October 9, 2026

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हरिद्वार 9 अक्टूबर 26*व्यापार आयोग की ट्रस्टी संगीता बंसल से खास बातचीत: नाम के पीछे की सोच और समाज सेवा का संकल्प

हरिद्वार 9 अक्टूबर 26*व्यापार आयोग की ट्रस्टी संगीता बंसल से खास बातचीत: नाम के पीछे की सोच और समाज सेवा का संकल्प

हरिद्वार 9 अक्टूबर 26*व्यापार आयोग की ट्रस्टी संगीता बंसल से खास बातचीत: नाम के पीछे की सोच और समाज सेवा का संकल्प

​हरिद्वार (विशेष संवाददाता, पदम सिंह, यूपीआजतक):

हरिद्वार *धर्मनगरी हरिद्वार में सामाजिक सरोकारों और जनहित के मुद्दों को लेकर कार्यरत संस्थाओं के बीच ‘व्यापार आयोग’ ट्रस्ट आज एक विशिष्ट पहचान के रूप में उभर रहा है। संस्था के नाम को लेकर अक्सर लोगों में यह जिज्ञासा रहती है कि क्या यह मंच मात्र व्यापारियों और उद्योग जगत तक सीमित है, या इसके उद्देश्य इससे कहीं अधिक व्यापक हैं? इसी संदर्भ में यूपीआजतक के संवाददाता पदम सिंह ने ‘व्यापार आयोग’ की ट्रस्टी श्रीमती संगीता बंसल से एक विस्तृत और विशेष साक्षात्कार किया। इस बातचीत में उन्होंने ट्रस्ट के नामकरण के पीछे की दूरगामी सोच, संस्था के गठन के मूल उद्देश्यों और समाज के विभिन्न वर्गों के उत्थान के लिए चलाए जा रहे कल्याणकारी अभियानों पर खुलकर चर्चा की।

​‘व्यापार आयोग’ नामकरण के पीछे का विज़न

​साक्षात्कार की शुरुआत में जब संगीता बंसल जी से यह पूछा गया कि संस्था का नाम ‘व्यापार आयोग’ क्यों चुना गया, तो उन्होंने बहुत ही सहज और स्पष्ट भाव से इसकी पृष्ठभूमि साझा की। उन्होंने बताया कि हमारे देश में विभिन्न वर्गों, पेशों और सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए समय-समय पर अनेक आयोगों और परिषदों का गठन किया गया है। सरकारी और गैर-सरकारी स्तर पर महिला आयोग, बाल अधिकार संरक्षण आयोग, मानवाधिकार आयोग और पिछड़ा वर्ग आयोग जैसी कई संस्थाएं सक्रिय हैं।

​किंतु, देश की आर्थिकी और आम जनजीवन की जीवनरेखा माने जाने वाले ‘व्यापार’ के नाम से किसी ऐसे समर्पित और स्वतंत्र मंच या आयोग का गठन नहीं था, जो कारोबार के साथ-साथ मानवीय मूल्यों को भी जोड़े। इसी महत्वपूर्ण आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ट्रस्ट का नाम ‘व्यापार आयोग’ रखा गया। संगीता बंसल ने जोर देकर कहा कि नाम भले ही व्यापार आयोग है, लेकिन इसका ध्येय केवल आर्थिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के हर उपेक्षित और जरूरतमंद वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ना इसका प्रमुख लक्ष्य है।

​समाज सेवा के विभिन्न आयाम: बुजुर्गों और अनाथों को सहारा

​संगीता बंसल ने साक्षात्कार के दौरान ट्रस्ट द्वारा संचालित विविध सामाजिक प्रकल्पों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कोई भी समाज तब तक समृद्ध नहीं हो सकता, जब तक उसके वरिष्ठ नागरिक और बेसहारा बच्चे सुरक्षित व सम्मानित महसूस न करें।

