July 7, 2026

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सुल्तानपुर7जुलाई26*मुख्यमंत्री के आगमन से पहले बड़ा सवाल: क्या 'जुगाड़ के लाइसेंस' पर चल रहा है ख्वाजा हॉस्पिटल?*

सुल्तानपुर7जुलाई26*मुख्यमंत्री के आगमन से पहले बड़ा सवाल: क्या ‘जुगाड़ के लाइसेंस’ पर चल रहा है ख्वाजा हॉस्पिटल?*

सुल्तानपुर7जुलाई26*मुख्यमंत्री के आगमन से पहले बड़ा सवाल: क्या ‘जुगाड़ के लाइसेंस’ पर चल रहा है ख्वाजा हॉस्पिटल?*

*राहुल चौराहे पर संचालित अस्पताल की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर प्रश्न, स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था भी कटघरे में*

 

सुल्तानपुर। जनपद में मुख्यमंत्री के प्रस्तावित आगमन के बीच स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता और निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। राहुल चौराहे के निकट संचालित ख्वाजा हॉस्पिटल एवं उससे जुड़े प्रतिष्ठान को लेकर स्थानीय नागरिकों, सूत्रों और क्षेत्रीय चर्चाओं में कई प्रकार की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिनकी निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है।
सूत्रों के अनुसार अस्पताल के संचालन, चिकित्सकीय व्यवस्थाओं तथा वैधानिक मानकों के पालन को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि अस्पताल में निर्धारित मानकों के अनुरूप संसाधनों, विशेषज्ञ चिकित्सकों और आवश्यक व्यवस्थाओं का अभाव है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि किसी सक्षम प्राधिकारी की जांच रिपोर्ट से नहीं हुई है और संबंधित प्रबंधन का पक्ष प्राप्त होना अभी शेष है।
नियमित चिकित्सकों की उपलब्धता पर सवाल
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में नियमित रूप से पंजीकृत विशेषज्ञ चिकित्सकों की मौजूदगी को लेकर संदेह बना हुआ है। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि अस्पताल संचालन से जुड़े व्यक्तियों द्वारा चिकित्सकीय प्रक्रियाओं में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप किया जाता है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, इसलिए इनकी सत्यता केवल विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

*भवन, पार्किंग और मानकों पर उठे प्रश्न*

स्थानीय नागरिकों के अनुसार अस्पताल परिसर में पार्किंग, आपातकालीन सुविधाएं, स्वच्छता व्यवस्था और अन्य आवश्यक मानकों की स्थिति की भी जांच आवश्यक है। लोगों का कहना है कि यदि किसी निजी चिकित्सालय को लाइसेंस जारी किया गया है तो यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वह शासन द्वारा निर्धारित सभी मानकों का पालन कर रहा हो।

*गंभीर आरोपों की जांच जरूरी*

कुछ सूत्रों द्वारा भ्रूण लिंग परीक्षण एवं भ्रूण हत्या जैसे अत्यंत गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। लेकिन अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट, प्राथमिकी अथवा सक्षम प्राधिकारी द्वारा सार्वजनिक रूप से पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे मामलों में तथ्यों की पुष्टि केवल वैधानिक जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही संभव है।
मुख्यमंत्री के दौरे के बीच स्वास्थ्य विभाग पर नजर
मुख्यमंत्री के जनपद आगमन के दौरान यह सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है कि क्या स्वास्थ्य विभाग जिले में संचालित निजी अस्पतालों की नियमित निगरानी कर रहा है? यदि शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं तो क्या उनका सत्यापन कराया गया? क्या संबंधित अस्पतालों का हालिया निरीक्षण हुआ?
और यदि अनियमितताएं पाई जाती हैं तो क्या कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी?

*यश न्यूज़ के पांच सवाल*

क्या ख्वाजा हॉस्पिटल निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित हो रहा है?

क्या अस्पताल में पंजीकृत चिकित्सकों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित है?

क्या हाल के वर्षों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्पताल का निरीक्षण किया गया?

क्या लगाए जा रहे गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी?

क्या मानकों के विपरीत संचालित संस्थानों के विरुद्ध कार्रवाई होगी?

मुख्यमंत्री के आगमन के बीच जनमानस की अपेक्षा है कि स्वास्थ्य विभाग इन उठते सवालों का संज्ञान लेते हुए तथ्यों की जांच कर पारदर्शी रिपोर्ट सार्वजनिक करे, ताकि जनता का भरोसा स्वास्थ्य व्यवस्था पर बना रह सके।

Taza Khabar