July 3, 2026

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सिद्धार्थनगर3जुलाई26*लापरवाही*शिक्षकों की कमी से हांफ रहे 28 राजकीय विद्यालय*

सिद्धार्थनगर3जुलाई26*लापरवाही*शिक्षकों की कमी से हांफ रहे 28 राजकीय विद्यालय*

प्रवक्ताओं, सहायक अध्यापकों की कमी से पढ़ाई लड़खड़ाई

– चार स्कूलों को छोड़कर स्थाई प्रधानाचार्य तक नहीं

– शिक्षकों की कमी से नामांकन की स्थिति भी संतोषजनक नहीं

*सिद्धार्थनगर, निज संवाददाता।*

प्रवक्ताओं, सहायक अध्यापकों की कमी से जिले के 28 राजकीय माध्यमिक विद्यालय हाफ रहे हैं।

इसमें से सिर्फ चार राजकीय स्कूलों को छोड़ अन्य में स्थाई प्रधानाचार्य तक नहीं है।

आधे से अधिक राजकीय स्कूलों में बड़ी तादाद में शिक्षक ही नहीं है। शिक्षकों की कमी से नामांकन की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है।

जिले में 28 राजकीय माध्यमिक विद्यालय संचालित है।यहां की शैक्षणिक गतिविधियां भगवान भरोसे हैं।

सुविधाओं से लैस इन विद्यालयों में सिर्फ शिक्षकों की कमी ही है।इससे इन स्कूलों में चाहकर भी बच्चों की संख्या नहीं बढ़ पा रही है।

विभागीय जानकारों के मुताबिक जिले के चार राजकीय इंटर कॉलेज *नौगढ़, इनरीग्रांट, परसा जमाल, पचमोहनी* में ही स्थाई प्रधानाचार्य हैं।

शेष 24 में प्रभारी प्रधानाचार्यों, प्रधानाध्यापकों के भरोसे ही संचालित है।

राजकीय इंटर कॉलेज इनरीग्रांट में सात,

राजकीय इंटर कॉलेज करुआ, पजौहा, दुल्हा सुमाली में 17-17 पद खाली हैं।

दुल्हा सुमाली में पांच तो करुआ, पजौहा में एक-एक शिक्षकों को संबद्ध करके शैक्षणिक कार्य कराया जा रहा है।

राजकीय इंटर कॉलेज पचमोहनी में छह,

राजकीय इंटर कॉलेज नौगढ़ में सात,

राजकीय कन्या इंटर कॉलेज बांसी में नौ,

राजकीय कन्या इंटर कॉलेज परसा जमाल में 10,

जीजीआईसी डुमरियागंज में आठ,

जीजीआईसी तेतरी बाजार में नौ,

राजकीय उमावि धोबहा में सात,

बहोरवां में तीन, बसौनी में दो, कठेला ग्रांट, कोड़राग्रांट, कूड़ी, मटियरिया में तीन-तीन, मसिना खास में चार पद खाली चल रहे हैं।

धोबहा और मुड़िला बक्शी में एक-एक शिक्षक को संबद्ध कर किसी तरह से विद्यालय संचालित किया जा रहा है।

इसी प्रकार भरवटिया में दो, ऊंचडीह में चार,अमौना पांडेय,नीबी मकडौर में तीन-तीन,टड़िया,अतरमूनानकार व नागचौरी में पांच-पांच शिक्षकों के पद खाली चल रहे हैं।

*सुविधाएं मौजूद पर शिक्षकों की है कमी*

जिले के सभी 28 राजकीय विद्यालयों में संसाधनों की कमी नहीं है।

प्रोजेक्ट अलंकार के तहत सुसज्जित पुस्तकालय, बाउंड्रीवाल, लैब, शौचालय, शुद्ध पेयजल व्यवस्था आदि की सुविधाएं हो चुकी हैं या अंतिम चरण में पूर्ण होने की कगार पर हैं।

इसके बावजूद शिक्षकों की कमी से क्षेत्रीय अभिभावकों का इन स्कूलों के प्रति आकर्षण नहीं बढ़ पा रहा है।

जहां एक शिक्षक हैं, वहां की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

नामांकन के लिए गांव में भ्रमण करें या स्कूल में कई कक्षाओं के बच्चों को एक साथ पढाए।

“राजकीय विद्यालयों में स्वीकृत प्रवक्ता एवं सहायक अध्यापकों के सापेक्ष तैनाती पूर्ण नहीं है।

इसके लिए समय-समय पर अधियाचन भेजा जा रहा है। तैनाती उच्च स्तर से ही संभव है।

जिले में मौजूदा मानव संसाधन में बेहतर शैक्षणिक माहौल करने के लिए हर स्तर पर प्रयास किया जाएगा।”

– *अरुण कुमार,*
जिला विद्यालय निरीक्षक