जम्मू कश्मीर11मई25*सोफिया कुरैशी: गाँव की बेटी से सरहद की सिपाही तक का सफर!
जब एक छोटे से गाँव की मिट्टी में खेलती एक बच्ची ने बड़े सपने देखे थे, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि एक दिन वही बेटी देश की सरहदों की हिफाजत करेगी।
सोफिया कुरैशी, एक नाम जो आज सिर्फ वर्दी में नहीं, बल्कि हर हिन्दुस्तानी के दिल में बस चुका है।
गाँव की तंग गलियों से लेकर सेना की कठोर ट्रेनिंग तक, उनके सफर में संघर्ष भी था, आँसू भी और अटूट हौंसला भी।
जहाँ लोग कहते थे कि “लड़कियाँ सिर्फ घर तक सीमित हैं”, वहीं सोफिया ने बंदूक उठाकर दुनिया को दिखा दिया कि बेटियाँ सरहद की भी शेरनी बन सकती हैं।
हर सुबह सूरज के साथ उठना, कड़ी मेहनत, पसीना और कई बार अपने सपनों पर भी सवाल — लेकिन सोफिया ने कभी हार नहीं मानी।
आज जब वो फौजी वर्दी में सरहद पर खड़ी होती हैं, तो सिर्फ दुश्मनों के लिए खौफ नहीं, बल्कि हर भारतीय के लिए गर्व बन जाती हैं।
उनका ये सफर हमें याद दिलाता है कि
“सपने बड़े देखो, मेहनत दिल से करो, और फिर दुनिया झुक ही जाती है।”
सोफिया कुरैशी का संघर्ष, उनका जुनून और उनकी जीत, हर उस बेटी के लिए मिसाल है जो आज भी अपने सपनों के लिए लड़ रही है गाँव की मिट्टी से

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