सुल्तानपुर 10सितंबर 26**दो जिलों की सीमा में फंसी 29 ग्राम पंचायतें, जनता पूंछ रही , आखिर हमारा प्रशासन कौन ?..*
*सुल्तानपुर में तहसील-खंड, अमेठी में लोक सभा-विधानसभा, वर्षों की सीमा-उलझन से विकास और जन सुनवाई पर उठे सवाल*
*सुल्तानपुर लोकसभा में वापसी की मांग तेज, समाज सेवियों ने लखनऊ हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधि वक्ताओं से की चर्चा*
*बल्दीराय/सुल्तानपुर*सरकारी नक्शे पर खिंची प्रशासनिक और राजनीतिक सीमाएं हलियापुर क्षेत्र की 29 ग्राम पंचायतें ग्रामीणों के लिए वर्षों से ऐसी उलझन बनी हुई हैं, जिसका असर अब सीधे जनसुविधाओं और विकास कार्यों पर दिखाई देने की बात सामने आ रही है। स्थिति यह है कि ये ग्राम पंचायतें तहसील और विकासखंड बल्दीराय, जनपद सुल्तानपुर में आती हैं, जबकि इनका लोकसभा क्षेत्र अमेठी और विधानसभा क्षेत्र जगदीशपुर से जुड़ाव है।
यानी गांव सुल्तानपुर में, तहसील-खंड सुल्तानपुर में, लेकिन राजनीतिक प्रतिनिधित्व दूसरे जिले से है । यही भौगोलिक और राजनीतिक विसंगति अब ग्रामीणों के बीच बड़ा सवाल बनती जा रही है— *🔥बड़ा सवाल –जब हमारी रोजमर्रा की प्रशासनिक जरूरतें सुल्तानपुर से जुड़ी हैं, तो हमारी राजनीतिक आवाज दूसरी दिशा में क्यों ?…*
*🔥एक समस्या, कई दरवाजे , कहां जाए आम आदमी ?..*
👉स्थानीय समाजसेवी धनंजय सिंह, इंद्र बहादुर सिंह और प्रभात सिंह का कहना है कि वर्षों से चलीव आ रही इस स्थिति के कारण सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व और विकास कार्यों से जुड़े मामलों में समन्वय की समस्या महसूस होती है। ग्रामीणों का कहना है कि किसी समस्या के समाधान के लिए संबंधित विभाग, प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि तक पहुंच बनाने में ही कई बार भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है।
वेद प्रताप सिंह, रणविजय सिंह, अखण्ड प्रताप सिंह उर्फ गब्बर सिंह, नीरज तिवारी, जवाहर यादव, जिला पंचायत सदस्य नरेशचंद्र उपाध्याय, रमाशंकर शुक्ल और डॉ. अजय पासवान समेत क्षेत्र के अन्य लोगों ने इस मुद्दे को लेकर सामूहिक रूप से आगे की रणनीति तैयार करने की बात कही है।
*मामला अब कानूनी विमर्श तक पहुंचा*
क्षेत्रीय समाजसेवियों ने इस सीमा संबंधी समस्या को लेकर लखनऊ हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं से भी चर्चा की है। उनका कहना है कि समस्या के संवैधानिक, प्रशासनिक और परिसीमन संबंधी पहलुओं को समझने के बाद ही आगे की रणनीति बनाई जाएगी। हालांकि, अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही संभव होगा।
*सुल्तानपुर लोकसभा में वापसी की मांग ने पकड़ा जोर*
इसी बीच 29 ग्राम पंचायतों को पुनः सुल्तानपुर लोकसभा क्षेत्र से जोड़ने की मांग जोर पकड़ने लगी है। समर्थकों का कहना है कि यह किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विरोध का मुद्दा नहीं, बल्कि क्षेत्र की प्रशासनिक सुविधा, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और विकास की बेहतर निगरानी से जुड़ा जनसरोकार है।
👉विपिन सिंह का कहना है कि प्रशासनिक सीमाओं और राजनीतिक क्षेत्रों के बीच बेहतर सामंजस्य होने से आम जनता के लिए शिकायतों के निस्तारण और विकास कार्यों की निगरानी की प्रक्रिया अधिक सरल हो सकती है।
*🔥सीमाएं जनता के लिए हैं या जनता सीमाओं के लिए ?…*
लोकतांत्रिक व्यवस्था में सीमांकन का उद्देश्य शासन और प्रशासन को जनता के करीब लाना है। लेकिन यदि सीमाओं की विसंगति आम नागरिक को अपनी समस्या लेकर अलग-अलग स्तरों पर भटकने को मजबूर करे, तो उस व्यवस्था की समीक्षा की मांग उठना स्वाभाविक है।
*🔥अब सवाल केवल सीमांकन बदलने का नहीं, बल्कि जवाब देही स्पष्ट करने का है। 29 ग्राम पंचायतों के ग्रामीण चाहते हैं कि उनकी प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्था ऐसी हो, जिसमें उन्हें यह तय करने में समय न गंवाना पड़े कि उनकी समस्या लेकर किस दरवाजे पर जाएं।*
*🔥गांव एक समस्या एक ,तो समाधान की व्यवस्था भी एक और स्पष्ट क्यों नहीं ?…* यही सवाल अब हलियापुर क्षेत्र से उठ रहा है और देखना होगा कि शासन-प्रशासन तथा जनप्रतिनिधि इस वर्षों पुरानी समस्या पर कब गंभीरता से पहल करते हैं।

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