बाराबंकी 22दिसम्बर 25*जिस धागे कि गांठे खुल सकती है, ऊस पर कभी कैची ना चलाये-शोभित शुक्ला
बाराबंकी *तजुर्बा कहता है, अगर मनोभूमि में जहर भरा हो, तो रणभूमि में कहर मचना लाजमी है। ज़िंदगी ने अगर आज थोड़ा झुका दिया है, तो घबराइए मत…क्योंकि झुककर ही इंसान आगे बढ़ना सीखता है।”
*सुप्रभात : ब्यूरोचीफ : शोभित शुक्ला ‘शुभ’*

More Stories
उन्नाव 18 जनवरी 26**परिवार परामर्श केन्द्र व महिला हेल्पडेस्क के अथक प्रयासों से पति-पत्नी के 26 विवादित जोड़ो की सकुशल की गयी विदाई*
कौशाम्बी 18 जनवरी 26**आरोग्य स्वास्थ्य मेले में 1253 मरीजों का चिकित्सको द्वारा किया गया उपचार*
कौशाम्बी 18जनवरी 26**युवा और किसान विरोधी है भाजपा सरकार ~ विजय प्रकाश*