September 30, 2026

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हरिद्वार 30 सितम्बर 26*में 'वोट चोरी' का बड़ा खेल: राहुल गांधी ने उजागर किया दिल्ली के बेला एस्टेट का सच,

हरिद्वार 30 सितम्बर 26*में ‘वोट चोरी’ का बड़ा खेल: राहुल गांधी ने उजागर किया दिल्ली के बेला एस्टेट का सच,

हरिद्वार 30 सितम्बर 26*में ‘वोट चोरी’ का बड़ा खेल: राहुल गांधी ने उजागर किया दिल्ली के बेला एस्टेट का सच,

728 में से 727 वोटरों के नाम गायब

​नई दिल्ली/हरिद्वार: से कालूराम जयपुरिया की रिपोर्ट यूपीआजतक 

नई दिल्ली / हरिद्वार*लोकतंत्र की सबसे बड़ी और मूल ताकत एक आम नागरिक का वोट होता है। संविधान ने देश के हर वयस्क नागरिक को यह अधिकार दिया है कि वह अपनी सरकार खुद चुने। लेकिन क्या हो जब सिस्टम ही गुपचुप तरीके से नागरिकों से उनका यह संवैधानिक अधिकार छीन ले? देश की राजधानी दिल्ली से एक ऐसा ही चौंकाने वाला, गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसने पूरी चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूचियों के प्रबंधन और प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने जमीनी स्तर पर चल रहे इस ‘वोट चोरी’ के कथित खेल का बड़ा पर्दाफाश किया है। यह मामला दिल्ली में यमुना किनारे बसे ‘बेला एस्टेट’ इलाके का है,वोट चोरी’ का बड़ा खेल

जहां के आंकड़े किसी भी लोकतंत्र प्रेमी को हैरान कर देने वाले हैं।

​बेला एस्टेट का हैरान करने वाला सच: एक झटके में उड़े 727 नाम

यमुना नदी के किनारे स्थित बेला एस्टेट में रहने वाले लोग मुख्य रूप से गरीब, मजदूर और समाज के हाशिए पर रहने वाले वर्ग से आते हैं। प्राप्त जानकारी और उजागर किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस इलाके की मतदाता सूची में पहले कुल 728 लोगों के नाम दर्ज थे। लेकिन जब नई सूची सामने आई, तो एक ऐसा सच सामने आया जिस पर यकीन करना मुश्किल है। 728 में से 727 लोगों के नाम वोटर लिस्ट से बेरहमी से काट दिए गए हैं। पूरी बस्ती में अब सिर्फ एक ही व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में बचा है।

​सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन 727 लोगों के नाम काटे गए हैं, वे कोई ‘फर्जी’ वोटर नहीं थे और न ही वे कहीं बाहर से आए थे। इन लोगों ने बाकायदा 2024 के लोकसभा चुनावों और 2025 के चुनावों में अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। उनके पास चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए वोटर आईडी कार्ड मौजूद हैं और उनकी उंगलियों पर लगी स्याही के निशान भी अभी ज्यादा पुराने नहीं हुए हैं। महज कुछ ही समय के भीतर ऐसा क्या हुआ कि रातों-रात 727 लोग मतदाता सूची से वाष्प हो गए? क्या यह किसी तकनीकी खामी का नतीजा है या फिर एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा?

​चुनाव आयोग (CEC) के नियमों की खुलेआम अनदेखी

इस पूरे प्रकरण में सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात निचले स्तर का प्रशासनिक रवैया है। खुद देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) कई बार सार्वजनिक मंचों से यह स्पष्ट कर चुके हैं कि देश के हर नागरिक को वोट देने का अधिकार है, चाहे उसके पास पक्की छत हो या वह खुले आसमान के नीचे रहता हो। चुनाव आयोग के बिल्कुल स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि बेघर (Homeless) लोगों को भी मतदाता सूची में शामिल किया जाना अनिवार्य है। नियमों के तहत ऐसे नागरिकों के पते के रूप में ‘House No. 0’ (मकान नंबर 0) दर्ज किया जाता है, ताकि वे मतदान के अधिकार से वंचित न रहें।

​जब देश की सबसे बड़ी चुनाव संस्था के नियम इतने स्पष्ट हैं, तो फिर बेला एस्टेट के इन 727 वोटरों के नाम किस आधार पर और किस नियम के तहत काटे गए? क्या इसके लिए कोई ग्राउंड सर्वे किया गया था? क्या इन गरीब नागरिकों को नाम काटने से पहले कोई कारण बताओ नोटिस दिया गया? ये वो सवाल हैं जिनका जवाब अब स्थानीय प्रशासन और चुनाव अधिकारियों को देना भारी पड़ रहा है।

​राहुल गांधी का जमीनी संघर्ष और राष्ट्रव्यापी आह्वान

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस गंभीर मुद्दे को सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस या बयानों तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि उन्होंने इसे सीधे तौर पर जनता के अधिकारों की रक्षा की लड़ाई बना दिया है। राहुल गांधी का स्पष्ट मानना है कि यह केवल बेला एस्टेट या दिल्ली के एक छोटे से इलाके का स्थानीय मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे भारत में हर नागरिक के वोट देने के अधिकार पर हो रहा एक बड़ा प्रहार है। आज जो बेला एस्टेट में हुआ है, कल वह देश के किसी भी राज्य, शहर या गांव में हो सकता है।

​कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए ‘एक्शन प्लान’: अब चुप नहीं बैठना है

राहुल गांधी की इस पहल के बाद, कांग्रेस पार्टी ने अपने सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए एक कड़ा संदेश और विस्तृत एक्शन प्लान जारी किया है। पार्टी का साफ कहना है कि अब हर कांग्रेस नेता, ब्लॉक अध्यक्ष और बूथ स्तर के कार्यकर्ता को राहुल जी के साथ इस मुहिम में जुड़ना होगा।

​अब समय आ गया है कि कांग्रेस का हर सिपाही इस लड़ाई को अपने-अपने शहर, अपनी विधानसभा और अपने पोलिंग बूथ तक लेकर जाए। कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की बारीकी से जांच करें। जिन भी लोगों के नाम गलत तरीके से काटे गए हैं, उन्हें खोज निकालें। चुनाव अधिकारियों (BLO, SDM आदि) के दफ्तरों का घेराव करें और उनसे लिखित में सवाल पूछें। इस पूरी प्रक्रिया और अधिकारियों के जवाबों के वीडियो और सबूत रिकॉर्ड किए जाएं। सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मों का हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हुए इस ‘वोट चोरी’ के सच को पूरी दुनिया के सामने लाया जाए।

​निष्कर्ष

वोट चोरी का यह खेल अब और नहीं चलेगा। बेला एस्टेट की घटना ने एक चिंगारी का काम किया है। अगर देश के नागरिकों का वोट ही सुरक्षित नहीं है, तो फिर लोकतंत्र के क्या मायने रह जाते हैं? राहुल गांधी के नेतृत्व में शुरू हुई यह लड़ाई अब सड़कों से लेकर सोशल मीडिया और चुनाव आयोग के दफ्तरों तक लड़ी जाएगी, ताकि अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का अधिकार सुनिश्चित किया जा सके।

​विशेष रिपोर्टिंग:कालूराम जयपुरिया, हरिद्वार यूपीआजतक –

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