कौशांबी23 अक्टूबर 26*स्नातक मतदाता सूची पर बड़ा सवाल: 20 लाख आबादी, 77 डिग्री कॉलेज और सिर्फ 20,140 मतदाता!
तीन लाख से अधिक स्नातक होने के दावे के बीच मतदाता सूची में इतने कम नाम क्यों? उच्चस्तरीय जांच की मांग, निर्वाचन व्यवस्था पर उठे सवाल
कौशांबी, उत्तर प्रदेश*इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) चुनाव को लेकर कौशांबी जनपद में एक नया विवाद सामने आया है। जिले की स्नातक मतदाता सूची में दर्ज नामों की संख्या को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। एक ओर जिले की आबादी 20 लाख से अधिक होने का अनुमान है, वहीं दूसरी ओर स्नातक मतदाता सूची में महज 20,140 नाम दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या जिले में उच्च शिक्षा प्राप्त लोगों की संख्या अपेक्षा से कम है या फिर स्नातक मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में कहीं कोई कमी रह गई है?
यह मामला केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्नातक मतदाताओं के अधिकार, निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है। हालांकि, मतदाता सूची में नाम कम होने के आधार पर अपने आप किसी घोटाले या वोट चोरी की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसके लिए पात्र स्नातकों की वास्तविक संख्या, पंजीकरण के नियमों और आवेदन निरस्त होने के कारणों की जांच आवश्यक है।
20 लाख से अधिक आबादी वाले जिले में मतदाताओं की संख्या पर सवाल
उत्तर प्रदेश के जनगणना संचालन निदेशालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2011 में कौशांबी जिले की आबादी 15,99,596 थी। इसमें 8,38,485 पुरुष और 7,61,111 महिलाएं शामिल थीं। वर्ष 2001 में जिले की आबादी 12,93,154 दर्ज की गई थी। इन आंकड़ों के अनुसार, एक दशक में जिले की जनसंख्या में लगभग 23.70 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।
वर्ष 2021 की जनगणना निर्धारित समय पर नहीं हो सकी। ऐसे में जिले की वर्तमान आबादी 20 लाख से अधिक होने का अनुमान व्यक्त किया जा रहा है। दूसरी ओर, जिले की सिराथू, मंझनपुर और चायल विधानसभा सीटों में कुल 12,20,792 सामान्य मतदाता होने की जानकारी दी गई है। जिला प्रशासन द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया भी चर्चा में है।
इसी बीच स्नातक एमएलसी चुनाव की मतदाता सूची में दर्ज नामों की संख्या ने एक नई बहस छेड़ दी है। सवाल है कि जिले की शैक्षिक स्थिति और स्नातक मतदाता पंजीकरण के आंकड़ों के बीच इतना अंतर क्यों दिखाई दे रहा है?
77 डिग्री कॉलेज और हर साल 15 हजार स्नातक उत्तीर्ण होने का दावा
कौशांबी जिले में उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिले में 77 डिग्री कॉलेज संचालित हैं। दावा किया जा रहा है कि इन संस्थानों से हर वर्ष लगभग 15 हजार विद्यार्थी स्नातक की पढ़ाई पूरी करते हैं।
यदि इस अनुमान को आधार बनाकर पिछले 20 वर्षों का हिसाब लगाया जाए, तो लगभग तीन लाख विद्यार्थियों के स्नातक उत्तीर्ण होने की बात सामने आती है। इसके अतिरिक्त, इससे पहले स्नातक की डिग्री हासिल कर चुके लोग भी हैं। जिले के अनेक लोग नौकरी, व्यवसाय और अन्य कारणों से दूसरे शहरों तथा राज्यों में रहते हैं। वहीं, कई विद्यार्थियों ने जिले से बाहर स्थित विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से उच्च शिक्षा प्राप्त की है।
ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इन सभी लोगों में से कितने व्यक्ति इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए निर्धारित पात्रता की शर्तें पूरी करते हैं और कितनों ने मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन किया है।
यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि कॉलेजों से स्नातक उत्तीर्ण करने वाले सभी विद्यार्थियों को स्वतः स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जाता। इसके लिए निर्धारित कानूनी पात्रता और पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करना आवश्यक होता है।
पिछली सूची में 11,359 नाम, अब 20,140 होने की जानकारी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले चुनाव के समय कौशांबी जिले की स्नातक मतदाता सूची में 11,359 मतदाताओं के नाम दर्ज थे। इस बार यह संख्या बढ़कर 20,140 बताई जा रही है।
आंकड़ों की तुलना करने पर सूची में नामों की संख्या में वृद्धि दिखाई देती है। इसके बावजूद, जिले में स्नातक शिक्षा प्राप्त लोगों की अनुमानित संख्या को देखते हुए पंजीकरण का अनुपात कम होने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कितने पात्र स्नातकों ने आवेदन किया, कितने आवेदन स्वीकार किए गए और कितने आवेदन दस्तावेजों की कमी या अन्य कारणों से निरस्त हुए। यदि बड़ी संख्या में पात्र लोगों के आवेदन किसी त्रुटि के कारण अस्वीकार हुए हैं, तो उस पर गंभीरता से कार्रवाई होनी चाहिए।
दूसरी ओर, यदि अधिकांश पात्र स्नातकों ने आवेदन ही नहीं किया, तो इसके पीछे जागरूकता की कमी, पंजीकरण प्रक्रिया की जानकारी का अभाव या अन्य व्यावहारिक कठिनाइयां हो सकती हैं। इन संभावनाओं की जांच तथ्यों के आधार पर ही की जा सकती है।
क्या मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में हुई कोई चूक?
