महोबा 29 अगस्त 26*चरखारी गौशाला में गोवंशों की बदहाली पर सवाल, लंपी जैसे लक्षणों से चिंता बढ़ी
चरखारी से सादिक इस्लाम की रिपोर्ट, यूपी आज तक
महोबा के चरखारी से गौशाला की व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। नगर पालिका परिषद चरखारी द्वारा संचालित गौशाला में गोवंशों की हालत को लेकर स्थानीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है। आरोप है कि पर्याप्त चारा-पानी, साफ-सफाई और इलाज की व्यवस्था को लेकर लापरवाही बरती जा रही है। वहीं, कुछ गोवंशों में लंपी जैसे लक्षण दिखाई देने की बात भी सामने आई है, जिसके बाद पशु स्वास्थ्य और गौशाला की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
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चरखारी की इस गौशाला में मौजूद गोवंशों की स्थिति देखकर संवेदनशील व्यक्ति का मन विचलित हो सकता है।
सरकार की ओर से निराश्रित गोवंशों के संरक्षण, चारे-पानी और उपचार के लिए बजट उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर सरकारी धन खर्च होने के बावजूद गौशाला में व्यवस्थाएं संतोषजनक क्यों नहीं दिखाई दे रही हैं?
स्थानीय लोगों की ओर से गौशाला की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
सवाल यह भी है कि गौवंशों की संख्या के अनुपात में पर्याप्त चारा और भूसा उपलब्ध है या नहीं?
क्या पशुओं को नियमित रूप से स्वच्छ पानी मिल रहा है?
क्या बीमार गोवंशों का समय पर पशु चिकित्सकों द्वारा उपचार कराया जा रहा है?
और गौशाला की साफ-सफाई एवं व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी आखिर कौन कर रहा है?
बताया जाता है कि चरखारी की गौशाला की व्यवस्थाओं को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। वर्ष 2022 में गोवंशों की मौत और अव्यवस्थाओं की शिकायत के बाद गौशाला प्रभारी को हटाए जाने की खबर भी सामने आई थी।
वहीं हाल के दिनों में भी गो आश्रय केंद्र में गोवंशों में लंपी जैसे लक्षणों को लेकर नागरिकों ने लापरवाही के आरोप लगाए और मामले की जांच का आश्वासन दिए जाने की बात सामने आई है।
ऐसे में अब जरूरत सिर्फ आश्वासन की नहीं, बल्कि व्यवस्था की पारदर्शी जांच की है।
गौशाला के लिए मिले बजट, चारे-भूसे की खरीद, भुगतान, गोवंशों की संख्या, दवाइयों और कर्मचारियों की व्यवस्था का पूरा हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सरकारी धन का उपयोग किस तरह किया जा रहा है।
गोवंश किसी सरकारी फाइल का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवित प्राणी हैं, जिनके संरक्षण की जिम्मेदारी व्यवस्था की है।
जरूरत है कि जिलाधिकारी महोबा और संबंधित उच्चाधिकारी चरखारी गौशाला का स्थलीय निरीक्षण कराकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं।
यदि जांच में किसी तरह की वित्तीय अनियमितता या लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
क्योंकि सवाल सिर्फ सरकारी बजट का नहीं है…
सवाल उन बेजुबान गोवंशों की जिंदगी का है, जो अपनी पीड़ा खुद बयां नहीं कर सकते।
चरखारी से सादिक इस्लाम की रिपोर्ट, यूपी आज तक।
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