जांच प्रक्रिया पर भरोसा है, लेकिन यह जांच निष्पक्ष और समयबद्ध होनी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि किसी भी प्रकार के राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव में आए बिना दूध का दूध और पानी का पानी किया जाए। उनकी जमीन से अवैध कब्जा तुरंत हटवाकर उन्हें वास्तविक कब्जा दिलाया जाए और भू-माफिया तत्वों तथा उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने दो टूक शब्दों में दोहराया कि उनकी लड़ाई केवल एक भूखंड की नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और न्याय की है। यदि तय समय सीमा के भीतर जांच में ढिलाई बरती गई या दबंगों के दबाव में आकर मामले को दबाने का प्रयास किया गया, तो वह अपने कहे अनुसार भाजपा से नाता तोड़ लेंगी और न्याय पाने के लिए सड़क से लेकर शासन स्तर तक आंदोलन छेड़ने के लिए विवश होंगी। फिलहाल प्रशासन की संयुक्त जांच समिति ने मामले से जुड़े राजस्व अभिलेखों को खंगालना शुरू कर दिया है और इस हाई-प्रोफाइल विवाद पर पूरे जिले की नजरें टिकी हुई हैं।
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