October 4, 2026

UPAAJTAK

TEZ KHABAR, AAP KI KHABAR

नई दिल्ली /लखनऊ 3 अक्टूबर 26*आराधना मिश्रा बनीं यूपी कांग्रेस की नई अध्यक्ष, इमरान मसूद बनाए गए कार्यकारी अध्यक्ष*

नई दिल्ली /लखनऊ 3 अक्टूबर 26*आराधना मिश्रा बनीं यूपी कांग्रेस की नई अध्यक्ष, इमरान मसूद बनाए गए कार्यकारी अध्यक्ष*

नई दिल्ली /लखनऊ 3 अक्टूबर 26*आराधना मिश्रा बनीं यूपी कांग्रेस की नई अध्यक्ष, इमरान मसूद बनाए गए कार्यकारी अध्यक्ष*

नई दिल्ली से पदम सिंह की रिपोर्ट यूपीआजतक 

 

नई दिल्ली/लखनऊ:अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने उत्तर प्रदेश में संगठन को नई धार देने और आगामी चुनावी चुनौतियों से निपटने के लिए बड़े रणनीतिक फेरबदल का ऐलान किया है। पार्टी आलाकमान ने प्रतापगढ़ जिले की पारंपरिक सीट रामपुर खास से तेजतर्रार विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। इसके साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मजबूत जनाधार रखने वाले सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद को प्रदेश का कार्यकारी अध्यक्ष (Working President) बनाया गया है। सामाजिक समीकरणों और क्षेत्रीय संतुलन को साधने के लिए देवेन्द्र निषाद और आलोक प्रसाद को पार्टी का वरिष्ठ उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

​जमीनी पकड़ और रणनीतिक संतुलन

​आराधना मिश्रा ‘मोना’ को यूपी कांग्रेस की कमान सौंपना पार्टी का एक सोचा-समझा कदम माना जा रहा है। वह उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल (CLP) की नेता के तौर पर लगातार सक्रिय रही हैं और सदन के भीतर योगी सरकार की नीतियों के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाती रही हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की राजनीतिक विरासत को संभालने वाली आराधना मिश्रा ने रामपुर खास सीट पर लगातार जीत दर्ज कर अपनी सांगठनिक व चुनावी क्षमता साबित की है। उनकी इस ताजपोशी से कांग्रेस ने राज्य के ब्राह्मण समाज के साथ-साथ आधी आबादी यानी महिला वर्ग को सीधा राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया है।

​दूसरी तरफ, सहारनपुर से लोकसभा सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपने कैडर को सक्रिय करने की रणनीति अपनाई है। मसूद पहले भी प्रदेश संगठन में उपाध्यक्ष रह चुके हैं और अल्पसंख्यक व किसान बहुल इलाकों में उनकी मजबूत पकड़ है। आराधना मिश्रा और इमरान मसूद की यह जोड़ी पूर्व और पश्चिम के साथ-साथ सवर्ण और अल्पसंख्यक वोटबैंक का सीधा समन्वय बनाती दिख रही है।

​सामाजिक न्याय और जातीय संतुलन पर जोर

​पार्टी ने केवल शीर्ष दो पदों तक ही बदलाव सीमित नहीं रखा, बल्कि वरिष्ठ उपाध्यक्षों की नियुक्ति में भी जातीय संतुलन का पूरा ख्याल रखा है। देवेन्द्र निषाद को जिम्मेदारी देकर पार्टी ने पूर्वांचल और मध्य यूपी के नदी तटीय व मल्लाह-निषाद समुदायों को जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाया है। वहीं, आलोक प्रसाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाकर दलित समुदाय के बीच पार्टी की पहुंच को मजबूत करने की कोशिश की गई है।

​कांग्रेस नेतृत्व का यह दांव राज्य में ‘माई’ (मुस्लिम) के साथ गैर-यादव ओबीसी, दलित और अगड़ी जातियों के असंतुष्ट वर्गों को एक मंच पर लाने की व्यापक योजना का हिस्सा माना जा रहा है।

​नई टीम के सामने चुनौतियां

​उत्तर प्रदेश में लंबे समय से सत्ता से बाहर चल रही कांग्रेस के लिए यह बदलाव किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। नई प्रदेश अध्यक्ष और उनकी टीम के सामने कई अहम चुनौतियां खड़ी हैं:

  1. ​बूथ स्तर पर संगठन का पुनर्गठन: राज्य के अधिकतर जिलों में कांग्रेस का कैडर सुस्त पड़ा है। नई टीम के लिए सबसे पहली चुनौती गांव और बूथ स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं की फौज खड़ी करना होगी।
  2. ​कार्यकर्ताओं में ऊर्जा का संचार: गुटबाजी पर लगाम लगाना और लंबे समय से उपेक्षित महसूस कर रहे पुराने निष्ठावान नेताओं को नए युवाओं के साथ जोड़ना।
  3. ​सड़क से सदन तक आक्रामक विपक्ष की भूमिका: जनहित से जुड़े मुद्दों, बेरोजगारी, महंगाई, कानून-व्यवस्था और किसानों की समस्याओं पर सरकार के खिलाफ लगातार आंदोलन की रूपरेखा तैयार करना।
  4. ​गठबंधन का सामंजस्य: राष्ट्रीय स्तर और राज्य स्तर पर इंडिया गठबंधन के प्रमुख सहयोगी समाजवादी पार्टी के साथ सीटों और प्रभाव क्षेत्र का तालमेल बिठाना, ताकि पार्टी अपनी स्वतंत्र पहचान भी न खोए।

​संगठन में उत्साह की लहर

​इस घोषणा के बाद दिल्ली से लेकर लखनऊ तक पार्टी कार्यालयों में कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी कर और मिठाई बांटकर फैसले का स्वागत किया। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय (मॉल एवेन्यू, लखनऊ) पर जुटे नेताओं का कहना है कि आराधना मिश्रा के प्रशासनिक अनुभव, बेदाग छवि और इमरान मसूद के आक्रामक जनसंपर्क से पार्टी को जमीनी स्तर पर नई ऊर्जा मिलेगी।

​राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस नई सांगठनिक संरचना के जरिए कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह यूपी में सिर्फ प्रतीकात्मक उपस्थिति दर्ज कराने के मूड में नहीं है, बल्कि एक मजबूत सामाजिक गठबंधन बनाकर भविष्य की चुनावी राजनीति में मुख्यधारा का विकल्प बनने की तैयारी कर रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नई टीम किस तेजी से प्रदेश भर में अपनी राजनीतिक सक्रियता का विस्तार करती है।

Taza Khabar