गोरखपुर (दबीर आलम)17अगस्त26*NEET के पेपर लीक से शुरू हुई आग अब सिर्फ एक घटना नहीं रह गई —
गोरखपुर*यह बिहार से लेकर लखनऊ तक कॉलेजों और स्कूलों में उठती हुई आवाज़ बन चुकी है। जब सिस्टम ने भरोसा खोया, तब छात्र खड़े हुए: जंतर-मंतर पर न सिर्फ नारे, बल्कि उम्मीदें भी लगीं। एक शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा विरोध की तीव्रता दिखाता है; मगर असली सवाल यह है कि क्या यह आंदोलन सिर्फ भ्रष्टाचार के खिलाफ है या देश के युवाओं की एक बड़ी नैरेटिव‑बदलाव की शुरुआत है?
सड़कों पर दिख रही पीड़ा केवल कागज़ और परीक्षा तक सीमित नहीं है। छात्रों को बताए बिना बनाए गए नियम, टैट में आयी अनियमितताएँ, और सामान्य वर्ग‑असामानता की दीवारें — ये सब मिलकर एक गहरा भरोसा घात कर रहे हैं। इसलिए युवा अब केवल मांग कर रहे हैं: पारदर्शिता, समान अवसर और शिक्षा की गुणवत्ता। और जब युवा यह मांग लेकर सड़कों पर उतरते हैं, तो वह सिर्फ विरोध नहीं करते; वह देश के भविष्य पर सवाल उठाते हैं।
यह आंदोलन सामूहिक नाराज़गी से कहीं आगे है — इसमें अवसर, गरिमा और हिस्सेदारी की मांग है। अगर नीति‑निर्माता सुनते हैं, जवाबदेही सुनिश्चित करते हैं और शिक्षा को लोकतांत्रिक बनाते हैं, तो यह युवा शक्ति हमारे लोकतंत्र की रीढ़ बन सकती है। वरना यह गुस्सा असंतोष में बदलकर लंबे समय के लिए देश को खोखला कर देगा।
आज की युवा पीढ़ी सिर्फ नौकरी नहीं चाहती; वह एक ऐसी व्यवस्था चाहती है जो ईमानदार, समतामूलक और गुणवत्ता‑प्रधान हो। अगर सरकारें और संस्थान यह समझ लें तो आने वाले दशक में भारत के प्रमुख परिवर्तन युवा हाथों से ही होंगे — सही दिशा में। नफरत या हिंसा नहीं, पर दृढ़ उम्मीद और व्यवस्थित माँगें इस बदलाव की असली ताकत हैं।
More Stories
मुजफ्फरनगर 4 अक्टूबर 26*पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान से मिले NHM संविदा स्वास्थ्यकर्मी
मुजफ्फरनगर 4 अक्टूबर 26* दिनदहाड़े बुजुर्ग महिला से ₹90 हजार के कुंडल छीने, रोहाना चौकी से चंद कदम दूर हुई वारदात
प्रसार भारती के Waves OTT पर छाया हिंदी फिल्म ‘बिजली का लट्टू’ का जलवा,