01नवम्बर23*इजरायल-हमास जंग में कूदा आतंकी संगठन हूती, जानें यहूदी देश के लिए कितना बड़ा खतरा
इजरायल-हमास युद्ध को 25 दिन बीत चुके हैं. इस युद्ध में हमास के अलावा लेबनान का आतंकी संगठन हिजबुल्लाह पहले से ही मौजूद हैं, जो इजरायली सेना पर हमला बोल रहे हैं.
वहीं इस जंग में तीसरे मोर्चे ने भी एंट्री की है. ये हैं यमन का चरमपंथी संगठन हूती. हूती विद्रोहियों ने एक बयान जारी करके जंग का ऐलान किया है. हूती विद्रोहियों की सरकार के प्रधानमंत्री अजीज बिन हबूतर ने कहा कि हम अपने लोगों को गाजा में मरने के लिए नहीं छोड़ सकते.
हूति विद्रोहियों ने धमकी देते हुए कहा कि अगर गाजा में सीजफायर नहीं हुआ तो वे इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला करेंगे. आपको बता दें आतंकी संगठन हूती ने साल 2014 में यमन की राजधानी समेत देश के कई भागों पर कब्जा जमाया हुआ है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हूती समूह के प्रवक्ता याह्या सरिया के अनुसार, हवाई हमले गाजा के लोगों के लिए धार्मिक, नैतिक, मानवीय राष्ट्रीय जिम्मेदारी की भावना को लेकर किए गए. ये इजरायली बमबारी के कारण मानवीय संकट से जूझ रहे हैं. यरुशलम में सोमवार को पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान पर यमन से इजराइल पर सटीक-निर्देशित मिसाइलें लॉन्च करने की तैयारी का आरोप लगाया था.
जानें कब से सक्रिय हैं हूती
हूतियों का उदय 1980 के दशक में यमन में हुआ था. यह शिया मुस्लिमों का बड़ा संगठन माना जाता है. उस दौरान आतंकी संगठन हूती अब्दुलाह सालेह की आर्थिक नीतियों से खफा थे. इस कारण यमन के उत्तरी क्षेत्र में असमानता ज्यादा बढ़ गई. इसके बाद साल 2000 में हूतियों ने नागरिक सेना तैयार कर ली. हूतियों ने वर्ष 2004 से 2010 के बीच लंबा युद्ध छेड़ा. इस बीच अब्दुल्लाह सालेह की सेना से उसके कुल छह युद्ध हुए. साल 2011 में अरब के हस्तक्षेप के कारण यह युद्ध रुक गया. यहां पर करीब दो वर्ष तक बातचीत होती रही. मगर किसी तरह का कोई हल नहीं निकला।
- इस जंग में तीसरे मोर्चे ने भी एंट्री की है
- हूतियों का उदय 1980 के दशक में यमन में हुआ था
- 2014 में यमन के कई भागों पर कब्जा जमाया

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