हरिद्वार ३ सितंबर २०२६ * हल्द्वानी कांग्रेस रैली विवाद के कथित शुद्धिकरण को लेकर कांग्रेस का हल्लाबोल, 7 सितंबर को देहरादून में मुख्यमंत्री आवास घेराव

हरिद्वार। हल्द्वानी कांग्रेस रैली के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की हल्द्वानी रैली विवाद के बाद रैली स्थल के कथित “शुद्धिकरण” को लेकर उत्तराखंड की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस ने इस पूरे मामले को सामाजिक भेदभाव, सम्मान और लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ते हुए सरकार के खिलाफ आंदोलन का ऐलान किया है। कांग्रेस के मुताबिक, इस घटना के विरोध और इसे लेकर आवाज उठाने के मामले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर के विरोध में पार्टी कार्यकर्ता अब सड़कों पर उतरेंगे।

कांग्रेस ने ऐलान किया है कि 7 सितंबर 2026 को देहरादून में मुख्यमंत्री आवास घेराव किया जाएगा। पार्टी का कहना है कि इस प्रदर्शन के जरिए सरकार को स्पष्ट संदेश दिया जाएगा कि सामाजिक भेदभाव, अपमान और लोकतांत्रिक आवाज को दबाने की किसी भी कोशिश का कांग्रेस कार्यकर्ता विरोध करेंगे।
कांग्रेस नेताओं के अनुसार, हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद रैली स्थल के कथित शुद्धिकरण की घटना ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि किसी राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल होने वाले नेता के बाद आयोजन स्थल को शुद्ध करने जैसी कार्रवाई सामाजिक समानता और आपसी सम्मान के खिलाफ है। पार्टी इसे केवल राजनीतिक विरोध का मामला नहीं मान रही, बल्कि इसे सामाजिक सोच और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा मुद्दा बता रही है।
कांग्रेस का कहना है कि लोकतंत्र में किसी घटना पर सवाल उठाना, उसके खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करना और सरकार या संबंधित लोगों से जवाब मांगना राजनीतिक दलों और नागरिकों का अधिकार है। इसी क्रम में राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने को लेकर भी कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि इस कार्रवाई के खिलाफ भी 7 सितंबर के आंदोलन में आवाज उठाई जाएगी।
हरिद्वार जिला महानगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमन गर्ग ने कहा कि कांग्रेस सामाजिक सम्मान और समानता के मुद्दे पर पीछे हटने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री आवास घेराव के माध्यम से कांग्रेस कार्यकर्ता अपनी बात मजबूती के साथ सरकार तक पहुंचाएंगे।
कांग्रेस ने इस आंदोलन को केवल पार्टी का कार्यक्रम न बताते हुए इसे सम्मान, समानता, संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई बताया है। पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की जा रही है कि वे बड़ी संख्या में देहरादून पहुंचकर आंदोलन को सफल बनाएं।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उत्तराखंड जैसे राज्य में सामाजिक सौहार्द और भाईचारे को मजबूत बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों और संगठनों की जिम्मेदारी है। ऐसे में किसी भी तरह की कथित भेदभावपूर्ण कार्रवाई को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। कांग्रेस का दावा है कि 7 सितंबर का प्रदर्शन इसी संदेश को मजबूती से सामने रखने के लिए किया जा रहा है।
इस पूरे विवाद के बीच अब सभी की नजर 7 सितंबर को देहरादून में होने वाले मुख्यमंत्री आवास घेराव पर टिकी है। कांग्रेस के प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। वहीं, इस आंदोलन को लेकर सरकार और भाजपा की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
हल्द्वानी से शुरू हुआ यह विवाद अब हरिद्वार और देहरादून तक राजनीतिक चर्चा का विषय बन चुका है। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह इस मुद्दे को लेकर आंदोलन जारी रखेगी और कार्यकर्ताओं के साथ सड़क पर उतरकर विरोध दर्ज कराएगी।
फिलहाल कांग्रेस के इस ऐलान के बाद उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर सियासी टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। 7 सितंबर का मुख्यमंत्री आवास घेराव कितना बड़ा राजनीतिक संदेश देता है और सरकार इस प्रदर्शन पर किस तरह प्रतिक्रिया देती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
हरिद्वार से संतोष बिष्ट के साथ कालूराम जयपुरिया, यूपी आजतक।

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