*BREAKING NEWS*
इलहाबाद 1 अक्टूबर 26*इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला उत्तर प्रदेश में सभी हुक्का बार पूरी तरह बंद करने का आदेश*
*गैर-धूम्रपान करने वालों के साफ हवा में सांस लेने का मौलिक अधिकार, व्यापारियों के मुनाफे से बड़ा*
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा के हित में एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए उत्तर प्रदेश के सभी हुक्का बार को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि चाहे रेस्टोरेंट हो या कैफे, कहीं भी हुक्का परोसने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस आदेश के बाद अब प्रदेश के सभी जिलों में नगर निगम और खाद्य सुरक्षा विभाग (फूड विभाग) को अवैध रूप से चल रहे हुक्का बारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।
*रेस्टोरेंट मालिकों की तमाम दलीलें खारिज*
हुक्का बार संचालकों और रेस्टोरेंट मालिकों ने अदालत में इस प्रतिबंध के खिलाफ कई दलीलें पेश की थीं। उनकी मुख्य दलील यह थी कि स्मोकिंग ज़ोन (धूम्रपान क्षेत्रों) में हुक्का देना पूरी तरह कानूनी है। कुछ मालिकों का कहना था कि वे हुक्का बेच नहीं रहे हैं बल्कि केवल इसे ग्राहकों को किराए पर दे रहे हैं। वहीं कुछ ने इसे ‘सेल्फ-सर्विस’ (स्वयं सेवा) का नाम देकर बचाने की कोशिश की।
माननीय हाईकोर्ट ने इन सभी दलीलों को एक-एक करके पूरी तरह खारिज कर दिया। अदालत ने साफ तौर पर कहा कि नियमों को इस तरह घुमाकर कानून का उल्लंघन करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
*नियम 43 का हवाला स्मोकिंग एरिया में नहीं मिलेगी कोई सर्विस*
अदालत ने वर्ष 2017 में संशोधित किए गए नियम 43 का हवाला देते हुए स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट किया। कोर्ट ने कहा कि इस नियम के तहत किसी भी होटल, रेस्टोरेंट या सार्वजनिक प्रतिष्ठान के निर्दिष्ट धूम्रपान क्षेत्र’ (Smoking Area) में किसी भी प्रकार की सेवा (सर्विस) नहीं दी जा सकती।
इसका सीधा मतलब यह है कि स्मोकिंग ज़ोन के भीतर न तो खाना परोसा जा सकता है न कोई पेय पदार्थ (ड्रिंक्स) दिया जा सकता है न तंबाकू और न ही हुक्का। वह क्षेत्र केवल और केवल धूम्रपान के लिए हो सकता है, वहां किसी भी प्रकार की व्यावसायिक सर्विस प्रदान करना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
*व्यापार के अधिकार से बड़ा है ‘सांस लेने का अधिकार’*
इस फैसले की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण टिप्पणी संविधान के अनुच्छेदों को लेकर रही। अदालत ने *अनुच्छेद 21 (जीने का अधिकार)* पर सबसे अधिक जोर दिया। कोर्ट ने कहा कि देश के हर नागरिक, विशेषकर गैर-धूम्रपान करने वाले लोगों को स्वच्छ और साफ हवा में सांस लेने का मौलिक अधिकार प्राप्त है। यह अधिकार किसी भी रेस्टोरेंट मालिक या व्यापारी के व्यापार करने के अधिकार से कहीं ऊपर है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यद्यपि संविधान का अनुच्छेद *19(1)(g)* नागरिकों को व्यापार करने की स्वतंत्रता देता है, लेकिन जब बात जन स्वास्थ्य (Public Health) और जीवन की सुरक्षा की आती है, तो साफ हवा और स्वास्थ्य का अधिकार व्यापारिक लाभ से कहीं अधिक महत्वपूर्ण और सर्वोच्च माना जाएगा।
*प्रशासन को मुस्तैद रहने के निर्देश*
इस कड़े फैसले के बाद अब गेंद स्थानीय प्रशासन के पाले में है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि नगर निगम स्थानीय पुलिस और फूड विभाग संयुक्त रूप से इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करवाएं। आदेश के बाद प्रदेश भर के कैफे रेस्टोरेंट और लाउंज में चल रहे हुक्का पार्लरों पर तालाबंदी का रास्ता साफ हो गया है जिससे तंबाकू के बढ़ते चलन और युवाओं में इसके दुष्प्रभावों पर लगाम कसने में मदद मिलेगी।
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