August 10, 2026

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सतना9अगस्त26*मॉर्चुरी में हो रहा था पोस्टमॉर्टम, पौने दो घंटे तक देखती रहीं छात्राएं, जिला अस्पताल में आई सामने बड़ी लापरवाही*

सतना9अगस्त26*मॉर्चुरी में हो रहा था पोस्टमॉर्टम, पौने दो घंटे तक देखती रहीं छात्राएं, जिला अस्पताल में आई सामने बड़ी लापरवाही*

सतना9अगस्त26*मॉर्चुरी में हो रहा था पोस्टमॉर्टम, पौने दो घंटे तक देखती रहीं छात्राएं, जिला अस्पताल में आई सामने बड़ी लापरवाही*

सतना। जिला अस्पताल की मॉर्चुरी में शुक्रवार को स्कूल की दो छात्राओं की मौजूदगी में पोस्टमॉर्टम किए जाने का मामला सामने आया है। स्कूल यूनिफॉर्म में दोनों छात्राएं करीब पौने दो घंटे तक मॉर्चुरी के अंदर मौजूद रहीं। इस दौरान मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर प्रतीक शुक्ला समेत चार लोग वहां मौजूद बताए गए। छात्राओं को मॉर्चुरी में प्रवेश की अनुमति किस आधार पर दी गई और उन्हें पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया क्यों दिखाई गई, इसे लेकर अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

*पोस्टमॉर्टम के दौरान पौने दो घंटे अंदर रहीं छात्राएं*
जानकारी के अनुसार शुक्रवार दोपहर करीब 1.45 बजे जिला अस्पताल की मॉर्चुरी में दुर्गेश पिता बेटू सिंह निवासी नरदहा, जिला पन्ना के कंकाल का परीक्षण शुरू हुआ। पोस्टमॉर्टम और परीक्षण की प्रक्रिया के दौरान दोनों छात्राएं भी मॉर्चुरी के भीतर मौजूद थीं। करीब 3.35 बजे टीम मॉर्चुरी से बाहर निकली। इस दौरान छात्राएं स्कूल यूनिफॉर्म और बैग के साथ अंदर दिखाई दीं। दोनों ने मास्क भी लगा रखा था। मामले ने कई सवाल खड़े किए हैं कि प्रतिबंधित मॉर्चुरी क्षेत्र में नाबालिग छात्राओं को प्रवेश किसकी अनुमति से मिला और पोस्टमॉर्टम जैसी संवेदनशील प्रक्रिया के दौरान उनकी मौजूदगी कैसे हुई। अब निगाहें अस्पताल और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की जांच पर टिकी हैं।

*संबंधित अधिकारियों का क्या कहना है*
शनिवार को पीएससी परीक्षा होने के कारण शुक्रवार को स्कूल में हाफ डे था। स्कूल प्रबंधन की ओर से किसी भी छात्रा को मॉर्चुरी जाने की अनुमति नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा कि यदि छात्राएं स्कूल की अनुमति के बिना वहां गई हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी और उनके परिजनों को भी सूचना दी जाएगी।
*शीला सिंह, प्राचार्य, एमएलबी स्कूल*

मॉर्चुरी को प्रतिबंधित क्षेत्र है। बिना अनुमति किसी भी व्यक्ति को पोस्टमॉर्टम रूम में प्रवेश नहीं दिया जा सकता। यदि पोस्टमॉर्टम के दौरान स्कूल की छात्राएं डॉक्टरों के साथ मॉर्चुरी में मौजूद थीं तो यह अनुचित है और नियमों के विपरीत माना जाएगा।
*- डॉ. महेंद्र सिंह, पुलिस के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी*

हमारे स्तर पर मॉर्चुरी में स्कूली बच्चों के प्रशिक्षण का कोई शेड्यूल नहीं है। फोरेंसिक प्रशिक्षण से संबंधित नियम मेडिकल कॉलेज के स्तर से तय होते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पोस्टमॉर्टम के दौरान ड्यूटी स्टाफ के अलावा किसी बाहरी व्यक्ति की मौजूदगी नहीं हो सकती। विशेष परिस्थितियों में मृतक के परिजनों को अनुमति के आधार पर अंदर बुलाया जा सकता है।
– *डॉ. मनोज शुक्ला, सीएमएचओ*

ऐसा कोई नियम नहीं है, जिसके तहत स्कूली बच्चों को पोस्टमॉर्टम के दौरान प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने बताया कि एमबीबीएस के छात्र-छात्राओं को भी मॉर्चुरी में प्रवेश के लिए अनुमति आवश्यक होती है। यदि स्कूल की छात्राएं पोस्टमॉर्टम के दौरान वहां मौजूद थीं तो मामले की जानकारी जुटाई जाएगी।
– *डॉ. एसपी गर्ग, डीन मेडिकल कॉलेज*

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