July 31, 2026

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सुल्तानपुर31जुलाई26*आठवीं तक मान्यता, इंटर तक पढ़ाई का आरोप! आखिर किसके संरक्षण में चल रहा हसनपुर मे 'मकसूद एजुकेशनल ग्रामर जूनियर हाई स्कूल'?*

सुल्तानपुर31जुलाई26*आठवीं तक मान्यता, इंटर तक पढ़ाई का आरोप! आखिर किसके संरक्षण में चल रहा हसनपुर मे ‘मकसूद एजुकेशनल ग्रामर जूनियर हाई स्कूल’?*

सुल्तानपुर31जुलाई26*आठवीं तक मान्यता, इंटर तक पढ़ाई का आरोप! आखिर किसके संरक्षण में चल रहा हसनपुर मे ‘मकसूद एजुकेशनल ग्रामर जूनियर हाई स्कूल’?*

*पेड़ों के नीचे लग रही कक्षाएं, बुनियादी सुविधाओं का अभाव; शिक्षा विभाग और अल्पसंख्यक विभाग की भूमिका पर उठे सवाल*

*देवेंद्र ठाकुर*
सुलतानपुर। शिक्षा के नाम पर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ का एक गंभीर मामला सामने आया है। कोतवाली देहात क्षेत्र के हसनपुर स्थित मकसूद एजुकेशनल ग्रामर जूनियर हाई स्कूल को लेकर स्थानीय लोगों ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि विद्यालय की मान्यता केवल कक्षा 8 तक है, लेकिन यहां इंटरमीडिएट स्तर तक पढ़ाई कराई जा रही है। इस दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और इसकी जांच आवश्यक है।
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि विद्यालय में पर्याप्त कक्षाओं का अभाव है और कई बार बच्चों को पेड़ों के नीचे या खुले स्थान पर बैठाकर पढ़ाया जाता है। यदि ऐसा है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह व्यवस्था सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम शैक्षणिक मानकों के अनुरूप है?
आरोप यह भी हैं कि विद्यालय में स्वच्छ पेयजल, पर्याप्त शौचालय, समुचित कक्षाएं, कार्यालय और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। यदि ये आरोप सही हैं, तो यह केवल नियमों के उल्लंघन का नहीं बल्कि बच्चों के सुरक्षित और सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण से जुड़े अधिकारों का भी मामला है।
विद्यालय प्रबंधन के अनुसार परिसर में मदरसे की शिक्षा भी दी जाती है। ऐसे में यह आवश्यक है कि संबंधित विभाग यह स्पष्ट करें कि परिसर में संचालित सभी शैक्षणिक गतिविधियां आवश्यक मान्यताओं और नियमों के अनुरूप हैं या नहीं। यदि किसी विभाग से अनुमति प्राप्त है, तो उसकी स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि वर्षों से ऐसी शिकायतें उठ रही हैं, तो बेसिक शिक्षा विभाग, जिला विद्यालय निरीक्षक, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग और जिला प्रशासन ने अब तक व्यापक निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की?
स्थानीय लोगो की मांग है जिला प्रशासन एक संयुक्त जांच समिति गठित कर विद्यालय की मान्यता, संचालित कक्षाओं, आधारभूत सुविधाओं, छात्र सुरक्षा, शिक्षकों की योग्यता और लागू सरकारी मानकों की निष्पक्ष जांच कराए। यदि सभी नियमों का पालन हो रहा है तो स्थिति सार्वजनिक की जाए, और यदि अनियमितताएं पाई जाती हैं तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सबसे बड़ा सवाल यह नहीं कि स्कूल चल रहा है, बल्कि यह है कि क्या वहां पढ़ने वाले बच्चों को वही सुविधाएं और वैध शिक्षा मिल रही है, जिसकी गारंटी कानून और सरकारी नियम देते हैं?

शेष अगले अंक मे——-

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