ललितपुर14जून25*पुलिस की लापरवाही की शर्मनाक मिसाल।
जेल भेजा जा रहा आरोपी खुद चला रहा बाइक, पीछे बैठा पुलिसकर्मी।
ललितपुर, उत्तर प्रदेश। पुलिस विभाग की लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये की एक और शर्मनाक तस्वीर ललितपुर जिले से सामने आई है, जहां एक वायरल वीडियो ने पुलिस की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक आरोपी, जिसे जेल भेजा जा रहा था, खुद मोटरसाइकिल चला रहा है और उसके पीछे वर्दीधारी पुलिसकर्मी बिना किसी आपत्ति के आराम से बैठा है।
इस असामान्य दृश्य को देखकर हर कोई हैरान है – आखिर एक आरोपी को मोटरसाइकिल चलाने की अनुमति कैसे दी गई?
📸 वीडियो वायरल, जनता में आक्रोश
इस घटना का वीडियो किसी राहगीर ने मोबाइल से रिकॉर्ड कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
वीडियो सामने आने के बाद लोगों में भारी आक्रोश है और सभी एक ही सवाल पूछ रहे हैं –
“अगर आरोपी रास्ते में फरार हो जाता, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती?”
❗ पुलिस की लापरवाही: न हथकड़ी, न पुलिस वाहन
आमतौर पर आरोपी को जेल ले जाते समय उसे पुलिस वाहन में सख्त सुरक्षा के बीच भेजा जाता है, लेकिन इस मामले में:
न कोई हथकड़ी लगाई गई
न कोई सुरक्षा घेरा
न ही कोई पुलिस वाहन का इस्तेमाल
बल्कि उल्टा आरोपी को बाइक चलाने दी गई और पुलिसकर्मी मूकदर्शक बना उसके पीछे बैठा रहा।
👁️🗨️ जनता का सवाल – ये मजाक है या प्रशासनिक भ्रष्टाचार?
वीडियो को लेकर लोग कह रहे हैं कि अगर यही हालात बने रहे तो अपराधी कानून का मजाक उड़ाते रहेंगे और पुलिस मूकदर्शक बनी रहेगी।
जनता का कहना है कि ये ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के खिलाफ है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
🗣️ पुलिस मौन, लेकिन विभागीय जांच की उम्मीद
घटना के वायरल होने के बाद स्थानीय पुलिस कुछ भी कहने से बच रही है।
हालांकि सूत्रों की मानें तो वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इस वीडियो की जांच के लिए विभागीय स्तर पर मंथन कर रहे हैं।
कुछ ही घंटों में इस पर कार्रवाई हो सकती है।
📢 हमारी मांग – जवाबदेही तय हो, लापरवाह अफसरों पर हो कड़ी कार्रवाई
आरोपी को बाइक चलाने की अनुमति देने वाले पुलिसकर्मी की पहचान कर निलंबन हो
वीडियो की जांच कर पूरी प्रक्रिया का विश्लेषण किया जाए
ऐसे मामलों के लिए सख्त दिशानिर्देश जारी हों ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो
📌 ललितपुर की यह घटना बताती है कि कई बार कानून की रक्षा करने वाले ही उसे ताक पर रख देते हैं। ज़रूरत है सख्त व्यवस्था और पारदर्शिता की, जिससे जनता का भरोसा बरकरार रह सक

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