नई दिल्ली05मई25संसार में अच्छे और बुरे सब प्रकार के लोग देखे जाते हैं।
“कोई सकारात्मक चिंतन करता है, सदा प्रसन्न रहता है। जैसी भी परिस्थिति हो, उसे खुश होकर स्वीकार कर लेता है।”
“कोई व्यक्ति नकारात्मक चिंतन करता है, सदा दुखी रहता है। अपनी परिस्थितियों से सदा असंतुष्ट रहता है।”
“जो व्यक्ति प्रसन्न रहता है, वह सदा अपना निरीक्षण परीक्षण करता रहता है। अपने दोषों को ढूंढता रहता है, उन्हें दूर करता रहता है। और अन्य उत्तम उत्तम गुणों को धारण करता रहता है। दूसरों के जीवन में भी वह अच्छी बातें ढूंढ कर उनको सीख लेता है। ऐसे व्यक्ति का जीवन सफल है।”
“परंतु जो व्यक्ति नकारात्मक चिंतन वाला है, वह सदा दुखी रहता है। वह अपने सुधार के लिए प्रायः कुछ विशेष प्रयत्न नहीं करता। बल्कि दूसरों में ही दोष देखता रहता है, और दुखी होता रहता है। उनकी टीका टिप्पणी करता रहता है, उनसे द्वेष भी करता है। ऐसे व्यक्ति का जीवन असफल है।”
“अतः सकारात्मक चिंतन करें। दूसरों के दोषों को देखने का विशेष प्रयत्न न करें। फिर भी चलते-फिरते दूसरे व्यक्ति में यदि कोई दोष दिख भी जाए, तो उसकी ओर अधिक ध्यान न दें। यदि सोचना ही हो, तो केवल इतना ही सोचें कि “मुझे सावधान रहना है, इस व्यक्ति का यह दोष कहीं मुझमें न आ जाए.” बस इतना ही सोचें और उस दोष की उपेक्षा करें। दूसरे दोषी व्यक्तियों से द्वेष भी न करें, अन्यथा आपके जीवन में अशांति बहुत बढ़ जाएगी। दूसरों के उत्तम गुणों को देखकर उन्हें अपने जीवन में धारण करने का प्रयत्न करें। इससे आपका जीवन आनन्दमय एवं सफल हो जाएगा।”
हर पल भज मन श्रीराधे गोविन्द…
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