मथुरा 5 नवम्बर 26-यम द्वितीया मेले को राजकीय दर्जा दिलाने की मांग ने पकड़ा जोर, परशुराम द्वार के नामकरण का प्रस्ताव भी पारित
कु0 सोनम
मथुरा की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान से जुड़े दो महत्वपूर्ण मुद्दे नगर निगम में चर्चा का विषय बना हैं। वार्ड संख्या 56 की पार्षद नीनू कुंजबिहारी भारद्वाज की पहल पर विश्व प्रसिद्ध यम द्वितीया मेले को राजकीय मेले का दर्जा दिलाने तथा वार्ड के मिलन तिराहे (द्वारका पेड़े वाले मार्ग) का नाम भगवान परशुराम द्वार किए जाने के प्रस्ताव मंगलवार को नगर निगम की बैठक में रखे गए। पार्षद के अनुसार, बैठक में दोनों प्रस्ताव पारित कर दिए गए हैं। यम द्वितीया मेला मथुरा की प्राचीन धार्मिक परंपरा का प्रमुख आयोजन है। इस अवसर पर विश्राम घाट सहित यमुना के विभिन्न घाटों पर लाखों श्रद्धालु भाई-बहन यमुना स्नान के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन यमुना स्नान करने से यमराज के भय से मुक्ति और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। मेले के व्यापक धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए इसे राजकीय मेले का दर्जा दिए जाने की मांग लंबे समय से उठती रही है। इस संबंध में यमुना महारानी आरती मुकुट मंडल समिति के महामंत्री शरद चतुर्वेदी ने 13 अप्रैल 2026 को पत्र लिखकर मांग उठाई थी। इसके बाद पार्षद नीतू कुंजबिहारी भारद्वाज ने 15 अप्रैल को नगर आयुक्त को पत्र सौंपकर यम द्वितीया मेले को राजकीय मेला घोषित कराने का अनुरोध किया। इस मामले में जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने 22 मई 2026 को प्रमुख सचिव, नगर विकास विभाग, उत्तर प्रदेश शासन को पत्र भेजकर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया था। इस प्रकार राजकीय मेले की मांग स्थानीय स्तर से जिला प्रशासन होते हुए शासन तक पहुंच चुकी है। हालांकि, अंतिम निर्णय शासन स्तर से होना बाकी है। मथुरा वृंदावन नगर निगम वार्ड संख्या 56 के मिलन तिराहे (द्वारका पेड़े वाले मार्ग) का नाम भगवान परशुराम द्वार किए जाने का प्रस्ताव भी नगर निगम की बैठक में रखा गया। पार्षद के अनुसार, इस प्रस्ताव को भी सदन में पारित कर दिया गया है। इस पहल पर भगवान परशुराम शोभायात्रा समिति एवं श्री वामन भगवान महोत्सव समिति के पदाधिकारियों ने पार्षद नीनू कुंजबिहारी भारद्वाज का आभार व्यक्त किया।श्री वामन भगवान महोत्सव समिति के संस्थापक श्याम शर्मा एवं कार्यकारिणी अध्यक्ष संजय हरियाणा ने कहा कि भगवान परशुराम के नाम पर द्वार का नामकरण क्षेत्र की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को सम्मान देने वाला कदम है। उन्होंने इस पहल के लिए पार्षद का धन्यवाद करते हुए नामकरण की शेष औपचारिक प्रक्रिया शीघ्र पूरी कराने की अपेक्षा जताई।यम द्वितीया मेले को राजकीय पहचान दिलाने और मिलन तिराहे को भगवान परशुराम द्वार के रूप में पहचान दिलाने की पहल को मथुरा की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के सम्मान से जोड़कर देखा जा रहा है। अब निगाहें शासन के निर्णय और भगवान परशुराम द्वार के नामकरण की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने पर टिकी हैं।
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