​ट्रस्ट द्वारा बुजुर्गों के कल्याण के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनमें उनके स्वास्थ्य की देखभाल, नियमित स्वास्थ्य जांच शिविर और भावनात्मक सहयोग शामिल हैं। इसके साथ ही, अनाथ और निराश्रित बच्चों के संरक्षण, उनके पोषण तथा उनके सुरक्षित भविष्य के निर्माण के लिए भी संस्था सतत प्रयासरत है। ट्रस्ट का मानना है कि इन बच्चों को सही दिशा और संस्कार देकर समाज का सशक्त नागरिक बनाया जा सकता है।

​‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और बालिकाओं की शिक्षा को प्राथमिकता

​ट्रस्ट की सबसे प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का राष्ट्रीय संकल्प है। संगीता बंसल ने बताया कि आर्थिक तंगी के कारण अक्सर होनहार बेटियां पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर हो जाती हैं। व्यापार आयोग ट्रस्ट ने इस समस्या को गंभीरता से लिया है।

​ट्रस्ट की ओर से गरीब, असहाय और वंचित परिवारों की बालिकाओं की शिक्षा का पूरा खर्च उठाया जाता है। इसमें स्कूल की फीस, किताबें, यूनिफॉर्म से लेकर उच्च शिक्षा तक के लिए जरूरी आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। संगीता जी ने कहा, “जब एक बेटा पढ़ता है तो एक व्यक्ति शिक्षित होता है, लेकिन जब एक बेटी पढ़ती है तो पूरा परिवार और आने वाली पीढ़ियां शिक्षित होती हैं। इसलिए हमारी पूरी कोशिश रहती है कि कोई भी बेटी पैसों के अभाव में अशिक्षित न रहे।”

​महिला सशक्तिकरण और श्रमिक कल्याण

​महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से ट्रस्ट द्वारा विभिन्न कौशल विकास और स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। घरेलू महिलाओं को सिलाई, हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

​वहीं दूसरी ओर, समाज की बुनियादी संरचना को खड़ा करने वाले श्रमिक वर्ग के अधिकारों और उनकी भलाई के लिए भी ट्रस्ट अग्रसर है। असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देना, उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा और संकट के समय आपातकालीन सहायता मुहैया कराना ट्रस्ट के नियमित कार्यों में शामिल है।

​अधिवक्ताओं का सहयोग और विधिक सहायता

​संगीता बंसल ने बताया कि न्याय को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए वकीलों और विधिक विशेषज्ञों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। ट्रस्ट ने अपने साथ प्रबुद्ध अधिवक्ताओं का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया है। इसके माध्यम से ऐसे निर्धन और बेसहारा लोगों को मुफ्त कानूनी सलाह और सहायता उपलब्ध कराई जाती है, जो आर्थिक मजबूरी के चलते न्यायालयों में अपने अधिकारों की रक्षा नहीं कर पाते।

​निष्कर्ष: सकारात्मक बदलाव की ओर बढ़ता कदम

​साक्षात्कार के अंत में श्रीमती संगीता बंसल ने कहा कि व्यापार आयोग ट्रस्ट का संकल्प समाज में सकारात्मक और स्थायी बदलाव लाना है। जब उद्योग, व्यापार और समाज सेवा एक मंच पर आते हैं, तो राष्ट्र निर्माण का मार्ग प्रशस्त होता है।

​हरिद्वार से यूपीआजतक की इस खास बातचीत से यह साफ हुआ कि ‘व्यापार आयोग’ अपने नाम से परे हटकर जन-कल्याण, शिक्षा, नारी उत्थान और मानवीय संवेदनाओं को समर्पित एक ऐसा संगठन बन चुका है, जिसकी गूंज और असर धरातल पर स्पष्ट दिखाई दे रहा है।

​ब्यूरो रिपोर्ट: पदम सिंह, हरिद्वार

विशेष कवरेज: यूपीआजतक

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