स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों और जागरूक मतदाताओं की ओर से आरोप लगाए जा रहे हैं कि स्नातक मतदाता सूची बनाने की प्रक्रिया में पात्र लोगों को पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहा है।कुछ लोगों का आरोप है कि आवेदन प्रक्रिया में अनियमितताएं होती हैं और कई पात्र स्नातकों के नाम सूची में शामिल नहीं हो पाते।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी आवश्यक है। यदि किसी प्रत्याशी, कर्मचारी या अधिकारी द्वारा नियमों के विरुद्ध आवेदन स्वीकार करने अथवा निरस्त करने का मामला सामने आता है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि, बिना प्रमाण किसी व्यक्ति या अधिकारी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि आवेदन स्वीकार या निरस्त करने के स्पष्ट कारण संबंधित आवेदकों को बताए जाएं। साथ ही, पात्रता संबंधी दस्तावेजों की जांच समान नियमों के तहत हो और किसी भी आवेदक के साथ पक्षपात न किया जाए।
समाज कल्याण विभाग के आंकड़ों पर भी चर्चा
समाज कल्याण विभाग से संबंधित जानकारी में जिले में 118 उच्च शिक्षण संस्थानों का उल्लेख होने की बात भी सामने आई है। इन संस्थानों में विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिए जाने का दावा किया गया है।
यदि जिले में वास्तव में बड़ी संख्या में विद्यार्थी उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, तो स्नातक मतदाता सूची में दर्ज नामों की संख्या और पंजीकरण प्रक्रिया का तुलनात्मक अध्ययन महत्वपूर्ण हो जाता है। हालांकि, समाज कल्याण विभाग के आंकड़ों में शामिल सभी संस्थान डिग्री कॉलेज हों, यह जरूरी नहीं है। इसलिए 77 डिग्री कॉलेजों और 118 उच्च शिक्षण संस्थानों के आंकड़ों का वर्गीकरण तथा सत्यापन भी आवश्यक है।
शिक्षा विभाग, विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और निर्वाचन अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर वास्तविक आंकड़े सामने लाए जाने चाहिए, ताकि भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।
प्रबुद्ध वर्ग ने उठाई उच्चस्तरीय जांच की मांग
इस पूरे मामले को लेकर प्रबुद्ध वर्ग और जागरूक नागरिकों की ओर से स्नातक मतदाता सूची की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग उठाई जा रही है। मांग है कि जिले में स्नातक उत्तीर्ण लोगों की उपलब्ध जानकारी, पंजीकरण आवेदनों, स्वीकृत नामों और निरस्त आवेदनों का नियमानुसार परीक्षण किया जाए।
इसके साथ ही पात्र स्नातकों को मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाए। आवेदन निरस्त होने की स्थिति में कारण बताए जाएं और नियमानुसार आपत्ति या सुधार का अवसर दिया जाए। यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा जानबूझकर की गई अनियमितता साबित होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
निर्वाचन आयोग और प्रशासन की जवाबदेही महत्वपूर्ण
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव शिक्षित मतदाताओं की भागीदारी से जुड़ा है। इसलिए मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता का विशेष महत्व है। यदि पात्र मतदाता सूची से बाहर रह जाते हैं, तो उनकी लोकतांत्रिक भागीदारी प्रभावित हो सकती है। वहीं, मतदाता सूची की समीक्षा ठोस दस्तावेजों और निर्धारित नियमों के आधार पर ही होनी चाहिए।
फिलहाल कौशांबी में स्नातक मतदाताओं की संख्या को लेकर उठे सवालों का संतोषजनक जवाब आधिकारिक आंकड़ों और जांच के बाद ही मिल सकेगा। प्रशासन और निर्वाचन अधिकारियों को चाहिए कि वे पंजीकरण से जुड़े तथ्यों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करें, ताकि किसी भी तरह की शंका या भ्रम की स्थिति न रहे।
अब निगाहें निर्वाचन अधिकारियों पर हैं कि वे इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और स्नातक मतदाता सूची को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब किस प्रकार देते हैं।
रिपोर्ट: सुशील केसरवानी
वरिष्ठ पत्रकार एवं ब्यूरो चीफ, जनपद कौशांबी
यूपीआजतक न्यूज़ चैनल
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