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मुजफ्फरनगर 23 सितंबर 26*सास ने विधवा बहू को माना बेटी, कराया दूसरा विवाह—समाज के सामने पेश की इंसानियत की मिसाल*
*लोकेन्द्र गौतम* ब्यूरो चीफ सहारनपुर मंडल यूपीआजतक
खतौली (मुजफ्फरनगर)। पति की असमय मौत के बाद विधवा बहू के सामने खड़ी जिंदगी की मुश्किलों को समझते हुए एक सास ने संवेदनशीलता और त्याग की अनूठी मिसाल पेश की। सास ने अपनी विधवा बहू को बहू नहीं, बल्कि सगी बेटी का दर्जा देते हुए उसका दूसरा विवाह कराया और पूरे सम्मान के साथ उसे नई जिंदगी की शुरुआत के लिए विदा किया। बताया गया कि पति के निधन के बाद बहू के भविष्य को लेकर परिवार चिंतित था। ऐसे समय में सास ने समाज की परंपरागत सोच से अलग हटकर बहू के बेहतर भविष्य को प्राथमिकता दी। उन्होंने बहू की इच्छा और खुशी को महत्व देते हुए उसके पुनर्विवाह का निर्णय लिया। विवाह की इस पहल को लेकर परिवार और आसपास के लोगों ने भी सास के इस फैसले की सराहना की। इस घटना ने यह संदेश दिया कि रिश्ते केवल सामाजिक बंधनों से नहीं, बल्कि प्रेम, संवेदना और इंसानियत से भी मजबूत होते हैं।पिता-पुत्र की मौत से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ ,,प्राप्त जानकारी के अनुसार, खतौली क्षेत्र के दयालपुरम निवासी रोहित पुत्र ओमपाल का विवाह करीब आठ वर्ष पूर्व मीनाक्षा पुत्री मोहन के साथ हुआ था। रोहित अपने पिता ओमपाल के साथ राजमिस्त्री का कार्य कर परिवार का पालन-पोषण करता था। करीब एक माह पूर्व रोहित के पिता ओमपाल की कैंसर की गंभीर बीमारी के चलते मृत्यु हो गई थी। बताया जा रहा है कि पिता की मौत का सदमा रोहित सहन नहीं कर सका और उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पिता और पति की एक के बाद एक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पति और ससुर को खोने के बाद मीनाक्षा के सामने अपनी दो छोटी बेटियों के पालन-पोषण और उनके भविष्य की बड़ी जिम्मेदारी आ गई। ऐसे कठिन समय में परिवार पूरी तरह सदमे में है। आर्य समाज मंदिर में सादगी से संपन्न हुआ मीनाक्षा का पुनर्विवाह
सास ने बहू को बेटी की तरह विदा कर पेश की इंसानियत की मिसाल । परिजनों की सहमति से मीनाक्षा का पुनर्विवाह नारायणपुर (कोटपुतली क्षेत्र) निवासी योगेश पुत्र सुरेश के साथ तय किया गया। योगेश चाट का व्यवसाय करते हैं। खतौली स्थित आर्य समाज मंदिर में सादगीपूर्ण वातावरण में परिजनों और शुभचिंतकों की मौजूदगी में दोनों का विवाह संपन्न कराया गया।
विवाह के बाद सास ने अपनी बहू को बेटी की तरह दुलार दिया और नए जीवन की शुरुआत के लिए भावुक मन से विदा किया। इस दौरान परिवार के सदस्यों ने नवविवाहित दंपती को सुखद वैवाहिक जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि रिश्ते केवल खून के संबंधों से नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, अपनत्व और संवेदना से भी बनते हैं। विपरीत परिस्थितियों के बीच सास द्वारा लिया गया यह निर्णय परिवार और समाज में मानवीय संवेदनाओं की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।
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