अनूपपुर25जून24*नए कानून BNS, BNSS एवं BSA में सभी के लिए सुलभ और त्वरित न्याय का प्रावधान
अनूपपुर (ब्यूरो राजेश शिवहरे)यूपीआजतक
24 जून 1 जुलाई 2024 से नए आपराधिक कानून – भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम का क्रियान्वयन गृह मंत्रालय, भारत सरकार के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। इन कानूनों का मुख्य लक्ष्य ऐसी आपराधिक न्याय प्रणाली बनाना है जो न केवल नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करती है, बल्कि कानून व्यवस्था को भी और अधिक मजबूत बनाती है जिससे सभी के लिए सुलभ और त्वरित न्याय सुनिश्चित हो। यह सुधार भारत में एक निष्पक्ष, आधुनिक और न्यायपूर्ण कानूनी ढांचे की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस संबंध में सुधीर कुमार सक्सेना पुलिस महानिदेशक मध्य प्रदेश के निर्देशानुसार, प्रशिक्षण शाखा, पुलिस मुख्यालय भोपाल द्वारा नए कानूनों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस संदर्भ में डीसी सागर एडीजीपी शहडोल ज़ोन द्वारा दिनांक 24.06.2024 को अपने कार्यालय में पुलिस के अधिकारियों की बैठक एवं परिचर्चा आयोजित की गई। इस बैठक में सविता सोहाने डीआईजी शहडोल रेंज, अभिषेक दीवान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहडोल, अनुविभागीय पुलिस अधिकारीगण, जिला शहडोल के थाना प्रभारीगण एवं विवेचकगण उपस्थित रहे। इस बैठक के दौरान कुछ प्रमुख धाराओं जैसे – भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173 में संज्ञेय मामलों में इत्तिला, धारा 173(1)(i) : मौखिक, धारा 173(1)(ii): इलेक्ट्रॉनिक संसूचना (e-FIR) परंतु संसूचना देने वाले व्यक्ति को तीन दिन के भीतर उस सूचना पर हस्ताक्षर कर अपनी एफआईआर लेखबद्ध कराने का प्रावधान है, धारा 174 में असंज्ञेय मामलों के बारे में इत्तिला और ऐसे मामलों में अन्वेषण, धारा 176 में अन्वेषण की प्रक्रिया, धारा 176(3) में ऐसे अपराध जिनमें सात साल या इससे अधिक की सजा है, फोरेंसिक साक्ष्य संकलन करना अनिवार्य है। इसी प्रकार, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137 (अपहरण), 64 (बलात्संग), 103 (हत्या) आदि तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) की धारा 23 में पुलिस अफसर से की गई संस्वीकृति आदि धाराओं पर परिचर्चा की गई। समीक्षा के दौरान पुलिस अधिकारियों को निम्नलिखित निर्देश दिए गए :-
1.भारतीय न्याय संहिता-2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम-2023 का अध्ययन कर, समझ कर एवं उपयुक्त जानकारी हासिल करके इन कानूनों का बेहतर क्रियान्वयन एवं अनुपालन सुनिश्चित करें।
2.पुलिस मुख्यालय द्वारा इस संबंध में जो सामग्री दी गई है उसका भी अध्ययन करें और व्यवसायिक दृष्टिकोण से सुदृढ़ बनायें।
3.इन कानूनों का अध्ययन करें, अपने अधीनस्थों को अध्ययन करायें और नए कानूनों की सटीक जानकारी हासिल कर इनके क्रियान्वयन में पारंगत एवं परिष्कृत हों। इस प्रकार, जनता को न्याय दिलाने के लिए उत्कृष्ट पुलिसिंग करें।
4.यदि कोई फरियादी थाने में अपनी फरियाद लेकर आता है तो उसके साथ मानवीय एवं शिष्ट व्यवहार करें और संवेदनशीलता से उसकी शिकायत त्वरित वैधानिक कार्यवाही कर निराकरण करें ताकि फरियादी को न्याय दिलाने में मदद करें।
5.घटना की सूचना मिलने पर तत्काल घटना स्थल पहुँचे, साक्ष्यों को विधिवत् संकलन एवं सुरक्षित करें। फोरेंसिक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से घटना स्थल का निरीक्षण सुनिश्चित करें, फोरेंसिक साक्ष्यों का संकलन एवं सैम्पलिंग कराकर जांच हेतु फोरेंसिक साईंस प्रयोगशाला समयावधि में भेजकर विशेषज्ञ राय प्राप्त करें। विशेषज्ञ राय प्राप्त होने पर उसका अध्ययन करके समुचित कार्यवाही करें और माननीय न्यायालय में प्रकरण के साथ प्रस्तुत करें।
परिचर्चा के दौरान निरीक्षक जयप्रकाश शर्मा, थाना प्रभारी अमलाई द्वारा नए कानून की सटीक एवं उपयुक्त जानकारी दिए जाने पर एडीजीपी डी.सी. सागर द्वारा रुपये 500/- के नगद ईनाम से पुरस्कृत किया गया है और उप निरीक्षक उपेन्द्र त्रिपाठी को बिना हेलमेट के मोटर सायकल चलाते पाये जाने पर थाना यातायात पुलिस शहडोल से रुपये 300/- का चालान कटवाकर रसीद दी गई। बैठक में सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि यातायात के नियमों का पालन सुनिश्चित करें।
नए कानूनों के प्रावधानों के संबंध में जनता में जानकारी विभिन्न रोचक कार्यक्रमों जैसे- प्रश्नोत्तरी, निबंध लेखन, परिचर्चा आदि के माध्यम से थाना स्तर पर शीघ्र आयोजित किए जायेंगे।
मैं पत्थर पर लिखी इबारत हूँ , शीशे से कब तक तोड़ोगे,
मिटने वाला मैं नाम नहीं, तुम मुझको कब तक रोकोगे।

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