पूर्णिया बिहार 13 फरवरी 26*स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला स्तर पर अनीमिया मुक्त भारत एवं सी-मैम कार्यक्रम की समीक्षा बैठक आयोजित
पूर्णिया बिहार से मोहम्मद इरफान कामिनी की खास रिपोर्ट यूपीआजतक

पूर्णिया बिहार। जिले में अनीमिया मुक्त भारत (एएमबी) और बाल संवर्धन कार्यक्रम सी-मैम के लिए स्वास्थ्य अधिकारियों को प्रशिक्षित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा गुरुवार को जिले के होटल सेंटर प्वाइंट में समीक्षा बैठक सह उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा करते हुए प्रभावी क्रियान्वयन हेतु स्वास्थ्य अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

कार्यशाला में यूनिसेफ, बिहार से पोषण पदाधिकारी डॉ संदीप घोष, एम्स पटना- सामुदायिक एवं पारिवारिक विभाग के सीनियर रेसिडेंट डॉ वेंकेटेश कार्तिकेन, यूनिसेफ राज्य सलाहकार सौमिला सुरभि, स्टेला ग्रेस, शिक्षा विभाग के जिला प्रोग्राम प्रबंधक, प्रधानमंत्री पोषण, एडीपीसी एवं एपीआरओ सर्व शिक्षा अभियान के अधिकारी, जिला स्वास्थ्य समिति से जिला सामुदायिक उत्प्रेरक संजय कुमार दिनकर, जिला अनुश्रवन एवं मूल्यांकन पदाधिकारी आलोक कुमार, जिला प्रोग्राम समन्वयक डॉ सुधांशु शेखर, यूनिसेफ से जिला पोषण सलाहकार निधि भारती, अनीमिया मुक्त भारत कंसल्टेंट शुभम गुप्ता, पीरामल फाउंडेशन जिला प्रतिनिधि एवं प्रोजेक्ट कोऑर्डनेटर संकल्प और आईसीडीएस के राष्ट्रीय पोषण मिशन के जिला समन्वयक निधि प्रिया, सभी परियोजना के बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, प्रखण्ड समन्वयक एवं स्वास्थ्य विभाग से सभी प्रखण्ड के प्रखण्ड सामुदायिक उत्प्रेरक, भंडारपाल, शिक्षा विभाग से प्रखण्ड शिक्षा पदाधिकारी एवं लेखापाल, फिया फाउंडेशन के प्रतिनिधि युगल किशोर, उत्तम एवं अन्य भी उपस्थित रहे।

06-59 माह के बच्चों में आयरन फोलिक एसिड, अनुपूरण की स्थिति, कुपोषण की पहचान एवं प्रबंधन और सामुदायिक जागरूकता को सुदृढ़ करने पर की गई विस्तार से चर्चा :
बैठक के दौरान 06-59 माह के बच्चों में आयरन फोलिक एसिड (IFA) अनुपूरण की स्थिति, कुपोषण की पहचान एवं प्रबंधन, सामुदायिक जागरूकता एवं विभागीय समन्वय को सुदृढ़ करने पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में अधिकारियों को ई-शिक्षाकोस पोर्टल पर एनीमिया मुक्त भारत सूचकांक के प्रतिवेदन को सुदृढ़ एवं अद्यतन करने पर विशेष बल दिया गया। डाटा प्रविष्टि की गुणवत्ता, समयबद्धता एवं सत्यापन प्रक्रिया को बेहतर बनाने तथा सूचकांकों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

