कुशीनगर23अप्रैल24*देवरिया लोकसभा चुनाव 2024 में फिर से ब्राह्मण प्रत्याशी उतारे जाने पर वैश्य समाज में भारी आक्रोश
देवरिया लोकसभा चुनाव में एक बार फिर वैश्य समाज के साथ की गई उपेक्षा
साहू अखिलेश दास गुप्ता मोदी
तमकुही राज -देवरिया लोकसभा चुनाव 2024 में देवरिया से एक बार फिर से ब्राह्मण प्रत्याशी को भारतीय जनता पार्टी उतारी है।
2014 से लेकर अभी तक देवरिया लोकसभा सीट भारतीय जनता पार्टी के खाते में रहा है।
इस बार भी ब्राह्मण चेहरा उतारे जाने पर देवरिया लोकसभा चुनाव में वैश्य समाज में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। क्यों की हर बार भारतीय जनता पार्टी वैश्य समाज के साथ उपेक्षा करती आ रही है।
2009 में बहुजन समाज पार्टी ने गोरख प्रसाद जायसवाल पर भरोसा जताई थी जिसका नतीजा ये रहा की गोरख प्रसाद जायसवाल 2009 के लोकसभा चुनाव में रिकार्ड मतों से विजयी हुए थे। जो अपने प्रतिद्वंदी प्रकाश मणि त्रिपाठी व मोहन सिंह व बालेश्वर यादव जैसे लोगो को हराकर सांसद बने थे गोरख प्रसाद जायसवाल
उसके बाद से आज तक हर चुनाव में वैश्य समाज भारतीय जनता पार्टी को समर्थन करते हुए आ रहे हैं लेकिन जब भी टिकट की बात आती है वैश्य समाज जब अपना हक मांगता है तो भारतीय जनता पार्टी हर बार हर चुनाव में वैश्य समाज के साथ सौतेला व्यवहार करती है।इस बार अनुमान वैश्य समाज के लोगो का था की देवरिया लोकसभा चुनाव में पूरा भरोसा था कि इस बार वैश्य समाज से प्रत्याशी को अपना उम्मीदवार भारतीय जनता पार्टी मौका देगी लेकिन वैश्य समाज के लोगो के भरोसे को एक बार फिर से तोड़ने का काम भारतीय जनता पार्टी ने किया जिसके चलते देवरिया सहित विभिन्न विधान सभा में वैश्य समाज का भरी आक्रोश देखने को मिल रहा है जिसका खामियाजा इस बार 2024 में भारतीय जनता पार्टी को चुकाना पड़ सकता है। भारतीय जनता पार्टी कहती हैं सबका साथ सबका विकास की बात करती हैं लेकिन जब वैश्य समाज की हक की बात आती है तब उसके साथ भेदभाव किया जाता है। देवरिया लोकसभ में वैश्य समाज का 26 प्रतिशत संख्या जो 5 लाख 23 हजार वोट होने के बाद भी भारतीय जनता पार्टी बार बार क्यों भेदभाव करती आ रही है। भारतीय जनता पार्टी इस बार पूरे पूर्वांचल में 80 सीट होने के बाद भी मात्र एक टिकट वैश्य समाज को दिया गया है जब नियमत देखा जाए तो 16 सीट वैश्य समाज का हुआ लेकिन मात्र एक टिकट वैश्य समाज को दिए जाने से वैश्य समाज में भारी आक्रोश देखा जा रहा है इस पर भारतीय जनता पार्टी को पुनर्विचार करना चाहिए नही तो पूरे उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को भारी नुकसान हो सकता है।

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