अनीमिया के लक्षणों एवं उपचार के बारें में समुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी रखेंगे जानकारी :
मातृत्व अनीमिया को दूर करने के लिए प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि गर्भवती महिला में एनीमिया के लक्षणों की पहचान कैसे करें। इनमें त्वचा, चेहरे, जीभ और आंखों की ललिमा की कमी, काम करने पर जल्दी ही थकावट हो जाना, सांस फूलना या घुटन होना, काम में ध्यान न लगना और, चक्कर आना, भूख न लगना और चेहरे और पैरों में सूजन आदि शामिल हैं। स्वास्थ्यकर्मी महिलाओं को इस बात की जानकारी दिया जाए कि खून में आयरन की सही मात्रा होने से बच्चे का उचित शारीरिक और मानसिक विकास होता है। शरीर चुस्त रहता है और मन में फुर्ती रहती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। इसके लिए आयरन युक्त लाभार्थियों को आई.एफ.ए. खुराक के साथ भोजन में विटाामिन सी युक्त चीजें शामिल करने से आयरन का बेहतर अवशोषण होता है। इसके लिए 06-59 माह के बच्चों को 01 एम.एल. आइ०एफ०ए० सिरप सप्ताह में दो बार, 05-09 वर्ष के बच्चों को प्रति सप्ताह 01 आइ०एफ०ए० की गुलाबी गोली, 10-19 वर्ष के किशोर-किशोरियों को प्रति सप्ताह 01 आई०एफ०ए० की नीली गोली, प्रजनन उम्र की महिलाओं (20-24 वर्ष) को प्रति सप्ताह 01 आई०एफ०ए० की लाल गोली जबकि गर्भवती और दूध पिलाने वाली महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान चौथे माह के प्रारंभ से एवं प्रसव के उपरांत अगले 180 दिनों तक रोजाना 01 आई०एफ०ए० की लाल गोली का सेवन करना चाहिए।
गर्भवती महिलाओं में अनीमिया की जांच डिजिटल हेमोग्लोबिनोमीटर के माध्यम से करने की दी गई जानकारी :
अधिकारियों को प्रशिक्षण के दौरान जानकारी दिया गया कि कैसे गर्भवती महिलाओं में अनीमिया की जांच डिजिटल हेमोग्लोबिनोमीटर के माध्यम से किया जाना है। अनीमिया की उपचार हेतु पूर्णिया जिले के सभी प्राथमिक स्वस्थ्य केंद्र/रेफरल अस्पताल/समूदायिक स्वास्थ्य केंद्र/अनुमंडलीय अस्पताल में गर्भवती महिलाओं में गंभीर अनीमिया की उपचार हेतु आयरन सुक्रोज के माध्यम से इलाज किया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को बताया गया अनीमिया की जांच पश्चात मध्यम एवं गंभीर अनीमिया से ग्रसित गर्भवती महिलाओ को प्रखंड स्वास्थ केंद्रों में रेफर किया जाए। जांच के बाद उपचार के लिए गर्भवती महिला को उपलब्ध कराने वाले आइवी आयरन सूक्रोज का पूर्ण खुराक लगवाना सुनिश्चित किया जाए जिससे कि संबंधित लाभार्थी अनीमिया से सुरक्षित हो सके।
बाल संवर्धन के लिए समुदाय आधारित कुपोषण प्रबंधन के दस चरण की विस्तार से दी गई जानकारी :
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल संवर्धन के लिए समुदाय आधारित कुपोषण प्रबंधन हेतु समुदायिक अधिकारियों को वृद्धि निगरानी और दोनों पैरों में सूजन की जांच, कुपोषित बच्चों के भूख का परिक्षण, चिकित्सा मूल्यांकन, देखभाल के स्तर का निर्णय, पोषण प्रबंधन, चिकित्सीय प्रबंधन, पोषण, साफ-सफाई पर परामर्श, नियमित निगरानी और गृह भ्रमण, समुदाय आधारित प्रबंधन कार्यक्रम से डिस्चार्ज, डिस्चार्ज के बाद वीएचएसएनडी स्तर पर मासिक फॉलोअप के बारे में जानकारी दी गई। विशेषज्ञों द्वारा सभी अधिकारियों को बच्चों के विकास निगरानी और जनजागरूकता में आंगनबाडी सेविका एवं आशा के सहयोग, कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में रेफर करने में मदद, परिवारों और देखभाल करने वालों को परामर्श, उचित आहार प्रथाओं और साफ-सफाई से संबंधित विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान चिन्हित सभी गंभीर रूप से कम वजन और गंभीर रूप से दुबले बच्चों के भूख के परीक्षण की जानकारी दी गई। इसके साथ ही हर महीने आंगनवाड़ी द्वारा पहचान किये गये गंभीर रूप से दुबले बच्चों की सूची अनुसार प्रत्येक बच्चे का वजन और उंचाई का पूर्ण सत्यापन कर रिकॉर्ड रखना एवं स्वास्थ्य जाँच कर उनकी स्थिति का आँकलन कर उनका प्रबंधन करने हेतु जानकारी डी गई। अनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम से संबंधित सभी अनुपूरक के इंडेंट एवं कवरेज को ससमय करने एवं समुदाय स्तर, विद्यालय पर इसकी उपलब्धता साथ ही सामुदायिक स्तर पर कुपोषित बच्चों के प्रबंधन (बाल संवर्धन) संबंधित सभी अनुपूरक की भीएचएसएनडी सत्र पर उपलब्धता के संबंध में विस्तार में चर्चा की गई एवं दिशानिर्देश दिए गए।

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